अनुच्छेद 370 हटाने की सातवीं बरसी आज, जम्मू- कश्मीर में हाई अलर्ट, अमरनाथ यात्रा भी स्थगित

अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं बरसी के मौके पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी कर दी गई है। इसी बीच प्रशासन ने एहतियातन बड़ा कदम उठाते हुए बुधवार को जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से अमरनाथ यात्रा को एक दिन के लिए रोक दिया। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी सतर्कता के बीच तीर्थयात्रियों के किसी भी नए जत्थे को जम्मू से कश्मीर घाटी स्थित पहलगाम और बालटाल बेस कैंपों के लिए रवाना होने की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि प्रशासन की ओर से यात्रा स्थगित करने के पीछे कोई आधिकारिक और स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा हालात और पांच अगस्त को लेकर जारी अलर्ट को देखते हुए यह फैसला एहतियाती तौर पर लिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि संवेदनशील परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार का जोखिम उठाना उचित नहीं होगा। केवल अमरनाथ यात्रा ही नहीं बल्कि जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा बलों के काफिलों की आवाजाही भी अस्थायी रूप से रोक दी गई है। इससे स्पष्ट है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और प्रदेशभर में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने की वर्षगांठ के कारण जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने इस दिन को लेकर अलग-अलग कार्यक्रमों की घोषणा की है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने पांच अगस्त को विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया है। इन दलों का कहना है कि अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला जम्मू-कश्मीर की जनता की भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ था।

पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार शाम श्रीनगर में समर्थकों के साथ मोमबत्ती मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से जिला मुख्यालयों पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों को सफल बनाने की अपील की। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पांच अगस्त जम्मू-कश्मीर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है और उनकी पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी।

दूसरी ओर, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए पूरी तैयारी में जुटी हुई हैं। प्रदेश के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। कई स्थानों पर वाहनों की सघन जांच की जा रही है, जबकि प्रमुख शहरों और सरकारी प्रतिष्ठानों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पांच अगस्त जैसे संवेदनशील अवसर पर आतंकवादी संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने या माहौल बिगाड़ने के लिए किसी घटना को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जम्मू, श्रीनगर, अनंतनाग, गांदरबल और अन्य संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं।

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया था 

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 को 17 अक्टूबर 1949 को शामिल किया गया था। इस प्रावधान के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था। राज्य के पास अपना अलग संविधान था और कई मामलों में उसे विशेष अधिकार हासिल थे। रक्षा, विदेश नीति और संचार जैसे कुछ विषयों को छोड़कर केंद्र सरकार के कई कानून स्वतः जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते थे। इसके बाद 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त कर दिया। उसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में प्रस्ताव पेश किया था। संसद से मंजूरी मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त हो गया और राज्य का पुनर्गठन किया गया।

सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया। सरकार का तर्क था कि इस कदम से क्षेत्र में विकास, निवेश और सुशासन को बढ़ावा मिलेगा तथा आतंकवाद और अलगाववाद पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। हालांकि इस फैसले का कई राजनीतिक दलों ने विरोध किया था और आज भी जम्मू-कश्मीर की कुछ क्षेत्रीय पार्टियां इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के खिलाफ बताती हैं। 

वहीं केंद्र सरकार और उसके समर्थकों का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास परियोजनाओं को गति मिली है, निवेश बढ़ा है और आम लोगों को देश के अन्य राज्यों की तरह समान अधिकार प्राप्त हुए हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं बरसी पर एक ओर जहां राजनीतिक दल अपने-अपने कार्यक्रमों के जरिए इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में हैं, वहीं प्रशासन सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह सतर्क दिखाई दे रहा है। अमरनाथ यात्रा को एक दिन के लिए रोकने का निर्णय भी इसी सतर्कता का हिस्सा माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि प्रदेश में शांति और कानून-व्यवस्था पूरी तरह कायम रह सके।

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