जंतर-मंतर आंदोलन के बाद सीजेपी का बड़ा एलान, सितंबर से शुरू करेगी ‘बोलती पब्लिक’ अभियान 

जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन और उसके बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की बड़ी सफलता बताया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि हाल के घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज आज भी सबसे बड़ी ताकत है और संगठित जनआंदोलन सत्ता को जवाबदेह बनाने की क्षमता रखते हैं। गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दीपके ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश में ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई कि सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछना आसान नहीं है। लेकिन युवाओं द्वारा चलाए गए आंदोलनों ने इस सोच को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल किसी एक मंत्री का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं की जीत का प्रतीक है जिन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की।

दीपके ने 25 जुलाई को हुए आंदोलन को देश के युवाओं के संघर्ष का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि लोगों के भीतर से डर का खत्म होना है। उनका कहना था कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक बिना भय के सरकार से सवाल पूछ सकें और अपनी बात रख सकें। उन्होंने कहा कि आंदोलन ने युवाओं को यह भरोसा दिया है कि उनकी आवाज अनसुनी नहीं की जा सकती। सीजेपी संस्थापक ने कहा कि उनकी पार्टी संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पार्टी डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचारों से प्रेरणा लेकर सामाजिक न्याय, समान अवसर और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक विमर्श को फिर से जनता के वास्तविक मुद्दों की ओर मोड़ने की जरूरत है।

दीपके ने जानकारी दी कि पार्टी की दो दिवसीय कोर कमेटी बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख फैसला सितंबर से देशव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करने का है। ‘बोलती पब्लिक’ नाम से शुरू होने वाले इस अभियान के तहत पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी देश के विभिन्न राज्यों में जाकर लोगों से सीधा संवाद करेंगे। अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को समझना तथा उन्हें राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाना है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आम जनता और राजनीतिक व्यवस्था के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। विशेष रूप से युवाओं को यह महसूस होता है कि उनकी समस्याओं और आकांक्षाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। ऐसे में ‘बोलती पब्लिक’ अभियान के माध्यम से लोगों की आवाज को सीधे सुनने और उसे नीति निर्माण की बहस में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

शिक्षा, बेरोजगारी और जवाबदेही को बनाएगी मुख्य मुद्दा

अभिजीत दीपके ने कहा कि पार्टी का सबसे बड़ा फोकस शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर रहेगा। उनके अनुसार देश में शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जिससे मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की बढ़ती फीस ने लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को बाजार की वस्तु के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराए। उनका मानना है कि जब तक शिक्षा सभी वर्गों की पहुंच में नहीं होगी, तब तक सामाजिक और आर्थिक समानता का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

रोजगार के मुद्दे पर बोलते हुए दीपके ने कहा कि देश में बेरोजगारी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। बड़ी संख्या में शिक्षित युवा डिग्री हासिल करने के बाद भी रोजगार के अवसरों की तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार की कमी के कारण अनेक युवाओं को अपनी योग्यता से अलग छोटे-मोटे कार्य करने पड़ रहे हैं। उनके अनुसार सरकार को रोजगार सृजन, कौशल विकास और उद्योगों में नए अवसर पैदा करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने न्यायपालिका और मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि आम नागरिकों को न्याय पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जबकि प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में अपेक्षाकृत तेजी देखने को मिलती है। उन्होंने न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मीडिया के संबंध में दीपके ने कहा कि लोकतंत्र में उसकी भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता से सवाल पूछना और जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मीडिया को आम लोगों की समस्याओं, युवाओं की चुनौतियों और सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखना चाहिए।

सीजेपी का कहना है कि आने वाले महीनों में वह शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर देशभर में व्यापक जनसंवाद शुरू करेगी। पार्टी का दावा है कि उसका उद्देश्य केवल राजनीतिक विस्तार नहीं, बल्कि नागरिकों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच भरोसे को मजबूत करना है। सितंबर से शुरू होने वाला ‘बोलती पब्लिक’ अभियान इसी दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।

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