उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से कथित छेड़छाड़ का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से चर्चा में बने इस प्रकरण में चमोली पुलिस के विशेष जांच दल ने बद्री-केदार मंदिर समिति के निलंबित निजी सहायक प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई देहरादून स्थित उनके आवास से की गई, जिसके बाद उन्हें चमोली लाकर बद्रीनाथ थाने में पूछताछ की जा रही है। मामले में पहले ही कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ चुके हैं और अब जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचने में जुटी हैं। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चमोली पुलिस के अनुसार विशेष जांच दल ने 12 जुलाई की रात लगभग दस बजे देहरादून के नेहरू कॉलोनी स्थित आवास से प्रमोद नौटियाल को हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें चमोली लाकर बद्रीनाथ थाने में पूछताछ शुरू की गई। उनके साथ मंदिर समिति के चार अन्य कर्मचारियों से भी अलग-अलग पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।
जांच दल सादे वस्त्रों में देहरादून पहुंचा था और पूरी कार्रवाई गोपनीय तरीके से की गई।
पूछताछ के दौरान जब प्रमोद नौटियाल से यह सवाल किया गया कि क्या इस मामले में मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की भी कोई भूमिका है, तो उन्होंने सिर हिलाकर इससे इनकार कर दिया। चमोली पुलिस ने बताया कि इस मामले में 8 जुलाई को प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवाण की शिकायत पर बद्रीनाथ थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार के निर्देश पर विशेष जांच दल का गठन किया गया, जिसने विभिन्न साक्ष्यों को एकत्र कर जांच शुरू की। जांच के दौरान मंदिर परिसर में लगे निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग, कर्मचारियों के बयान और अन्य दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई। पुलिस का दावा है कि जांच में कई ऐसे दृश्य सामने आए हैं, जिनमें प्रमोद नौटियाल कथित रूप से अपने मोबाइल के नीचे और जेब में मंदिर की धनराशि तथा अन्य भेंट सामग्री ले जाते दिखाई दिए।
पुलिस के अनुसार उनके कब्जे से जुड़े साक्ष्यों में पांच सौ रुपये के नोट, सोना-चांदी के सिक्कों के पैकेट, शालिग्राम शिला तथा केसर का पैकेट जैसी सामग्री का उल्लेख भी सामने आया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सभी तथ्यों का दस्तावेजी और तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है। इस बीच मामले ने न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया। प्रमोद नौटियाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मंदिर समिति से पूरे मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को प्रस्तावित है। चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच दल सभी अभिलेखों, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण कर रहा है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
2 जुलाई को बद्रीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गणना के दौरान अनियमितता की सूचना मिली
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 2 जुलाई को हुई, जब बद्रीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गणना के दौरान कथित अनियमितता की सूचना बद्री-केदार मंदिर समिति को मिली। प्रारंभिक जांच में पता चला कि सुबह लगभग नौ बजे से साढ़े नौ बजे के बीच गणना स्थल से नियमों के विपरीत धनराशि हटाई गई थी। इसी समय की निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग में प्रमोद नौटियाल मोबाइल के नीचे नोटों जैसी गड्डी दबाकर ले जाते हुए दिखाई दिए। यह दृश्य सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया और सामाजिक माध्यमों पर भी इसकी व्यापक चर्चा होने लगी। इसके बाद मंदिर समिति ने तत्काल विभागीय जांच के आदेश दिए। मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में प्रमोद नौटियाल के विरुद्ध प्रथम दृष्टया अनियमितता पाए जाने की बात कही। रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवाण की शिकायत पर बद्रीनाथ थाने में उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए 25 जून, 29 जून और 2 जुलाई को हुई चढ़ावा गणना से संबंधित निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी अपने कब्जे में ले ली।
25 जून की रिकॉर्डिंग में भी प्रमोद नौटियाल नोटों जैसी गड्डी ले जाते हुए दिखाई दिए हैं। पुलिस इन दृश्यों को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए उनकी तकनीकी जांच करा रही है। इसके अलावा मंदिर परिसर में लगे 32 निगरानी कैमरों की लगभग 40 दिनों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं पहले भी इस प्रकार की कोई अनियमितता तो नहीं हुई थी। दूसरी ओर प्रमोद नौटियाल ने विभागीय जांच में स्वयं को पूरी तरह निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि वह हमेशा अपने साथ एक नोटबुक रखते हैं और निगरानी कैमरे में मोबाइल के नीचे दिखाई देने वाली वस्तु नोटों की गड्डी नहीं, बल्कि वही नोटबुक थी। उन्होंने किसी भी प्रकार की धनराशि या भेंट सामग्री अपने पास रखने के आरोपों से इनकार किया है।
हालांकि घटना के बाद उनका मोबाइल बंद पाया गया और उन्होंने ज्योतिर्मठ स्थित कार्यालय में भी कार्यभार ग्रहण नहीं किया। जांच समिति के समक्ष कर्मचारियों ने यह भी बताया कि घटना वाले दिन चढ़ावे की गणना के प्रभारी प्रमोद नौटियाल ही थे और उन्होंने गणना शुरू होने तथा समाप्त होने की जानकारी अन्य कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं दी। अब इस बहुचर्चित मामले में विशेष जांच दल की जांच, न्यायालय की आगामी सुनवाई और तकनीकी साक्ष्यों की रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील प्रकरण में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है और आगे किसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

















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