भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘सेमिकॉन 2.0’ कार्यक्रम को मंजूरी दे दी गई। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन, चिप निर्माण, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की पूरी श्रृंखला को मजबूत करना है, ताकि भारत आयात पर निर्भरता कम करते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान हासिल कर सके। कैबिनेट बैठक में केवल सेमीकंडक्टर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी के लिए भी दो बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें गंगा और वरुणा नदी के किनारे बनने वाले आधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना और पर्यटन को नई गति देना है।
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज के दौर में सेमीकंडक्टर किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कैमरा, टीवी, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, ऑटोमोबाइल, रेलवे, मेडिकल उपकरण, रक्षा प्रणाली और मिसाइलों तक लगभग हर आधुनिक तकनीक में सेमीकंडक्टर चिप्स की अहम भूमिका होती है। ऐसे में भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नई योजना केवल चिप डिजाइन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को मजबूत करेगी। इसमें सिलिकॉन इन्गॉट निर्माण, वेफर निर्माण, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, परीक्षण और उन्नत डिजाइन जैसी सभी प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे देश में बड़े निवेश आएंगे, उच्च तकनीक वाले उद्योग विकसित होंगे और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
सेमीकंडक्टर निर्माण की जटिलता को समझाते हुए अश्विनी वैष्णव ने एक रोचक उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति से अपने नाखून पर अपना नाम लिखने के लिए कहा जाए तो यह संभव हो सकता है, लेकिन उसी नाखून पर पूरी रामायण या महाभारत लिखने जैसी सूक्ष्मता और सटीकता जिस तकनीक में चाहिए, वही स्तर सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में आवश्यक होता है। इसी वजह से यह दुनिया के सबसे जटिल और अत्याधुनिक विनिर्माण क्षेत्रों में गिना जाता है। सरकार का मानना है कि ‘सेमिकॉन 2.0’ के जरिए भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। इससे घरेलू उद्योगों को भी अत्याधुनिक चिप्स की उपलब्धता बढ़ेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की लागत तथा आयात पर निर्भरता में कमी आएगी।
काशी में ट्रैफिक जाम से राहत के लिए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर, मोबाइल पीएलआई 2.0 को भी मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वाराणसी की बढ़ती आबादी, पर्यटन और यातायात को देखते हुए दो बड़ी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि काशी में हर वर्ष लगभग 15 करोड़ पर्यटक पहुंचते हैं। लगातार बढ़ती आवाजाही के कारण शहर की सड़कों पर दबाव बढ़ा है, जिसे कम करने के लिए आधुनिक परिवहन अवसंरचना विकसित की जाएगी।
पहली परियोजना वरुणा एक्सप्रेसवे है। यह वरुणा नदी के किनारे विकसित होने वाला लगभग 43 किलोमीटर लंबा छह और चार लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर होगा। इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के तहत बनाया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 10,998 करोड़ रुपये है और इसे लगभग चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा गंगा नदी के समानांतर 46 किलोमीटर लंबा छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर भी बनाया जाएगा। यह कॉरिडोर आईआईटी-बीएचयू, लंका चौराहा और रामनगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ेगा। परियोजना के तहत एक आधुनिक सिग्नेचर केबल-स्टे पुल का भी निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 14,447.64 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद वाराणसी में ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी आएगी। शहर के भीतर आवागमन तेज होगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यापार तथा आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को और मजबूती देने के लिए मोबाइल उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (मोबाइल पीएलआई 2.0) के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी है। इसके लिए 62,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से मोबाइल फोन निर्माण, निवेश, निर्यात और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य भारत को केवल मोबाइल फोन असेंबली का केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेमिकॉन 2.0, मोबाइल पीएलआई 2.0 और काशी की नई अवसंरचना परियोजनाएं मिलकर देश में तकनीकी विकास, औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक प्रगति को नई दिशा दे सकती हैं।

















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