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पंजाब में चुनावी बिगुल बजने से पहले ‘आप’ ने खोले पत्ते, 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी, भगवंत मान धूरी से लड़ेंगे

पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 की हलचल तेज होने लगी है। चुनावी माहौल पूरी तरह गर्माने से पहले ही सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर राजनीतिक मुकाबले की शुरुआत कर दी है। पंजाब में सबसे पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करने वाली पार्टी बनकर ‘आप’ ने साफ संकेत दे दिया है कि वह चुनावी तैयारी में विपक्षी दलों से आगे रहने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी ने पहली सूची में 40 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। इनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान भी शामिल हैं, जो एक बार फिर अपनी मौजूदा विधानसभा सीट धूरी से चुनाव मैदान में उतरेंगे। सूची में सबसे अहम बात यह है कि पार्टी ने अपने सभी मौजूदा विधायकों पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा टिकट दिया है। हालांकि, मौजूदा मंत्रिमंडल के 15 में से केवल दो मंत्रियों को ही पहली सूची में जगह मिली है। इनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान और लुधियाना वेस्ट से उम्मीदवार बनाए गए संजीव अरोड़ा शामिल हैं। संजीव अरोड़ा इस समय गुरुग्राम की भौंडसी जेल में बंद हैं। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें फिर से इसी सीट से चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। 

उम्मीदवारों की सूची दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने जारी की। इससे पहले अरविंद केजरीवाल के आवास पर पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक हुई, जिसमें उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा के बाद अंतिम मुहर लगाई गई। पहली सूची जारी होने के साथ ही पंजाब की राजनीति में चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। आम आदमी पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों को टिकट देकर जहां उनके प्रति भरोसा जताया है, वहीं मंत्रिमंडल के कई बड़े चेहरों को फिलहाल सूची से बाहर रखकर राजनीतिक चर्चाओं को भी हवा दे दी है। मंत्रिमंडल के 13 मंत्री पहली सूची से बाहर, आठ अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को मिला मौका आम आदमी पार्टी की पहली सूची में मुख्यमंत्री भगवंत मान और संजीव अरोड़ा के अलावा मौजूदा मंत्रिमंडल के 13 मंत्रियों के नाम शामिल नहीं हैं। 

इनमें वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा, डॉ. बलजीत कौर, बलबीर सिंह, लालचंद कटारूचक्क, हरजोत सिंह बैंस, हरभजन सिंह ईटीओ, गुरमीत सिंह खुड्डियां, डॉ. रवजोत सिंह, बरिंदर कुमार गोयल, हरदीप सिंह मुंडियां, तरुणप्रीत सिंह सौंद और मोहिंदर भगत शामिल हैं। इन मंत्रियों को पहली सूची में टिकट नहीं मिलने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि पार्टी अगली सूची में इन्हें उम्मीदवार बनाएगी या इनके चुनावी क्षेत्रों को लेकर कोई नया फैसला करेगी। हालांकि, पहली सूची में नाम न होने का मतलब यह नहीं है कि इन नेताओं के टिकट कट गए हैं। पार्टी ने अभी केवल 40 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं और बाकी सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा बाद में की जा सकती है। सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी पहली सूची में साफ दिखाई देती है। 

40 उम्मीदवारों में से आठ अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले नेताओं का टिकट काटा 

आम आदमी पार्टी ने घोषित 40 उम्मीदवारों में से आठ अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले नेताओं को टिकट दिया है। पंजाब की राजनीति में अनुसूचित जाति मतदाताओं की अहम भूमिका को देखते हुए इसे पार्टी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी ने करतारपुर से बलकार सिंह, चब्बेवाल से इशांक कुमार चब्बेवाल, अमलोह से गुरिंदर सिंह गैरी वड़िंग, पायल से मनविंदर सिंह ग्यासपुरा, निहाल सिंह वाला से मनजीत सिंह बिलासपुर, जैतो से अमोलक सिंह, भदौड़ से लाभ सिंह उगोके और महल कलां से कुलवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया है। 

ये सभी सीटें पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों में हैं और अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओं के लिहाज से राजनीतिक महत्व रखती हैं। पहली सूची में सभी मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट देकर आम आदमी पार्टी ने फिलहाल अपने विधायकों के प्रति भरोसे का संदेश देने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी से मैदान में उतारना भी पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा है। वहीं, संजीव अरोड़ा को लुधियाना वेस्ट से दोबारा उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि वह अपने कुछ विवादित और मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर रहे नेताओं के साथ भी खड़ी है। 

हालांकि, मंत्रिमंडल के 13 मंत्रियों के नाम पहली सूची में न होने से आगे की घोषणाओं को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सत्तारूढ़ दल की ओर से इतनी पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करना बताता है कि चुनावी तैयारी अब औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। आम आदमी पार्टी ने पहला कदम उठाकर कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल जैसे विपक्षी दलों पर भी उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। अब निगाहें पार्टी की अगली सूची और विपक्षी दलों की तैयारियों पर रहेंगी।

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