त्योहारों से पहले सस्ती हो सकती है चीनी, सरकार ने आयात पर हटाया कर, बढ़ती कीमतों से मिल सकती है राहत

त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले महंगी चीनी से परेशान आम लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी के आयात पर लगने वाले कर को अस्थायी रूप से हटा दिया है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर बढ़ते दबाव को कम करना है। आयात पर दी गई यह छूट 31 अक्टूबर तक लागू रहेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ने के साथ इसकी कीमतों में नरमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल देश के कई हिस्सों में खुदरा बाजार में चीनी करीब 55 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही है। पिछले कुछ समय में इसकी कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। बताया जा रहा है कि पिछले दो महीनों के दौरान चीनी के दाम करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। कीमतों में इस तेजी ने घरों के बजट के साथ-साथ मिठाई और खाद्य उत्पाद बनाने वाले कारोबारियों की चिंता भी बढ़ा दी है। चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू उत्पादन में आई कमी को माना जा रहा है। मौसम में आए बदलाव का असर गन्ने की फसल पर पड़ा है। कई इलाकों में जरूरत के मुताबिक बारिश नहीं हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया। गन्ने की फसल को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है और मौसम में असंतुलन का सीधा असर इसकी पैदावार पर पड़ता है।

जब गन्ने का उत्पादन प्रभावित होता है तो चीनी मिलों के पास प्रसंस्करण के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा भी कम हो जाती है। इसका असर चीनी के कुल उत्पादन पर पड़ता है। दूसरी तरफ देश में चीनी की खपत लगातार बनी हुई है। उत्पादन और मांग के बीच अंतर बढ़ने के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आने वाले त्योहारी मौसम में चीनी की बढ़ती मांग को पूरा करना है। अक्टूबर में देशभर में कई बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। दिवाली और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों, केक, बेकरी उत्पादों और विभिन्न पकवानों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसके कारण चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। 

इसके अलावा मिठाई, बिस्कुट, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी त्योहारों से पहले बड़े स्तर पर चीनी का भंडारण करती हैं। कारोबारी भविष्य की मांग को देखते हुए पहले से स्टॉक जुटाना शुरू कर देते हैं। इससे बाजार में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है और यदि उस समय घरेलू आपूर्ति सीमित हो तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश की बड़ी आबादी और खाद्य उद्योग में चीनी की व्यापक जरूरत के कारण इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। त्योहारों के समय मांग में होने वाली अतिरिक्त बढ़ोतरी बाजार पर और दबाव डालती है। यही वजह है कि सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले आपूर्ति को मजबूत करने के लिए आयात को आसान बनाने का फैसला किया है।

आयात बढ़ने से बाजार में बढ़ेगी आपूर्ति, त्योहारों पर मिल सकती है बड़ी राहत

सरकार की ओर से चीनी के आयात पर कर हटाने का सीधा उद्देश्य बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है। यदि बड़ी मात्रा में चीनी विदेश से देश में आती है तो घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी। इससे उत्पादन और मांग के बीच पैदा हुआ अंतर कुछ हद तक कम किया जा सकता है। आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों में तेजी का दबाव भी कम होने की संभावना है। आयात पर कर हटने से कारोबारियों के लिए विदेश से चीनी मंगाना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है। इसका फायदा आगे चलकर थोक बाजार से खुदरा बाजार तक पहुंच सकता है। हालांकि चीनी की कीमतों में वास्तविक कमी कितनी होगी, यह आयात की मात्रा, अंतरराष्ट्रीय कीमतों, घरेलू उत्पादन और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा। त्योहारों के लिहाज से सरकार का यह फैसला खास महत्व रखता है। दिवाली और अन्य प्रमुख त्योहारों से पहले मिठाई की दुकानों पर चीनी की मांग तेजी से बढ़ती है। हलवाई और छोटे कारोबारी बड़ी मात्रा में चीनी खरीदते हैं। यदि उस समय बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहता है तो उन्हें महंगी चीनी खरीदने से राहत मिल सकती है।

इसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। चीनी की कीमत कम होने से घरों में होने वाली खरीदारी का खर्च घट सकता है। साथ ही मिठाई और चीनी से बनने वाले कई खाद्य उत्पादों की लागत पर भी दबाव कम हो सकता है। हालांकि इसका लाभ उपभोक्ताओं तक कितनी तेजी से पहुंचेगा, यह बाजार में खुदरा कीमतों के बदलाव पर निर्भर करेगा। मौजूदा स्थिति में सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले कुछ महीनों तक चीनी की कीमतों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंका जताई जा रही है। घरेलू उत्पादन में कमी और मांग में बढ़ोतरी का असर तत्काल खत्म नहीं होने वाला है। ऐसे में आयात के जरिए अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराना कीमतों को नियंत्रित करने का एक महत्वपूर्ण उपाय माना जा रहा है। मौसम की स्थिति भी आने वाले समय में अहम भूमिका निभाएगी। यदि गन्ने की फसल को पर्याप्त पानी और अनुकूल मौसम मिलता है तो आगे चलकर उत्पादन में सुधार हो सकता है। लेकिन मौसम फिर से प्रतिकूल रहता है तो घरेलू आपूर्ति पर दबाव बना रह सकता है।

सरकार की ओर से 31 अक्टूबर तक आयात पर कर में छूट देने का फैसला ऐसे समय आया है जब देश त्योहारों की ओर बढ़ रहा है। आने वाले सप्ताह बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यदि आयातित चीनी पर्याप्त मात्रा में समय पर बाजार में पहुंचती है और कारोबारी इसका स्टॉक बढ़ाते हैं तो कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है। फिलहाल आम लोगों की नजर इस बात पर है कि सरकार के इस फैसले का असर खुदरा बाजार में कब दिखाई देता है। यदि आपूर्ति बढ़ने के बाद कीमतें नीचे आती हैं तो त्योहारों से पहले उपभोक्ताओं, हलवाइयों और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, यदि घरेलू उत्पादन में सुधार और आयात दोनों का असर साथ आता है तो आने वाले महीनों में चीनी बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद बढ़ सकती है।

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