बांकीपुर में भाजपा को बड़ा झटका : राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के गढ़ में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की परंपरागत मानी जाने वाली सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शानदार जीत दर्ज कर भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। इस परिणाम को केवल एक विधानसभा सीट का चुनावी नतीजा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीतिक सोच और नए विकल्प की तलाश के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। बांकीपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया। भाजपा को उम्मीद थी कि उसकी संगठनात्मक ताकत और परंपरागत वोट बैंक इस सीट को सुरक्षित रखेंगे, लेकिन चुनाव परिणाम ने सभी राजनीतिक आकलनों को बदल दिया।

जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को कुल 64,151 वोट मिले, जो कुल मतों का 49.23 प्रतिशत है। भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 वोट प्राप्त हुए और वे दूसरे स्थान पर रहे। दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर 19,324 वोट रहा, जो किसी उपचुनाव के लिहाज से काफी बड़ा माना जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की परंपरागत सीट पर भाजपा की इतनी बड़ी हार पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई है। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा कुमारी 14,273 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा और राजद के कुल वोट मिलाकर 59,100 हुए, जबकि अकेले प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले। यानी दोनों प्रमुख दलों के संयुक्त वोटों से भी उन्हें 5,051 वोट अधिक मिले। यह आंकड़ा बताता है कि प्रशांत किशोर ने केवल किसी एक दल के वोटों में सेंध नहीं लगाई, बल्कि विभिन्न वर्गों के मतदाताओं को अपने पक्ष में जोड़ने में सफलता हासिल की।

कुल 1,30,313 वोट पड़े, जिनमें लगभग हर दूसरा मतदाता प्रशांत किशोर के पक्ष में खड़ा दिखाई दिया। यह परिणाम जन सुराज की राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ने का संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से प्रशांत किशोर बिहार में जन सुराज अभियान के माध्यम से गांव-गांव संपर्क कर रहे थे। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश की। बांकीपुर के नतीजे बताते हैं कि उनका यह प्रयास मतदाताओं के बीच प्रभाव छोड़ने में सफल रहा।

चुनाव परिणाम के दौरान एक और मामला चर्चा का विषय बना रहा। मतगणना के समय चुनाव आयोग की वेबसाइट पर राउंड की संख्या को लेकर भ्रम की स्थिति दिखाई दी। सुबह से वेबसाइट पर 31 राउंड की मतगणना का उल्लेख था। इसके बाद अचानक 32 और फिर 36 राउंड की गिनती प्रदर्शित होने लगी। कुछ समय बाद फिर 32 राउंड का आंकड़ा दिखाया गया। हालांकि इससे अंतिम परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर इसको लेकर सवाल उठाए गए।

बांकीपुर का परिणाम बिहार की आगामी राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। भाजपा के लिए यह हार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ी रही है। वहीं प्रशांत किशोर के लिए यह जीत उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता को मजबूत करने वाली साबित हो सकती है। अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जन सुराज आने वाले विधानसभा चुनावों में तीसरी ताकत के रूप में उभर पाएगी।

दतिया में कांग्रेस की वापसी, गुजरात के मांजलपुर में भाजपा ने कायम रखी बढ़त

बांकीपुर के साथ-साथ मध्य प्रदेश और गुजरात की दो अन्य विधानसभा सीटों के उपचुनाव परिणाम भी सामने आए। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया। यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव परिणाम में सबसे अधिक चर्चा इस बात की हुई कि भाजपा उम्मीदवार अपने ही राजनीतिक आधार क्षेत्र में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। यहां तक कि वे नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ पर भी बढ़त हासिल नहीं कर पाए। 

कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक सक्रियता के दम पर इस सीट पर वापसी की, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति में नए संदेश गए हैं। दूसरी ओर गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने अपना दबदबा कायम रखा। भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के भारी अंतर से पराजित किया। गुजरात में भाजपा की यह जीत बताती है कि राज्य में उसका संगठन और जनाधार अभी भी मजबूत बना हुआ है।

तीनों सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था और नतीजों ने तीन अलग-अलग राजनीतिक तस्वीरें पेश कीं। बिहार में भाजपा को बड़ा झटका लगा, मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने महत्वपूर्ण जीत हासिल की और गुजरात में भाजपा ने अपनी ताकत बरकरार रखी। हालांकि इन तीनों परिणामों में सबसे अधिक चर्चा बांकीपुर की रही, जहां प्रशांत किशोर ने भाजपा के सबसे मजबूत माने जाने वाले गढ़ में सेंध लगाकर अपनी राजनीतिक यात्रा की अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। यह परिणाम आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में गिना जा सकता है।

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