भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बुधवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। इस ऐतिहासिक समझौते के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंध एक नए दौर में प्रवेश कर गए हैं। समझौते का सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर दिखाई देगा। अब ब्रिटेन से आने वाली कई प्रमुख वस्तुएं जैसे कारें, व्हिस्की, कपड़े, फुटवियर (जूते-चप्पल) और अन्य उत्पाद पहले की तुलना में सस्ते हो सकते हैं। वहीं भारतीय उद्योगों के लिए भी ब्रिटेन का बाजार पहले से कहीं अधिक खुल जाएगा, जिससे निर्यात में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है। इस समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी सीमा शुल्क के प्रवेश मिलेगा। दूसरी ओर ब्रिटेन से भारत आने वाले अधिकांश उत्पादों पर औसत सीमा शुल्क लगभग तीन प्रतिशत रह जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस समझौते का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों, किसानों, वस्त्र उद्योग, चमड़ा उद्योग, रत्न एवं आभूषण क्षेत्र, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को भी मिलेगा। इससे भारत के निर्यात को नई गति मिलेगी और लाखों रोजगार सृजित होने की संभावना है।
दोनों देशों के बीच यह समझौता लगभग तीन वर्षों तक चली लंबी बातचीत का परिणाम है। इस दौरान कुल 14 चरणों में विस्तृत वार्ताएं हुईं। अंततः 24 जुलाई 2025 को भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद दोनों देशों की संसदीय और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने पर अब इसे आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है।ब्रिटेन की भारत में उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने समझौते के लागू होने से पहले सामाजिक मंच ‘एक्स’ पर इसे दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।
उन्होंने कहा कि यह समझौता आधुनिक भारत-ब्रिटेन साझेदारी को नई दिशा देगा और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास के नए अवसर लेकर आएगा। उन्होंने इसे व्यापार, निवेश और रोजगार बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह समझौता ऐसे समय लागू हुआ है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत व्यापारिक साझेदारी दोनों देशों को आर्थिक स्थिरता और नए बाजार उपलब्ध कराने में मदद करेगी। भारत के लिए यह समझौता विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ब्रिटेन दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वहां भारतीय उत्पादों की अच्छी मांग है।
2030 तक दोगुना हो सकता है व्यापार, उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों को मिलेगा लाभ
मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 120 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान व्यापार के मुकाबले यह लगभग दोगुना होगा। व्यापार बढ़ने से दोनों देशों के उद्योगों के बीच सहयोग भी मजबूत होगा और नई कंपनियों के लिए निवेश का रास्ता आसान बनेगा। भारतीय वस्त्र, परिधान, चमड़ा उत्पाद, कृषि उत्पाद, मसाले, समुद्री खाद्य पदार्थ, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और औषधि उद्योग को इस समझौते से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। पहले जिन उत्पादों पर ब्रिटेन में सीमा शुल्क देना पड़ता था, अब उनमें से अधिकांश उत्पाद बिना शुल्क के वहां पहुंच सकेंगे। इससे भारतीय सामान ब्रिटेन के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और निर्यातकों की आय बढ़ सकती है।
दूसरी ओर भारतीय उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की संभावना है। ब्रिटेन से आयात होने वाली कई वस्तुओं पर शुल्क कम होने से उनकी कीमतों में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। हालांकि किसी भी उत्पाद की अंतिम कीमत केवल सीमा शुल्क से तय नहीं होती, बल्कि परिवहन लागत, कर, वितरण खर्च और कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए सभी वस्तुओं की कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं की जा सकती, लेकिन समय के साथ उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है। समझौते से दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ेगा, नई तकनीक का आदान-प्रदान होगा और भारतीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान मिलेगा।
सेवा क्षेत्र, विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाएं और पेशेवर सेवाओं में भी सहयोग बढ़ने की संभावना है। भारत लगातार दुनिया के प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर अपने निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक बाजारों तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। ब्रिटेन के साथ लागू हुआ यह समझौता उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव भारतीय उद्योग, रोजगार, निवेश और उपभोक्ता बाजार पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है। यदि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार व्यापार में वृद्धि होती है तो यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।

















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