अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। बेटी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे अंकिता के माता-पिता ने अब केंद्र सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर हुई नियुक्ति रद्द करने की मांग की है। परिवार का कहना है कि जब तक मामले से जुड़े कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच को लेकर उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक इस प्रकरण को समाप्त नहीं माना जा सकता। अंकिता के पिता ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर नियुक्ति रद्द नहीं की गई, तो देशभर में लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
इस मांग ने उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता की ओर से दिया गया धरना और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई भी इस घटनाक्रम का हिस्सा रही। परिवार और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल आरोपियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उन तमाम सवालों के जवाब चाहते हैं, जिन्हें लेकर शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच की मांग उठती रही है।
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने केंद्र सरकार से दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर इस संबंध में निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा। उनके मुताबिक, देशभर में जनता इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए सड़कों पर उतर सकती है। परिवार की इस मांग के पीछे अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच और उनसे जुड़े संदेहों का स्पष्ट जवाब सामने आए बिना दुष्यंत गौतम को संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, इन आरोपों और नियुक्ति के बीच किसी स्थापित आपराधिक संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए प्रमाणित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया को आधार बनाना जरूरी है। परिवार की ओर से दिया गया अल्टीमेटम अब केंद्र सरकार पर निर्णय लेने की मांग के रूप में सामने आया है। फिलहाल, नियुक्ति रद्द करने की मांग को लेकर परिवार की चेतावनी के बाद इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इंडिया गेट पर रातभर धरना, पुलिस ने हिरासत में लिया
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के विरोध में अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर रातभर धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान अंकिता को न्याय दिलाने और कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच कराने की मांग उठाई गई। इस प्रदर्शन में कुछ कांग्रेसी नेताओं और अन्य लोगों ने भी हिस्सा लिया। धरने के दौरान दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता, कुछ कांग्रेसी नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, बाद में सभी को छोड़ दिया गया। इस कार्रवाई के बाद भी परिवार की मांगों में कोई बदलाव नहीं आया और नियुक्ति रद्द करने की मांग के साथ 24 घंटे का अल्टीमेटम सामने आया। परिवार के समर्थन में आवाज उठा रहे लोगों का कहना है कि अंकिता हत्याकांड को केवल दोषियों की सजा तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं, उन पर स्पष्टता होनी चाहिए। दूसरी ओर, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू की है। उनका यह कदम इस विवाद को राजनीतिक बयानबाजी से आगे कानूनी दायरे में भी ले आया है। इस मामले में एक ओर अंकिता के माता-पिता और उनके समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोग नियुक्ति रद्द करने तथा कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच को लेकर दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुष्यंत गौतम आरोपों को निराधार बताते हुए कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। ऐसे में इस पूरे विवाद में आरोप, प्रत्यारोप और कानूनी प्रक्रिया के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। परिवार की मांग है कि उनकी आशंकाओं और सवालों पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनका कहना है कि जब तक मामले से जुड़े कथित वीआईपी पहलू पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक न्याय की उनकी लड़ाई जारी रहेगी। अब केंद्र सरकार की ओर से इस मांग पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या का मामला सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया था। मामले में रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों पर हत्या का आरोप लगा। जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इस हत्याकांड ने महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थलों पर उत्पीड़न और प्रभावशाली लोगों की कथित भूमिका जैसे मुद्दों पर व्यापक बहस छेड़ दी थी। मामले में कथित वीआईपी कनेक्शन को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अंकिता के परिवार और कई प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस पहलू पर उठने वाले सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आए। हालांकि, अदालत से दोषियों को सजा मिलने के बावजूद परिवार की ओर से उठाए जा रहे कथित वीआईपी कनेक्शन से जुड़े सवालों को लेकर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इन सवालों पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए जांच से जुड़े प्रमाणित तथ्यों और आधिकारिक जानकारी का सामने आना आवश्यक है। फिलहाल, अंकिता के माता-पिता का 24 घंटे का अल्टीमेटम इस मामले को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ले आया है। परिवार ने नियुक्ति रद्द नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है और आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन किस दिशा में आगे बढ़ता है।


















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