धनतेरस पर बाजारों में उमड़ी खरीदारों की भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महंगाई और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतें भी भारतीयों के त्योहारों के उत्साह को कम नहीं कर पातीं। शुभ मुहूर्त में खरीदारी की परंपरा निभाने के लिए सुबह से ही सराफा बाजारों, आभूषणों की दुकानों और शोरूम में ग्राहकों की आवाजाही बनी रही। सोने की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले तेजी होने के बावजूद लोगों ने अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीदारी की। किसी ने हल्के वजन के गहने पसंद किए तो किसी ने चांदी के सिक्कों और पारंपरिक आभूषणों को प्राथमिकता दी। व्यापारिक संगठनों के अनुमान के मुताबिक, इस बार धनतेरस पर देशभर में सोने-चांदी और आभूषणों का कारोबार 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। वहीं, ऑटोमोबाइल, बर्तन और अन्य सामानों को मिलाकर देश का कुल व्यापार 1.25 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। कारोबार के ये आंकड़े त्योहारों के दौरान बाजार में बने मजबूत उपभोक्ता उत्साह और खरीदारी की परंपरा की व्यापकता को दर्शाते हैं। धनतेरस को सोना-चांदी खरीदने के लिए विशेष शुभ दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई धातु घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता लेकर आती है।
यही वजह है कि बदलते समय और बाजार के नए विकल्पों के बावजूद आभूषणों की खरीदारी का आकर्षण कायम है। इस बार कीमतों में तेजी के चलते ग्राहकों ने खरीदारी की रणनीति जरूर बदली, लेकिन बाजार से दूरी नहीं बनाई। भारी और महंगे गहनों के बजाय हल्के वजन के आभूषणों की ओर रुझान अधिक दिखाई दिया। रोजमर्रा में पहने जा सकने वाले डिजाइन, छोटी चेन, अंगूठियां, कानों के आभूषण और हल्के हार ग्राहकों की पसंद में शामिल रहे। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, सोने और चांदी के कारोबार में इस बार भी बड़ी तेजी देखने को मिली। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स और अन्य व्यापारिक संगठनों ने आभूषणों की बिक्री का अनुमान 60 हजार करोड़ से 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बीच जताया है। हालांकि, यह अनुमानित कारोबार है और अलग-अलग संगठनों के आकलन में अंतर हो सकता है। इसके बावजूद बाजार में खरीदारी की व्यापकता ने सराफा कारोबारियों को उत्साहित किया।
देश के बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक आभूषणों की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रही। धनतेरस पर सिर्फ सोने के गहनों की ही मांग नहीं रही, बल्कि चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और पारंपरिक चांदी के बर्तन भी लोगों की खरीदारी का हिस्सा बने। कई परिवारों ने निवेश और धार्मिक परंपरा दोनों को ध्यान में रखकर चांदी के सिक्के खरीदे। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इसका आकर्षण बना रहा। खासकर कम बजट में शुभ खरीदारी करने वाले ग्राहकों ने चांदी को बेहतर विकल्प माना। वहीं, कुछ लोगों ने सोने के छोटे सिक्कों और सीमित वजन वाले आभूषणों को प्राथमिकता दी।
हल्के गहनों और चांदी के सिक्कों पर रहा जोर, कुल बाजार कारोबार 1.25 लाख करोड़ के पार
सोने-चांदी के अलावा धनतेरस पर बाजार के दूसरे क्षेत्रों में भी रौनक रही। ऑटोमोबाइल कारोबार में दोपहिया और चारपहिया वाहनों की खरीदारी हुई तो बर्तन बाजार में पीतल, तांबे, स्टील और अन्य धातुओं के बर्तनों की मांग बनी रही। इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरणों और सजावटी सामान की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ देखने को मिली। व्यापारिक संगठनों के अनुमान के मुताबिक, देशभर में इस बार धनतेरस पर सभी प्रमुख क्षेत्रों को मिलाकर कुल कारोबार 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इससे त्योहार के दौरान बाजार की व्यापक आर्थिक गतिविधियों का अंदाजा लगाया जा सकता है। व्यापारियों के लिए धनतेरस दीपावली के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी अवसरों में से एक है। इस दिन होने वाली बिक्री का असर केवल सराफा बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वाहन, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और घरेलू उपयोग की वस्तुओं के कारोबार को भी गति मिलती है। त्योहार से पहले दुकानों और शोरूम में विशेष तैयारियां की जाती हैं।
ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए डिजाइन, अलग-अलग मूल्य वर्ग और विशेष बिक्री योजनाएं भी पेश की जाती हैं। इस बार सोने की बढ़ती कीमतों ने ग्राहकों को खरीदारी से पहले बजट पर विचार करने के लिए जरूर मजबूर किया। कई लोगों ने अपनी पुरानी पसंद में बदलाव करते हुए कम वजन के गहने खरीदे, जबकि कुछ ने चांदी के सिक्कों और अन्य वस्तुओं से शुभ खरीदारी की परंपरा निभाई। बाजार के जानकारों के अनुसार, ग्राहकों की पसंद में आया यह बदलाव बताता है कि कीमतों के अनुरूप खरीदारी का तरीका बदल सकता है, लेकिन त्योहारों से जुड़ी परंपराओं और भावनाओं का महत्व बना रहता है।
धनतेरस पर देशभर के बाजारों में दिखाई दिया उत्साह त्योहारों के प्रति लोगों के भरोसे और खरीदारी की मजबूत परंपरा को दर्शाता है। सोने-चांदी के कारोबार में 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुमान और सभी क्षेत्रों को मिलाकर 1.25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार इस बात का संकेत है कि महंगाई के बावजूद धनतेरस का आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व कायम है।


















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