दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के लिए आज 18 सितंबर को मतदान शुरू हो गया है। विश्वविद्यालय परिसर में चुनावी सरगर्मी के बीच इस बार मतदान से ठीक पहले हिंसा और झड़पों की घटनाओं ने माहौल को गरमा दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा और कथित गुंडागर्दी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए साफ कहा है कि लोकतंत्र को अपराधियों का समाज नहीं बनने दिया जा सकता। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि उठाए गए कदम संतोषजनक नहीं पाए गए तो मतगणना और परिणाम घोषित करने पर रोक लगाने जैसे कड़े आदेश दिए जा सकते हैं। डूसू चुनाव के लिए करीब 2.75 लाख छात्र मतदान के पात्र हैं और परिणाम 19 सितंबर को घोषित किए जाने हैं। मतदान दो पालियों में कराया जाएगा। दिन की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए मतदान सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगा, जबकि शाम की पाली के छात्रों के लिए मतदान दोपहर 3 बजे से शाम 7:30 बजे तक चलेगा।
चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव समेत चार प्रमुख पदों के लिए मतदान होगा। विश्वविद्यालय की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में कई सूचनाएं भी जारी की गई हैं, जिनमें पात्र मतदाताओं और चुनाव संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश शामिल हैं। डूसू चुनाव को देश के सबसे बड़े छात्रसंघ चुनावों में गिना जाता है। चुनाव में बड़ी संख्या में छात्र सीधे मतदान करते हैं और इसका असर विश्वविद्यालय परिसर की छात्र राजनीति पर दिखाई देता है। पिछले वर्ष के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की थी। इस बार भी प्रमुख छात्र संगठनों के बीच मुकाबला कई मुद्दों को लेकर केंद्रित रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान छात्रावास, छात्र सुविधाएं, सुरक्षा, फीस और परिसर से जुड़े विभिन्न मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
दिल्ली विश्वविद्यालय का विस्तार उत्तर और दक्षिण परिसर के साथ कई कॉलेजों और संस्थानों तक है। उत्तर परिसर और दक्षिण परिसर के बीच करीब 15 किलोमीटर की दूरी है। विश्वविद्यालय में 90 से अधिक कॉलेज हैं, लेकिन डूसू के प्रत्यक्ष चुनाव में सभी कॉलेज मतदान नहीं करते। करीब 52 कॉलेज और संकाय सीधे तौर पर डूसू चुनाव की मतदान प्रक्रिया में शामिल होते हैं। सेंट स्टीफंस कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज और जीसस एंड मैरी कॉलेज जैसे कुछ प्रमुख कॉलेज डूसू के प्रत्यक्ष चुनाव का हिस्सा नहीं हैं।
मतदान से पहले चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में कई जगहों पर तनाव की घटनाएं सामने आईं। बुधवार रात उत्तर परिसर में छात्रों के दो गुटों के बीच झड़प की खबर सामने आई। अलग-अलग घटनाओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन से जुड़े पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। प्रचार के अंतिम दिन कई स्थानों पर कथित मारपीट और हंगामे की घटनाओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। एक शिक्षक के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर भी शिक्षकों में नाराजगी सामने आई।
हिंसा और चुनावी नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती, कार्रवाई रिपोर्ट मांगी
डूसू चुनाव के दौरान हिंसा और चुनावी नियमों के उल्लंघन से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के रवैये पर गंभीर चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि लोकतंत्र को आपराधिक गतिविधियों का मंच नहीं बनने दिया जा सकता। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई घटनाओं को रोकने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने फिलहाल मतदान रोकने का आदेश नहीं दिया है। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस और सरकार की ओर से दी गई कार्रवाई रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हुई तो मतगणना या परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश दिया जा सकता है। यानी आज होने वाला मतदान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराया जाएगा, लेकिन 19 सितंबर को प्रस्तावित मतगणना और परिणाम की प्रक्रिया अदालत के अगले रुख पर निर्भर कर सकती है।
अदालत के समक्ष चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर चुनाव आचार संहिता और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। इनमें पोस्टर और प्रचार सामग्री से लेकर बाहरी लोगों की मौजूदगी, प्रचार के तौर-तरीकों और कथित बल प्रयोग जैसे आरोप शामिल हैं। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस को चुनावी नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच डूसू चुनाव में छात्र संगठनों ने अपने-अपने मुद्दों को लेकर मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की है। प्रमुख संगठनों ने घोषणापत्र और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को प्रचार का आधार बनाया। छात्रावास और सुरक्षित आवास का मुद्दा भी इस चुनाव में प्रमुखता से सामने आया है।
हाल में सत्य निकेतन में भवन गिरने की घटना के बाद छात्र आवास और सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय में चर्चा तेज हुई है। विभिन्न छात्र संगठनों ने छात्रावासों की संख्या बढ़ाने और छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग प्रस्ताव रखे हैं। अब सभी की नजर आज होने वाले मतदान पर है। करीब 2.75 लाख पात्र मतदाताओं के सामने चार प्रमुख पदों के लिए उम्मीदवारों को चुनने का विकल्प होगा। मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों और चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा भी अहम होगी। 19 सितंबर को परिणाम घोषित किए जाने हैं, लेकिन हाईकोर्ट की गुरुवार की चेतावनी के बाद मतगणना की प्रक्रिया पर भी नजर बनी रहेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के सामने मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से कराने के साथ-साथ चुनावी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की चुनौती है।


















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