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चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 5 विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर आज हो रहा उपचुनाव

देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में आज 6 अक्टूबर, मंगलवार को उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। कुल पांच विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन सीटों पर होने वाला मतदान कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अलग-अलग राज्यों में मुकाबले के समीकरण एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। कहीं त्रिकोणीय मुकाबला है तो कहीं सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। आज जिन सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें असम की नगांव लोकसभा सीट, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट, तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीट तथा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट शामिल हैं। इन सभी सीटों के चुनाव परिणाम 9 अक्टूबर 2026 को घोषित किए जाएंगे। असम की नगांव लोकसभा सीट पर मुकाबला तीन प्रमुख दलों के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। तमिलनाडु की दोनों सीटों पर सत्तारूढ़ दलों के साथ अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी भी मैदान में है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद हो रहा है। बोरदोलोई ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद लोकसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। इसके बाद भाजपा ने पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल को मैदान में उतारा है। अजमल की मौजूदगी ने इस सीट का मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। परिसीमन के बाद नगांव लोकसभा सीट के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। यहां करीब 19 लाख मतदाता हैं और इनमें 55 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। हालांकि बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में प्रद्युत बोरदोलोई ने भाजपा का दामन थाम लिया और विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने। भाजपा इससे पहले 1999 से 2014 तक इस सीट पर लगातार जीत दर्ज करती रही थी।

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट भी इस उपचुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा में है। 2026 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर मुकाबला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। रेजीनगर सीट पर भी उपचुनाव का कारण विधायक का इस्तीफा है। 2026 के विधानसभा चुनाव में दो सीटों से निर्वाचित हुए हुमायूं कबीर ने रेजीनगर सीट छोड़ दी थी। अब उनके बेटे गुलाम नबी आजाद चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने उनके मुकाबले शंकराव सरकार को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर भी राजनीतिक दलों के बीच जोरदार मुकाबले की उम्मीद है।

तमिलनाडु में विजय की पार्टी के लिए बड़ी परीक्षा, पुडुचेरी में भी सीधी टक्कर

तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर हो रहा उपचुनाव अभिनेता विजय की पार्टी के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। दोनों सीटों पर 2026 के विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में दोनों विधायकों ने इस्तीफा देकर विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम का दामन थाम लिया। इसके बाद इन दोनों सीटों पर उपचुनाव की स्थिति बनी। विजय की पार्टी ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं और उसके सामने अन्नाद्रमुक तथा द्रमुक की चुनौती है। इस वजह से दोनों सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है। विजय के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी पार्टी पहली बार किसी उपचुनाव में अपनी चुनावी ताकत आजमा रही है। इन सीटों का परिणाम पार्टी के संगठन और उसके जमीनी प्रभाव का संकेत दे सकता है।

पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट पर भी आज मतदान हो रहा है। मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने विधानसभा चुनाव में मंगलम और थट्टनचावडी दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने थट्टनचावडी सीट से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। इस सीट पर ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। इन उपचुनावों का असर भले ही तत्काल किसी सरकार के बहुमत पर पड़ने वाला नहीं है, लेकिन राजनीतिक तौर पर इनका महत्व कम नहीं है। अलग-अलग राज्यों में सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच ये चुनाव जनता के मौजूदा रुझान को समझने का अवसर देंगे।

खासकर असम में नगांव का परिणाम भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच बदलते समीकरण का संकेत दे सकता है। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर के नतीजे भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की जमीनी स्थिति का आकलन करने में मदद करेंगे। वहीं तमिलनाडु में विजय की पार्टी के प्रदर्शन पर पूरे राजनीतिक गलियारे की नजर रहेगी। आज होने वाले मतदान के बाद 9 अक्टूबर को सभी छह सीटों के नतीजे सामने आएंगे। इसके साथ यह भी साफ होगा कि मतदाताओं ने किस दल और किस उम्मीदवार पर भरोसा जताया है। सरकारों के बहुमत पर सीधा असर न डालने के बावजूद ये उपचुनाव आने वाले समय की राजनीति के लिए कई संकेत छोड़ सकते हैं।

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