हिमाचल प्रदेश में सूचना के अधिकार यानी आरटीआई कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने वाली राज्य सूचना आयोग की व्यवस्था लंबे समय से अधूरी पड़ी है। राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और सूचना आयुक्त (आईसी) दोनों पद खाली हैं। इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति नहीं होने से सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों की सुनवाई और उनके निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से सूचना आयोगों में रिक्त पदों को जल्द भरने को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं, इसके बावजूद हिमाचल सरकार अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी है। सरकार ने दोनों पदों पर नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बजाय एक बार फिर इच्छुक और पात्र उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह चौथी बार है जब मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। लगातार चौथी बार आवेदन मंगाए जाने से यह सवाल भी उठ रहा है कि जब सरकार के पास नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू करने का विकल्प मौजूद था तो अब तक इन पदों को क्यों नहीं भरा जा सका।
राज्य सूचना आयोग आरटीआई कानून के तहत नागरिकों को सूचना पाने के अधिकार की रक्षा करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। जब किसी व्यक्ति को सरकारी विभाग से मांगी गई सूचना नहीं मिलती या सूचना देने से इनकार किया जाता है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपील कर सकता है। ऐसे मामलों में सूचना आयोग अंतिम स्तर पर सुनवाई करते हुए संबंधित विभाग को सूचना उपलब्ध कराने और कानून के अनुरूप कार्रवाई के निर्देश दे सकता है। आयोग में प्रमुख पद रिक्त रहने से इस पूरी व्यवस्था पर असर पड़ना स्वाभाविक है। हिमाचल प्रदेश में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के पद खाली होने की स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। इससे आरटीआई से जुड़े मामलों को समय पर निपटाने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। सूचना का अधिकार कानून पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। ऐसे में सूचना आयोग का नियमित रूप से काम करना इस कानून की मूल भावना से जुड़ा विषय है।
सुप्रीम कोर्ट भी विभिन्न राज्यों में सूचना आयोगों में खाली पदों को लेकर सरकारों को समयबद्ध तरीके से नियुक्तियां करने के निर्देश दे चुका है। शीर्ष अदालत ने सूचना आयोगों को प्रभावी बनाए रखने और नागरिकों के सूचना के अधिकार की रक्षा के लिए रिक्त पदों को भरने की जरूरत पर जोर दिया है। इसके बावजूद हिमाचल में दोनों महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का मामला अभी तक लंबित है। चौथी बार आवेदन मांगने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब एक बार फिर पात्र लोगों को इन पदों के लिए आवेदन करने का अवसर दिया गया है। इसके बाद आवेदनों की जांच, पात्र उम्मीदवारों का चयन और निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्ति की जाएगी। हालांकि, यह प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
चौथी बार आवेदन, अब नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार
मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त की नियुक्ति केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध नागरिकों के सूचना के अधिकार से है। आरटीआई के जरिए आम नागरिक सरकारी कामकाज, योजनाओं, खर्च और फैसलों से जुड़ी जानकारी मांगते हैं। यदि विभागीय स्तर पर सूचना उपलब्ध नहीं होती है तो अपील की व्यवस्था के तहत सूचना आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में आयोग के शीर्ष पदों पर लंबे समय तक रिक्तियां बनी रहना आरटीआई व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से चौथी बार आवेदन मंगाए जाने के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चयन प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है। लगातार आवेदन आमंत्रित किए जाने के बावजूद यदि नियुक्ति में देरी होती है तो इसका असर लंबित मामलों पर भी पड़ सकता है।
सूचना आयोग में पद खाली रहने की स्थिति में नागरिकों की अपीलों और शिकायतों के निस्तारण के लिए उपलब्ध संस्थागत व्यवस्था कमजोर पड़ती है। सूचना का अधिकार कानून सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का एक प्रमुख माध्यम है। नागरिक इस कानून के तहत सरकारी विभागों और सार्वजनिक प्राधिकरणों से अलग-अलग विषयों पर जानकारी मांगते हैं। निर्धारित समय में सूचना नहीं मिलने या सूचना से असंतुष्ट होने पर अपील का रास्ता खुलता है।
यही कारण है कि सूचना आयोगों में पर्याप्त संख्या में आयुक्तों की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जाता है।हिमाचल में दोनों पदों के खाली होने के कारण अब सरकार पर जल्द नियुक्ति पूरी करने का दबाव बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच चौथी बार आवेदन मांगने के बाद सरकार को अब चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर दोनों पदों पर नियुक्तियां करनी होंगी। इससे राज्य में आरटीआई से जुड़े मामलों की सुनवाई और निस्तारण की व्यवस्था को दोबारा पूरी तरह सक्रिय करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त की नियुक्ति का इंतजार जारी है। चौथी बार आवेदन आमंत्रित किए जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बार चयन प्रक्रिया किस गति से पूरी होती है और हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयोग को दोनों शीर्ष पदों पर कब तक स्थायी नियुक्तियां मिलती हैं। नागरिकों के सूचना के अधिकार से जुड़ी व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए इन रिक्तियों को भरना अब अहम प्रशासनिक विषय बन गया है।


















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