समान नागरिक संहिता को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सक्रियता और हालिया बयानों के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर फिलहाल अपना रुख स्पष्ट करने से इनकार कर दिया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता किस रूप में आएगी और इसमें क्या प्रावधान किए जाएंगे, यह सार्वजनिक नहीं हुआ है। ऐसे में पहले प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा होगी और फिर पार्टी में विचार-विमर्श के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। वहीं, जदयू के वरिष्ठ नेताओं के बयानों से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी इस मुद्दे पर भाजपा से अलग अपनी राजनीतिक स्थिति बनाए रखने की तैयारी में है। विजय चौधरी ने साफ किया कि समान नागरिक संहिता को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक विधेयक के प्रावधान सामने नहीं आते, तब तक इस पर पार्टी का रुख तय करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि प्रावधानों को देखने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री से चर्चा की जाएगी। इसके बाद पार्टी के भीतर विमर्श होगा और उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता में क्या प्रावधान किए जा रहे हैं, इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए पहले यह समझना जरूरी है कि प्रस्तावित कानून का स्वरूप क्या होगा और उसका प्रभाव किन-किन क्षेत्रों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रावधान सामने आने के बाद उनका अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद गृह मंत्री से सीधे बातचीत होगी और यदि कोई परेशानी या चिंता सामने आती है तो उस पर चर्चा की जाएगी। विजय चौधरी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब समान नागरिक संहिता को लेकर भाजपा की ओर से लगातार सक्रियता दिखाई जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह के बयानों के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज हो गई है। भाजपा जहां देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात करती रही है, वहीं उसके सहयोगी दलों की अपनी-अपनी चिंताएं और राजनीतिक प्राथमिकताएं हैं। बिहार में जदयू का रुख इस बहस को और महत्वपूर्ण बना रहा है।
विजय चौधरी ने कहा कि पार्टी अभी प्रावधानों के आने का इंतजार करेगी। उन्होंने दोहराया कि प्रावधानों को देखने के बाद ही गृह मंत्री से बातचीत होगी। उसके बाद पार्टी में विचार-विमर्श किया जाएगा और तब निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी तरह की परेशानी या चिंता होगी तो गृह मंत्री से बात की जाएगी। फिलहाल यह कहना संभव नहीं है कि पार्टी किस तरह का रुख अपनाएगी। जदयू नेता ने इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल के रुख को लेकर पूछे गए सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आरजेडी क्या चाहती है, इससे हम लोगों को क्या मतलब है।
उनके इस बयान से साफ है कि पार्टी समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर अपना निर्णय विपक्षी दलों की मांग या रुख के आधार पर नहीं, बल्कि अपने विचार-विमर्श के बाद लेना चाहती है। जदयू की ओर से आए इन बयानों ने भाजपा और उसके सहयोगी दल के बीच समान नागरिक संहिता को लेकर मतभेद की संभावनाओं को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, पार्टी ने अभी इस मुद्दे पर खुलकर विरोध नहीं जताया है। उसका कहना है कि पहले विधेयक के प्रावधानों को समझना जरूरी है। इसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। यही वजह है कि जदयू नेताओं के बयान को फिलहाल सावधानी से आगे बढ़ने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
जदयू के नेताओं ने भी साफ किया रुख, बिहार में अलग स्टैंड के संकेत
बिहार विधानसभा में जदयू विधायक दल के नेता और सूचना, जनसंपर्क एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने भी समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर पार्टी की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जो बयान पार्टी के प्रवक्ता की ओर से दिया गया है, वही उनका भी स्टैंड है। श्रवण कुमार के इस बयान से यह संकेत मिला कि जदयू के भीतर इस मुद्दे पर फिलहाल एक समान रुख बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पार्टी के प्रवक्ता के बयान को ही अपना रुख बताते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता पर जदयू की स्थिति वही होगी, जो पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर रखी गई है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पार्टी इस मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं के बयानों के बजाय अपने सामूहिक निर्णय को प्राथमिकता देगी। वहीं, नालंदा से जदयू सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने समान नागरिक संहिता को लेकर और अधिक स्पष्ट तथा दो टूक बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमित शाह को जो कहना है, वह कहें, लेकिन बिहार में समान नागरिक संहिता लागू नहीं होगी। सांसद के इस बयान ने इस मुद्दे पर जदयू और भाजपा के बीच संभावित मतभेद को और गहरा कर दिया है।
कौशलेन्द्र कुमार ने कहा कि केंद्र में जदयू भाजपा के साथ है, लेकिन बिहार में पार्टी का अपना अलग स्टैंड है। उनके इस बयान को बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों और राज्य में जदयू की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, यह बयान पार्टी के सभी नेताओं की ओर से समान रूप से दोहराया जाएगा या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। जदयू के नेताओं के बयानों में एक तरफ जहां विधेयक के प्रावधानों का अध्ययन करने और उसके बाद फैसला लेने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने बिहार में इसके लागू नहीं होने की बात कही है। इन दोनों बयानों के बीच राजनीतिक बहस का केंद्र यही बन गया है कि समान नागरिक संहिता पर जदयू का अंतिम रुख क्या होगा और वह भाजपा के साथ इस मुद्दे पर किस तरह आगे बढ़ेगी।
समान नागरिक संहिता का मुद्दा देश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इसके समर्थक इसे सभी नागरिकों के लिए समान कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हैं, जबकि विरोध करने वाले दलों और संगठनों की ओर से इसके प्रावधानों, सामाजिक प्रभाव और विभिन्न समुदायों की व्यक्तिगत कानून व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में किसी भी प्रस्तावित कानून के प्रावधानों को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है। बिहार में जदयू और भाजपा गठबंधन की राजनीति के बीच समान नागरिक संहिता का मुद्दा एक नया राजनीतिक परीक्षण बन सकता है। जदयू पहले भी कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी अलग राय रखता रहा है। अब समान नागरिक संहिता को लेकर भी पार्टी का रुख इसी दिशा में दिखाई दे रहा है। हालांकि, विजय चौधरी ने स्पष्ट किया है कि अभी प्रावधान सामने आने बाकी हैं और अंतिम निर्णय पार्टी के भीतर चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
फिलहाल, अमित शाह के बयान के बाद समान नागरिक संहिता पर भाजपा की सक्रियता के बीच जदयू की ओर से आए अलग-अलग बयानों ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी जहां अध्ययन और विमर्श के बाद फैसला लेने की बात कर रहे हैं, वहीं सांसद कौशलेन्द्र कुमार बिहार में इसे लागू नहीं करने की बात कह चुके हैं। अब नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित विधेयक के प्रावधान सामने आने के बाद जदयू किस तरह अपना अंतिम रुख तय करता है और भाजपा के साथ इस मुद्दे पर उसकी बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।


















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