पीएम मोदी का वीडियो हटने पर मेटा ने जताया खेद, वीआईपी खातों के लिए लागू किए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने के मामले ने देश में डिजिटल मंचों की जवाबदेही और सोशल मीडिया कंपनियों की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस विवाद के बाद सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भारत सरकार को पत्र भेजकर खेद व्यक्त किया है। साथ ही कंपनी ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वीआईपी और संवेदनशील सार्वजनिक खातों के लिए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की जानकारी भी दी है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि मेटा ने सरकार को भेजे अपने पत्र में इस घटना पर अफसोस जताया है और यह स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री मोदी के फेसबुक वीडियो को हटाया जाना किसी जानबूझकर की गई कार्रवाई का परिणाम नहीं था, बल्कि एक स्वचालित प्रणाली में आई तकनीकी गड़बड़ी का नतीजा था। हालांकि, सरकार इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और मामले की गहन समीक्षा कर रही है।

एस. कृष्णन के अनुसार, 28 जुलाई के बाद मेटा ने अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं ताकि भविष्य में किसी भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक पदाधिकारी, संवैधानिक संस्था या राष्ट्रीय महत्व के खाते के साथ ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि सरकार कंपनी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और उसके द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों का परीक्षण कर रही है। यह मामला तब सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर साझा किया गया एक वीडियो कुछ समय के लिए मंच से हट गया। वीडियो के हटने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे कि आखिर देश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक खाते की सामग्री को किस आधार पर हटाया गया। मामले ने तेजी से तूल पकड़ा और सरकार ने मेटा से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।

मेटा ने बाद में वीडियो को बहाल कर दिया और सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि यह कार्रवाई एक स्वचालित प्रणाली में उत्पन्न हुई तकनीकी त्रुटि के कारण हुई थी। कंपनी ने कहा कि उसकी ऑटोमेटेड मॉडरेशन प्रणाली ने गलती से सामग्री को प्रभावित किया, जिसके चलते वीडियो अस्थायी रूप से मंच से हट गया। कंपनी ने इस चूक पर खेद जताते हुए भरोसा दिलाया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस जवाब को पर्याप्त नहीं माना। मंत्रालय का मानना है कि जब मामला देश के प्रधानमंत्री और आधिकारिक सरकारी संचार से जुड़ा हो, तब केवल तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देना पर्याप्त नहीं है। इसी कारण सरकार ने मेटा के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों को विस्तृत चर्चा के लिए बुलाने का निर्णय लिया है। यह केवल एक वीडियो हटने का मामला नहीं है, बल्कि इससे यह प्रश्न भी जुड़ा हुआ है कि वैश्विक डिजिटल मंच भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में किस प्रकार सामग्री प्रबंधन करते हैं और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कौन-से तंत्र मौजूद हैं। सरकार यह भी समझना चाहती है कि स्वचालित प्रणालियों में ऐसी कौन-सी कमियां हैं जिनके कारण उच्च-प्रोफाइल खातों की सामग्री भी प्रभावित हो सकती है।

भारत सरकार और मेटा के अधिकारियों के बीच जल्द उच्चस्तरीय बैठक आयोजित होगी 

आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि अगले 7 से 10 दिनों के भीतर भारत सरकार और मेटा के वैश्विक अधिकारियों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में केवल प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो हटने की घटना पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि सोशल मीडिया मंचों की नीतियों, सामग्री प्रबंधन प्रक्रियाओं और तकनीकी तंत्रों की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि बैठक में सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रश्नों पर मेटा की प्रतिक्रिया को भी परखा जाएगा। विशेष रूप से यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि कंपनी की स्वचालित प्रणालियां किस प्रकार काम करती हैं, संवेदनशील खातों के लिए क्या विशेष सुरक्षा उपाय मौजूद हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया मंच आज सार्वजनिक संवाद और सूचना प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। 

ऐसे में किसी भी तकनीकी त्रुटि का प्रभाव केवल एक खाते तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे लाखों उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने वाली जानकारी भी प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि सरकार इस मामले को केवल एक अलग-थलग तकनीकी घटना के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे डिजिटल शासन और मंचों की जवाबदेही के व्यापक संदर्भ में परख रही है। इस बीच, सरकार मैसेजिंग और सोशल मीडिया मंचों पर उपयोगकर्ता पहचान से संबंधित नए प्रस्तावों पर भी विचार कर रही है। चर्चा है कि कुछ मंचों पर यूजरनेम आधारित व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित बनाने के विकल्पों का अध्ययन किया जा रहा है, जिससे फर्जी खातों, प्रतिरूपण और पहचान संबंधी समस्याओं को कम किया जा सके। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

बता दें कि पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब 27 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर साझा किया गया एक वीडियो अचानक मंच से हट गया। वीडियो के गायब होने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई और सवाल उठने लगे कि देश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक खाते की सामग्री को किस आधार पर हटाया गया। मामला सामने आने के बाद मेटा ने वीडियो को दोबारा बहाल किया और स्वीकार किया कि यह कार्रवाई किसी नीति उल्लंघन के कारण नहीं, बल्कि उसकी स्वचालित प्रणाली में आई तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुई थी। घटना के बाद केंद्र सरकार ने मेटा से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा। कंपनी ने सरकार को पत्र लिखकर इस चूक पर खेद जताया और बताया कि समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि स्वचालित मॉडरेशन प्रणाली की त्रुटि के कारण वीडियो अस्थायी रूप से हट गया था। 

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