उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मौसम से जुड़ी मुश्किलें लगातार बनी हुई हैं। उत्तराखंड में केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीरबासा के पास पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण पैदल यात्रा तीसरे दिन भी रोकनी पड़ी है। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा बलों ने मार्ग पर आवाजाही बंद रखी है। इस बीच करीब सात हजार यात्रियों को सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड की ओर भेजा जा चुका है, जबकि 500 से अधिक यात्री अभी भी अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं। केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा आज से शुरू कर दी गई है, जिससे यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि पैदल मार्ग पर स्थिति सामान्य होने तक यात्रा शुरू नहीं की जाएगी। चीरबासा क्षेत्र के आसपास पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण पैदल यात्रियों के लिए खतरा बना हुआ है। बारिश और भूस्खलन के बीच पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरने की घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन रही हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पैदल मार्ग पर आवाजाही रोकने का फैसला किया है। यात्रा मार्ग पर मौजूद यात्रियों को सुरक्षित स्थानों की ओर भेजने का काम सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि सुरक्षा बलों के जवानों ने अब तक करीब सात हजार यात्रियों को सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड की ओर भेजा है। यात्रियों को जोखिम वाले हिस्सों से दूर रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। फिलहाल 500 से अधिक यात्रियों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन की प्राथमिकता इन यात्रियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना है। इसके लिए हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और मार्ग को सुरक्षित बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। केदारनाथ यात्रा के लिए हेली सेवा शुरू होना यात्रियों के लिए राहत की खबर है। हवाई मार्ग से धाम पहुंचने की सुविधा उपलब्ध होने से उन यात्रियों को विकल्प मिलेगा जो पैदल मार्ग खुलने का इंतजार नहीं करना चाहते। हालांकि मौसम और हेली सेवा की उपलब्धता के आधार पर संचालन प्रभावित हो सकता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों को स्थिति को देखते हुए यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी जा रही है।
केदारनाथ धाम में यात्रा के दौरान मौसम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बारिश, भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं रास्तों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई बार यात्रा को अस्थायी रूप से रोकता है। मौजूदा स्थिति में भी पैदल मार्ग पर सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लिया जा रहा है। पैदल यात्रा बंद होने के कारण गौरीकुंड और आसपास के क्षेत्रों में यात्रियों की आवाजाही और ठहराव पर भी असर पड़ा है। प्रशासन की कोशिश है कि यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए और मार्ग की स्थिति में सुधार होने के बाद ही आगे की आवाजाही की अनुमति दी जाए। यात्रियों से भी अपील की जा रही है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।
हिमाचल प्रदेश में अगले तीन दिन सक्रिय रहेगा मानसून
हिमाचल प्रदेश में भी अगले तीन दिनों तक मानसून सक्रिय रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी जिले के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इससे उन इलाकों में प्रशासन और लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जहां हाल के दिनों में बारिश के कारण मुश्किलें बढ़ी थीं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले 72 घंटे के दौरान प्रदेश के अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। बारिश के कारण तापमान में कमी आने से मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना हो सकता है। हालांकि लगातार बारिश के कारण कुछ स्थानों पर सड़क यातायात और स्थानीय गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी।
हिमाचल के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलने के कारण स्थानीय स्तर पर बारिश की तीव्रता अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखने और जरूरी होने पर ही लंबी यात्रा करने की सलाह दी जाती है। भारी बारिश का अलर्ट नहीं होने के बावजूद प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभाग सतर्क हैं। मानसून के दौरान पहाड़ी इलाकों में अचानक तेज बारिश होने पर भूस्खलन, पत्थर गिरने और सड़क बाधित होने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
हिमाचल में तापमान में गिरावट का असर मौसम के मिजाज पर भी दिखाई देगा। अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान दो से तीन डिग्री तक नीचे आने से गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि बारिश के साथ उमस और स्थानीय स्तर पर जलभराव जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। उत्तराखंड में केदारनाथ पैदल मार्ग पर पत्थर गिरने की घटनाओं और हिमाचल में सक्रिय मानसून के बीच दोनों राज्यों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा बनाए रखना है। केदारनाथ में फिलहाल पैदल यात्रा बंद है, लेकिन हेली सेवा शुरू होने से यात्रियों के लिए वैकल्पिक रास्ता खुल गया है। वहीं हिमाचल में भारी बारिश की चेतावनी नहीं होने से स्थिति फिलहाल नियंत्रण में रहने की उम्मीद है।
यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए इस समय सबसे जरूरी है कि वे मौसम और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम साफ दिखाई देने के बावजूद अचानक बारिश या पत्थर गिरने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। ऐसे में सुरक्षित स्थान पर रहना और प्रशासन की अनुमति के बिना बंद या संवेदनशील मार्गों पर आगे नहीं बढ़ना ही सबसे बेहतर विकल्प है।


















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