उत्तराखंड में जमीन की खरीद-बिक्री या विरासत से जुड़े मामलों में दाखिल-खारिज यानी नामांतरण के लिए लोगों को अब अनावश्यक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए राजस्व विभाग ने प्रक्रिया को समयबद्ध करने पर जोर दिया है। राजस्व परिषद ने प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों को नामांतरण से जुड़े मामलों का नियमों के अनुसार तय समय-सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से साफ कहा गया है कि दाखिल-खारिज के मामलों को लंबित रखने या उनके निस्तारण में अनावश्यक देरी की स्थिति नहीं होनी चाहिए। इससे उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें जमीन के नामांतरण के लिए तहसील और राजस्व न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद उत्तराखंड रंजना राजगुरु ने गुरुवार को प्रदेश में भूमि के नामांतरण से संबंधित मामलों और अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में सभी जिलों में असिस्टेंट कलेक्टर प्रथम श्रेणी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से किए जा रहे राजस्व न्यायिक कार्यों की स्थिति की जानकारी ली गई।
बैठक का खास फोकस नामांतरण यानी दाखिल-खारिज के मामलों पर रहा। जमीन की खरीद, बिक्री, विरासत या अन्य वैधानिक कारणों से जब भूमि का स्वामित्व बदलता है तो राजस्व अभिलेखों में भी उसका नाम दर्ज कराया जाता है। आम भाषा में इसे दाखिल-खारिज या म्यूटेशन कहा जाता है। यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने पर लोगों को आगे की जमीन संबंधी प्रक्रियाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में राजस्व परिषद ने अब इन मामलों के निस्तारण में समयबद्धता पर विशेष जोर दिया है। आयुक्त एवं सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नामांतरण से जुड़े मामलों का निस्तारण केवल समय सीमा के भीतर ही नहीं, बल्कि नियमों के अनुसार मामले के गुण-दोष के आधार पर किया जाए। इसका मतलब है कि प्रत्येक मामले में उपलब्ध अभिलेखों और संबंधित तथ्यों की जांच के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी मामले को केवल प्रक्रिया लंबी होने के कारण अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी अधिकारियों को गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए गए। सभी पीठासीन अधिकारियों से कहा गया कि न्यायालयों का काम नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से संचालित किया जाए। लोगों को राजस्व संबंधी मामलों में समय पर न्याय उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में राजस्व न्यायालयों के रिकॉर्ड और अभिलेखों को व्यवस्थित रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि न्यायालयों से संबंधित अभिलेखों और जरूरी पंजीकाओं को नियमित रूप से अपडेट किया जाए। रिकॉर्ड में मामलों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकरण की अगली कार्रवाई में दस्तावेज तलाशने या स्थिति जानने में अनावश्यक समय न लगे। राजस्व न्यायालयों में किसी मामले का निस्तारण होने के बाद भी संबंधित पत्रावलियों को सुरक्षित और व्यवस्थित रखना जरूरी है। इसी को देखते हुए आयुक्त एवं सचिव ने निस्तारित मामलों की पत्रावलियों को नियमानुसार समय से रिकॉर्ड रूम में जमा कराने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य यह है कि यदि किसी मामले में आगे अपील होती है तो मूल पत्रावली संबंधित अपीलीय न्यायालय को समय पर उपलब्ध कराई जा सके।
न्यायालयों की ओर से जारी किए जाने वाले समनों की तामील को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए। कहा गया कि समन जारी होने के बाद उनकी समयबद्ध तामील सुनिश्चित की जाए, ताकि संबंधित पक्षों को समय पर जानकारी मिल सके और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सके। समन की तामील में देरी होने पर कई बार सुनवाई आगे बढ़ती रहती है और मामलों के निस्तारण में भी समय लगता है। खास तौर पर हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जिलों में नामांतरण मामलों से संबंधित समनों की समय पर तामील सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को कहा गया कि ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जाए और प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करते हुए समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब नामांतरण दिवस से दाखिल-खारिज मामलों के निस्तारण पर रहेगा फोकस
राजस्व परिषद प्रदेश में नामांतरण से जुड़े मामलों के निस्तारण को लेकर एक नई पहल की तैयारी भी कर रहा है। आगामी माह से प्रदेश में ‘नामांतरण दिवस’ आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्रदेश की सभी तहसीलों के पीठासीन अधिकारियों को अभी से आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। नामांतरण दिवस की पहल का उद्देश्य दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के साथ देखने और उनके निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। इसके तहत तहसील स्तर पर लंबित मामलों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हालांकि किसी मामले में निर्णय उसके दस्तावेजों, तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर ही होगा। राजस्व विभाग की इस कवायद को आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि जमीन से जुड़े मामलों में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया का सीधा संबंध राजस्व अभिलेखों से होता है। जमीन खरीदने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने, विरासत में मिली भूमि का रिकॉर्ड अपडेट कराने या अन्य वैधानिक हस्तांतरण के मामलों में लोगों को राजस्व कार्यालयों से संपर्क करना पड़ता है।
प्रक्रिया में देरी होने पर उन्हें बार-बार संबंधित कार्यालय या न्यायालय का रुख करना पड़ सकता है। राजस्व परिषद की समीक्षा में इसी तरह की व्यावहारिक दिक्कतों को कम करने के लिए समयबद्ध निस्तारण, रिकॉर्ड अपडेट रखने और समन की तामील पर जोर दिया गया। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मामलों के निस्तारण के साथ उनकी पत्रावलियों और अभिलेखों को भी व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जाए। इस पूरी व्यवस्था में पीठासीन अधिकारियों की भूमिका अहम रहेगी। तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य संबंधित राजस्व अधिकारी नामांतरण तथा अन्य राजस्व न्यायिक मामलों की सुनवाई और निस्तारण करते हैं। ऐसे में परिषद की ओर से तय समय-सीमा और प्रक्रिया का पालन कराना महत्वपूर्ण होगा। राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नामांतरण मामलों को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध तरीके से निपटाने की कोशिश जमीन से जुड़े आम मामलों में लोगों की परेशानी कम कर सकती है। खासकर उन लोगों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी, जिन्हें अपनी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि न्यायालयों के अभिलेखों को नियमित रूप से अपडेट रखा जाए।
रिकॉर्ड व्यवस्थित रहने से किसी मामले की स्थिति जानने, पुरानी पत्रावली तलाशने और अपील की स्थिति में दस्तावेज उपलब्ध कराने में आसानी होगी। इससे न्यायिक प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के बीच होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है। समीक्षा बैठक में राजस्व परिषद के संयुक्त संचालक चकबंदी नरेश चन्द्र दुर्गापाल, उप राजस्व आयुक्त मीनाक्षी पटवाल, जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व नितिन वशिष्ठ सहित प्रदेश के सभी अपर जिलाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। राजस्व परिषद के इन निर्देशों के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि तहसील स्तर पर नामांतरण मामलों के निस्तारण की गति कितनी बढ़ती है और आगामी माह से प्रस्तावित ‘नामांतरण दिवस’ के जरिए कितने लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाता है। यदि निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो दाखिल-खारिज के लिए लंबे समय तक इंतजार करने वाले लोगों को प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता और समयबद्धता मिल सकती है।


















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