देश के चर्चित निठारी कांड में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कोली यहां एक मंदिर के सामने दुकान के बाहर फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुरेंद्र कोली का नाम करीब दो दशक पहले नोएडा के निठारी में बच्चों और महिलाओं के लापता होने के मामले से जुड़ा था। इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और लंबे समय तक इसकी जांच तथा अदालती कार्रवाई सुर्खियों में रही थी। सुरेंद्र कोली करीब 19 साल तक जेल में रहा। इस दौरान उस पर निठारी कांड से जुड़े कई मामलों में मुकदमे चले और उसे अलग-अलग मामलों में मौत की सजा भी सुनाई गई। हालांकि बाद में अदालतों में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान उसके खिलाफ दर्ज मामलों की स्थिति लगातार बदलती गई। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया था। इन मामलों में अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और कथित कबूलनामे की विश्वसनीयता पर अदालत ने सवाल उठाए थे।
इसके बाद भी कोली एक मामले में दोषी बना रहा। यह मामला रिंपा हलदार से जुड़ा था, जिसमें 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा था। बाद में 2015 में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया। इस बीच बाकी मामलों में मिली राहत के बाद उसकी कानूनी लड़ाई अंतिम मामले तक पहुंच गई थी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इसी अंतिम मामले में भी कोली की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने उसकी सुधारात्मक याचिका स्वीकार करते हुए उसे आरोपों से बरी करने का आदेश दिया था।
अदालत ने कहा था कि जब समान साक्ष्यों के आधार पर जुड़े अन्य 12 मामलों में उसकी दोषसिद्धि टिक नहीं सकी, तो अंतिम मामले में भी उसी साक्ष्य के आधार पर दोषसिद्धि कायम रखना उचित नहीं होगा। इसके बाद कोली की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया था।
न्यायालय के इस फैसले के साथ निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली के खिलाफ सभी आपराधिक मामलों का कानूनी अध्याय समाप्त हो गया था। अदालत ने उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था, बशर्ते किसी अन्य मामले में उसकी जरूरत न हो। लगभग दो दशक तक जेल में रहने के बाद वह नवंबर 2025 में बाहर आया था।
दिसंबर 2006 में निठारी कांड से शुरू हुई थी देशभर में सनसनी
निठारी कांड की भयावहता दिसंबर 2006 में सामने आई थी। नोएडा के निठारी गांव स्थित सेक्टर-31 के एक मकान के पीछे नाले से मानव अवशेष बरामद होने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। 29 दिसंबर 2006 को हुई बरामदगी के बाद पुलिस और बाद में केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले की जांच शुरू की। सुरेंद्र कोली इसी मकान में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। मकान कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर का था। जांच आगे बढ़ने के साथ निठारी और आसपास के इलाकों से बच्चों तथा महिलाओं के लापता होने के मामले इस प्रकरण से जुड़ते चले गए। पुलिस और जांच एजेंसियों ने कई मामलों में मुकदमे दर्ज किए। बाद में जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई और कोली तथा मोनिंदर सिंह पंढेर से जुड़े मामलों में अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए गए। कई मामलों में कोली के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में मुकदमे चले।
एक समय स्थिति यह थी कि सुरेंद्र कोली को निठारी कांड से जुड़े 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। इन मामलों में उसके खिलाफ अभियोजन का आधार मुख्य रूप से कथित कबूलनामा, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और उसकी निशानदेही पर बरामदगी जैसे साक्ष्य थे। हालांकि बाद की न्यायिक प्रक्रिया में इन साक्ष्यों की विश्वसनीयता और कानूनी स्वीकार्यता पर गंभीर सवाल उठे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2023 में 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। इन 12 मामलों में मिली राहत के बाद राज्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। जुलाई 2025 में शीर्ष अदालत ने इन मामलों में कोली की बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा। इसके बाद उसके खिलाफ केवल एक मामला शेष रह गया था। उसी मामले में उसने सुधारात्मक याचिका दाखिल की थी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका स्वीकार करते हुए अंतिम दोषसिद्धि भी रद्द कर दी और उसे बरी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कोली करीब 19 साल जेल में रहने के बाद बाहर आया था। हालांकि निठारी कांड को लेकर उसके खिलाफ चले मुकदमों का कानूनी परिणाम उसके पक्ष में रहा, लेकिन इस मामले से जुड़े कई सवाल और उस दौर की जांच को लेकर बहस लंबे समय तक जारी रही। शीर्ष अदालत के फैसले में भी साक्ष्यों की विश्वसनीयता और पहले की न्यायिक प्रक्रिया में पैदा हुई विसंगतियों पर चर्चा की गई थी। अब हरिद्वार में कोली की मौत ने निठारी कांड से जुड़े उसके करीब दो दशक लंबे घटनाक्रम में एक और अध्याय जोड़ दिया है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और मौत के कारणों तथा परिस्थितियों को लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक घटना उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र की है। अधिकारियों की जांच के बाद ही घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।


















Leave a Reply