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अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा, नई भूमिका में दिखेंगे मैदान से जुड़े

भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद और शांत स्वभाव वाले बल्लेबाजों में शुमार अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। अपने धैर्य, तकनीक और नेतृत्व क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले रहाणे ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी साझा की। भारत के लिए लंबे समय तक तीनों प्रारूपों में खेल चुके रहाणे ने कहा कि अब उनके जीवन में आगे बढ़ने का समय आ गया है, हालांकि क्रिकेट से उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा। रहाणे ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेटर के रूप में उनका अध्याय समाप्त हो रहा है, लेकिन खेल के साथ उनकी यात्रा आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि वह आने वाले समय में युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करना चाहते हैं और क्रिकेट से सीखे गए मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। रहाणे ने कहा कि इस खेल ने उन्हें पहचान, सम्मान और जीवन के महत्वपूर्ण अनुभव दिए हैं, इसलिए वह क्रिकेट को कुछ लौटाना चाहते हैं।

भारतीय क्रिकेट में रहाणे का नाम उन खिलाड़ियों में लिया जाता है जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभाला और कई यादगार जीत दिलाईं। अपने करियर के दौरान उन्होंने तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज की छवि बनाई। विदेशी धरती पर उनके प्रदर्शन को विशेष रूप से सराहा गया, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण पारियां खेलकर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने सफर की शुरुआत वर्ष 2011 में की थी। उन्होंने 31 अगस्त 2011 को इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के जरिए भारतीय टीम में पदार्पण किया। इसके कुछ दिनों बाद 3 सितंबर 2011 को इंग्लैंड के खिलाफ ही चेस्टर-ले-स्ट्रीट में अपना पहला वनडे मैच खेला। टेस्ट क्रिकेट में उन्हें 22 मार्च 2013 को दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली बार खेलने का अवसर मिला।

रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने कई शानदार पारियां खेलीं और टीम की बल्लेबाजी को मजबूती प्रदान की। विदेशी दौरों पर उनका प्रदर्शन अक्सर टीम के लिए संकटमोचक साबित हुआ। दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनके बल्ले से निकले रन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में दर्ज हैं। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान रहाणे ने कई उतार-चढ़ाव देखे। कभी वह भारतीय बल्लेबाजी क्रम की मजबूत कड़ी रहे तो कभी उन्हें टीम से बाहर भी होना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा संयम बनाए रखा और मैदान के अंदर तथा बाहर अपने व्यवहार से सभी का सम्मान हासिल किया। यही कारण है कि उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे अनुशासित और सम्मानित खिलाड़ियों में गिना जाता है।

अजिंक्य रहाणे के करियर का सबसे यादगार 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा माना जाता है

अजिंक्य रहाणे के करियर का सबसे यादगार और गौरवपूर्ण अध्याय 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा माना जाता है। यह वह समय था जब भारतीय टीम को एडिलेड टेस्ट में महज 36 रन पर ऑलआउट होने की शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा था। इसके बाद नियमित कप्तान विराट कोहली निजी कारणों से स्वदेश लौट गए और टीम की कमान रहाणे के हाथों में आ गई। भारतीय टीम इस श्रृंखला में वापसी कर पाएगी, लेकिन रहाणे ने अपने शांत नेतृत्व और शानदार बल्लेबाजी से पूरी तस्वीर बदल दी। मेलबर्न टेस्ट में उन्होंने शानदार शतक जड़कर भारत को जीत दिलाई और श्रृंखला को 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। उनकी यह पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास की सर्वश्रेष्ठ कप्तानी पारियों में गिनी जाती है।

इसके बाद चोटों से जूझ रही भारतीय टीम ने सिडनी टेस्ट में संघर्षपूर्ण प्रदर्शन किया और फिर ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर इतिहास रच दिया। रहाणे की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसके सबसे मजबूत किले में हराया। गाबा मैदान पर ऑस्ट्रेलिया का 32 वर्षों से अजेय रिकॉर्ड था, जिसे भारतीय टीम ने 2-1 से श्रृंखला जीतकर समाप्त कर दिया। इस ऐतिहासिक सफलता ने रहाणे को भारतीय क्रिकेट के सफल कप्तानों की सूची में विशेष स्थान दिलाया।

कप्तानी के आंकड़ों पर नजर डालें तो रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में छह मैचों में भारत का नेतृत्व किया। इनमें से चार मुकाबलों में टीम को जीत मिली, जबकि दो मैच ड्रॉ रहे। उल्लेखनीय बात यह रही कि उनकी कप्तानी में भारत को एक भी टेस्ट हार का सामना नहीं करना पड़ा। वनडे क्रिकेट में उन्होंने तीन मुकाबलों में टीम इंडिया की कप्तानी की और तीनों मैचों में जीत हासिल की। वहीं टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दो मुकाबलों में कप्तानी करते हुए एक जीत और एक हार दर्ज की। रहाणे का आखिरी टेस्ट मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला गया था। वनडे क्रिकेट में उन्होंने अपना अंतिम मुकाबला फरवरी 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला, जबकि टी-20 अंतरराष्ट्रीय में उनकी आखिरी उपस्थिति अगस्त 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ रही।

अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के साथ ही रहाणे के करियर का एक गौरवशाली अध्याय समाप्त हो गया है। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया है कि क्रिकेट से उनका रिश्ता बना रहेगा। युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने और खेल के विकास में योगदान देने की उनकी इच्छा यह संकेत देती है कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य में भी उनके अनुभव और नेतृत्व का लाभ मिलता रहेगा। भारतीय क्रिकेट प्रशंसक उन्हें एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में हमेशा याद रखेंगे, जिसने कठिन परिस्थितियों में टीम का साथ नहीं छोड़ा और अपने शांत स्वभाव से इतिहास रच दिया।

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