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चंबा-पांगी की तस्वीर बदलेगा सड़क नेटवर्क, पठानकोट-भरमौर हाईवे पर बनेंगी 6 सुरंगें, मुश्किल सफर होगा आसान 

हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को जल्द ही सड़क संपर्क के मामले में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सर्दियों में भारी बर्फबारी, खतरनाक मोड़ों और भूस्खलन के कारण महीनों तक मुश्किलों का सामना करने वाले चंबा जिले के भरमौर और जनजातीय क्षेत्र पांगी को सालभर सड़क मार्ग से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पठानकोट-चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर छह सुरंगों और पांगी क्षेत्र में पांच नई सुरंगों के निर्माण को मंजूरी दिए जाने से पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन आसान बनाने की उम्मीद जगी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल यात्रा का समय कम करना नहीं, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा, पर्यटन को बढ़ावा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना भी है। भाजपा की एक जनसभा में राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत इन विकास योजनाओं का ब्योरा साझा किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से चंबा और आसपास के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क संपर्क की तस्वीर बदल सकती है। चंबा जिले का भौगोलिक स्वरूप बेहद चुनौतीपूर्ण है। ऊंचे पहाड़, गहरी घाटियां, संकरे रास्ते और सर्दियों में भारी हिमपात यहां सड़क परिवहन को प्रभावित करते हैं। 

कई स्थानों पर बर्फ जमने और रास्ते बंद होने से लोगों को लंबी अवधि तक आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसका असर विद्यार्थियों, मरीजों, कर्मचारियों, कारोबारियों और पर्यटकों सहित हर वर्ग पर पड़ता है। ऐसे में सुरंगों के निर्माण को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना माना जा रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत पठानकोट-चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग का विकास भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अंतर्गत किया जाएगा। इस मार्ग पर छह सुरंगों के साथ छोटे फ्लाईओवर बनाने की योजना है। पहाड़ी सड़क पर जहां तीखे मोड़ और कठिन चढ़ाई यात्रा को जोखिमपूर्ण बनाते हैं, वहां सुरंगों और अन्य निर्माण कार्यों से आवागमन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजना के अलग-अलग हिस्सों का निर्माण, लागत और पूरा होने की समयसीमा संबंधित विस्तृत योजना के आधार पर तय होगी। 

इस राजमार्ग का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि यह चंबा जिले के दूरस्थ क्षेत्रों को प्रमुख परिवहन मार्गों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। पठानकोट से चंबा होते हुए भरमौर जाने वाले यात्रियों को फिलहाल पहाड़ी रास्तों और कई घुमावदार मोड़ों से गुजरना पड़ता है। सड़क के पुनर्विकास और खतरनाक मोड़ों को कम करने के बाद पठानकोट से भरमौर के बीच यात्रा में लगभग एक घंटे की बचत होने तथा दूरी करीब 30 किलोमीटर घटने का अनुमान है। इससे स्थानीय निवासियों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है। 

परियोजना का एक अहम पहलू सड़क सुरक्षा है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम कई बार संकरे मार्गों, कम दृश्यता, तीखे मोड़ों और खराब मौसम के कारण बढ़ जाता है। सुरंगों और फ्लाईओवर जैसे निर्माण से कुछ जोखिमपूर्ण हिस्सों को पार करने में आसानी हो सकती है। इसके अलावा, बेहतर सड़क संपर्क से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने और प्रशासनिक सेवाओं को दूरस्थ गांवों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।

पांगी के लिए पांच सुरंगें, रावी नदी के किनारे भी मजबूत होंगे सुरक्षा इंतजाम

चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र पांगी के लिए पांच नई सुरंगों की मंजूरी को भी इस विकास योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पांगी अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति और कठिन मौसम परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण क्षेत्र का सड़क संपर्क प्रभावित होने से स्थानीय लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सुरंगों का निर्माण होने पर सालभर संपर्क बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। इससे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंचने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। पांगी में बेहतर सड़क संपर्क का लाभ केवल स्थानीय आवागमन तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ी जीवनशैली और पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, पर्यटन को टिकाऊ बनाने के लिए सड़क सुविधा के साथ आवास, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। 

बेहतर संपर्क से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। इसी बीच, बरसात के मौसम में रावी नदी के बढ़ते जलस्तर से सड़क को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए भी कदम उठाया गया है। लोथल से करियां तक संवेदनशील हिस्सों में नदी के कटाव, भूस्खलन और सड़क क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 6.70 करोड़ रुपये की लागत से कंक्रीट के सुरक्षात्मक डंगे बनाने की मंजूरी दी है। इन निर्माण कार्यों का उद्देश्य नदी के बढ़ते पानी और कटाव के प्रभाव से सड़क किनारों को सुरक्षित करना है। 

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के साथ उनकी सुरक्षा और रखरखाव भी बड़ी चुनौती है। भारी बारिश के दौरान पहाड़ों से मलबा गिरने, नदी का जलस्तर बढ़ने और जमीन धंसने से कई मार्ग प्रभावित होते हैं। ऐसे में सुरक्षात्मक निर्माण से सड़क को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे यातायात बाधित होने की आशंका घटाने और यात्रियों की सुरक्षा बेहतर बनाने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार की इन योजनाओं का व्यापक असर चंबा, भरमौर और पांगी जैसे क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। बेहतर सड़क संपर्क से कृषि और स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा। निर्माण कार्यों से रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं, जबकि पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी से होटल, होमस्टे, परिवहन और स्थानीय कारोबार को लाभ मिल सकता है। 

लाहौल जैसे आसपास के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी बेहतर संपर्क व्यवस्था का महत्व है, हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों को मिलने वाला वास्तविक लाभ सड़क परियोजनाओं के स्वरूप और उनके संपर्क मार्गों पर निर्भर करेगा। हर्ष महाजन और जयराम ठाकुर ने जनसभा में इन योजनाओं को क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया। इन परियोजनाओं से जुड़ी सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि पहाड़ों में रहने वाले लोगों को मौसम की मार के कारण बार-बार सड़क संपर्क टूटने की समस्या से राहत मिल सकेगी। अब इन योजनाओं का वास्तविक लाभ निर्माण कार्यों की समयबद्ध शुरुआत, गुणवत्ता, पर्यावरणीय संतुलन और निर्धारित समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगा। यदि प्रस्तावित सुरंगों और सुरक्षा कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जाता है, तो चंबा और पांगी के लोगों के लिए आवागमन आसान बनाने के साथ क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।

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