त्योहारों, छुट्टियों और गर्मी की छुट्टियों के दौरान ट्रेन टिकट बुक करना यात्रियों के लिए अक्सर किसी चुनौती से कम नहीं होता। जैसे ही तत्काल या सामान्य आरक्षण खुलता है, एक साथ बड़ी संख्या में लोग टिकट बुक करने के लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट और मोबाइल माध्यम पर पहुंचते हैं। ऐसे समय में वेबसाइट की गति धीमी होने, पेज खुलने में समय लगने या कुछ देर के लिए सेवा बाधित होने जैसी परेशानियां यात्रियों को झेलनी पड़ती हैं। अब रेलवे इन समस्याओं को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग व्यवस्था को अधिक तेज, मजबूत और भरोसेमंद बनाने के लिए आईआरसीटीसी अपने मौजूदा नेक्स्ट जनरेशन ई-टिकटिंग यानी एनजीईटी सिस्टम को बड़े स्तर पर अपग्रेड करने जा रहा है। इस बदलाव का सीधा फायदा उन यात्रियों को मिलने की उम्मीद है, जो ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं और खासकर आरक्षण खुलने के समय वेबसाइट पर एक साथ बढ़ने वाले भारी दबाव का सामना करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरसीटीसी के टिकट बुकिंग ढांचे में सर्वर, भंडारण क्षमता, नेटवर्क और सॉफ्टवेयर से जुड़े महत्वपूर्ण हिस्सों को मजबूत किया जाएगा।
इसका उद्देश्य केवल वेबसाइट की गति बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक साथ बड़ी संख्या में आने वाले टिकट बुकिंग अनुरोधों को संभालने की क्षमता को भी कई गुना बढ़ाना है। फिलहाल आईआरसीटीसी का ऑनलाइन टिकट बुकिंग तंत्र करीब 37 हजार टिकट प्रति मिनट की क्षमता के साथ काम कर रहा है। प्रस्तावित तकनीकी उन्नयन के बाद यह क्षमता बढ़कर एक मिनट में एक लाख से अधिक टिकट तक पहुंच सकती है। अगर यह व्यवस्था पूरी क्षमता के साथ लागू होती है तो आरक्षण खुलने के समय एक साथ आने वाले अत्यधिक यातायात को संभालने में काफी मदद मिल सकती है। यात्री आरक्षण व्यवस्था से जुड़े बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश भी किया गया है।
इस निवेश के जरिए टिकट बुकिंग प्रणाली को भविष्य की बढ़ती मांग के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। रेलवे में ऑनलाइन टिकट बुकिंग का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में पुराने ढांचे पर बढ़ते दबाव को कम करना जरूरी माना जा रहा है। टिकट बुकिंग के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब किसी विशेष ट्रेन में सीमित संख्या में सीटें उपलब्ध होती हैं और हजारों यात्री एक साथ उसे बुक करने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ सेकंड की देरी भी यात्री की पसंदीदा सीट या ट्रेन छूटने का कारण बन सकती है। खासकर तत्काल आरक्षण के दौरान यह समस्या ज्यादा महसूस होती है। इसी वजह से आईआरसीटीसी केवल टिकट बुकिंग की क्षमता बढ़ाने पर ही काम नहीं कर रहा, बल्कि पूरी व्यवस्था को इस तरह तैयार करने की कोशिश की जा रही है कि तकनीकी समस्या आने पर भी ऑनलाइन सेवाएं लंबे समय तक प्रभावित न हों। इसके लिए बैकअप और आपदा से उबरने वाली व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
नई वेबसाइट और बैकअप व्यवस्था से टिकट बुकिंग में आएगा बदलाव
आईआरसीटीसी एक्टिव-एक्टिव डिजास्टर रिकवरी व्यवस्था पर भी काम कर रहा है। इस प्रणाली का उद्देश्य यह है कि अगर मुख्य व्यवस्था के किसी हिस्से में तकनीकी समस्या आती है तो दूसरी व्यवस्था तुरंत काम संभाल सके। इससे टिकट बुकिंग सेवा पूरी तरह बंद होने की संभावना को कम किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा से उबरने वाली व्यवस्था के लिए सिकंदराबाद को संभावित स्थान के रूप में देखा जा रहा है। इस तरह की व्यवस्था ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरक्षण के व्यस्त समय में कुछ मिनट की तकनीकी रुकावट भी हजारों यात्रियों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। मान लीजिए किसी लोकप्रिय ट्रेन में कुछ ही सीटें बची हैं और उसी समय वेबसाइट कुछ मिनट के लिए धीमी हो जाती है। यात्री टिकट बुक करने के लिए प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते और इस दौरान उपलब्ध सीटें दूसरे यात्रियों द्वारा बुक हो सकती हैं। इसलिए तेज वेबसाइट के साथ-साथ लगातार सेवा उपलब्ध रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आईआरसीटीसी अपनी वेबसाइट के स्वरूप में भी बदलाव कर रहा है। यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के उद्देश्य से नई बीटा वेबसाइट शुरू की गई है।
इसका डिजाइन पहले की तुलना में अधिक सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल रखने पर ध्यान दिया गया है।
नई वेबसाइट में अनावश्यक कैप्चा, पॉप-अप और चमकदार ग्राफिक्स जैसी चीजों को कम किया गया है। इसका उद्देश्य टिकट बुकिंग की प्रक्रिया को कम जटिल बनाना है, ताकि यात्री बिना ज्यादा रुकावट के ट्रेन खोजने से लेकर टिकट भुगतान तक की प्रक्रिया पूरी कर सकें।
वेबसाइट में सबसे उपयोगी बदलावों में से एक अलग-अलग श्रेणियों में सीट उपलब्धता की जानकारी को एक ही स्थान पर दिखाने से जुड़ा है। अब यात्रियों को ट्रेन की अलग-अलग श्रेणियों की सीट उपलब्धता देखने के लिए बार-बार अलग-अलग विकल्पों पर जाने की जरूरत कम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी ट्रेन में वातानुकूलित प्रथम श्रेणी, वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी, वातानुकूलित तृतीय श्रेणी और शयनयान श्रेणी में सीटों की स्थिति अलग-अलग है तो यात्री एक ही जगह से इसकी जानकारी देख सकेंगे। इससे उन्हें अपने बजट और सुविधा के अनुसार सही श्रेणी चुनने में आसानी होगी। नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य टिकट बुकिंग के दौरान आने वाली तकनीकी रुकावटों को कम करना भी है। सर्वर और नेटवर्क क्षमता बढ़ने से एक साथ अधिक संख्या में यात्रियों के अनुरोध को संभालना संभव होगा। इससे आरक्षण खुलने के समय वेबसाइट पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को कम किया जा सकेगा।
आईआरसीटीसी के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में रेल यात्रियों की संख्या बहुत बड़ी है और लंबी दूरी की ट्रेनों में आरक्षित सीटों की मांग लगातार बनी रहती है। त्योहारों, छुट्टियों और विशेष अवसरों पर यह मांग और बढ़ जाती है। अगर प्रस्तावित उन्नयन के बाद टिकट बुकिंग क्षमता एक लाख से अधिक टिकट प्रति मिनट तक पहुंचती है तो यह मौजूदा व्यवस्था की तुलना में बड़ा सुधार होगा। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि नई तकनीकी व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाता है और व्यस्त समय में यह कितनी प्रभावी ढंग से काम करती है। आईआरसीटीसी की नई तकनीकी तैयारी का उद्देश्य ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग को तेज, सरल और अधिक भरोसेमंद बनाना है। सर्वर क्षमता बढ़ाने, बैकअप व्यवस्था मजबूत करने और वेबसाइट के डिजाइन में बदलाव जैसे कदमों से यात्रियों को भविष्य में टिकट बुक करते समय बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है। खासकर तत्काल और त्योहारों के दौरान होने वाली भारी बुकिंग के समय अगर यह व्यवस्था सुचारु रूप से काम करती है, तो यात्रियों को वेबसाइट के धीमे होने या सेवा रुकने जैसी मौजूदा परेशानियों से काफी राहत मिल सकती है।

















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