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महंगाई की नई मार : पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर बढ़ोतरी, हर दिन बढ़ रही टेंशन, राहत की उम्मीद फिलहाल दूर

देश में आम जनता पर महंगाई की एक और बड़ी मार पड़ी है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। दिल्ली के ईंधन डीलरों से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी समेत देशभर में पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। नई दरें आज सुबह 6 बजे से लागू हो चुकी हैं। लगातार बढ़ते ईंधन के दाम अब आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनते जा रहे हैं। 

खासतौर पर मध्यम वर्ग और रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, टैक्सी और ऑटो चालक, ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोग और किसान सभी इस बढ़ोतरी से परेशान हैं। पेट्रोल-डीजल के महंगे होने का असर केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों से लेकर हर जरूरी सामान की कीमत पर पड़ता है। इस महीने यह तीसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। वहीं उससे कुछ दिन पहले ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया था। लगातार हो रही इन बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता और ज्यादा बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में इसका असर बाजार पर और व्यापक रूप से दिखाई देगा। 

माल ढुलाई की लागत बढ़ने से फल-सब्जियों, दूध, राशन, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं के दामों में भी तेजी आ सकती है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले ही डीजल की कीमतों को लेकर दबाव में है और अब नए रेट लागू होने के बाद किराए और भाड़े में बढ़ोतरी की संभावना भी बढ़ गई है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह बढ़ोतरी फिलहाल अंतिम नजर नहीं आ रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तेल कंपनियां अपनी लागत बढ़ने का हवाला दे रही हैं और यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में बार-बार संशोधन किया जा रहा है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में कीमतें धीरे-धीरे और ऊपर जा सकती हैं। 

एक समय ऐसा भी था जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लंबे समय तक कोई बदलाव नहीं होता था। कई-कई महीनों तक रेट स्थिर बने रहते थे, जिससे लोगों को राहत मिलती थी। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। पिछले दो सालों में जिस तरह रोजाना या कुछ दिनों के अंतराल पर कीमतों में छोटे-छोटे बदलाव देखने को मिल रहे हैं, उसने लोगों को फिर उसी पुराने दौर की याद दिला दी है जब हर सुबह नए दाम लोगों की चिंता बढ़ा देते थे। आम जनता का कहना है कि पहले एक साथ बड़ी बढ़ोतरी होती थी तो कम से कम लोगों को यह उम्मीद रहती थी कि कुछ समय तक राहत मिलेगी, लेकिन अब थोड़ा-थोड़ा करके लगातार दाम बढ़ाए जा रहे हैं। यही वजह है कि लोगों को महंगाई का बोझ लगातार महसूस हो रहा है। हर बार कुछ पैसे या एक रुपये के आसपास की बढ़ोतरी देखने में भले छोटी लगे, लेकिन महीनेभर में इसका असर हजारों रुपये तक पहुंच जाता है।

महंगाई की चेन रिएक्शन शुरू होने के आसार, हर सेक्टर पर पड़ेगा असर

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को अर्थव्यवस्था में महंगाई का सबसे बड़ा ट्रिगर माना जाता है। पेट्रोल और डीजल महंगे होते ही सबसे पहले परिवहन लागत बढ़ती है और उसके बाद लगभग हर सेक्टर प्रभावित होने लगता है। ट्रक ऑपरेटरों और परिवहन कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि यदि यही स्थिति जारी रही तो माल भाड़ा बढ़ाना उनकी मजबूरी हो जाएगी। डीजल खासतौर पर कृषि और परिवहन क्षेत्र की रीढ़ माना जाता है। खेतों में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण डीजल पर चलते हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने से खेती की लागत भी बढ़ सकती है। इसका असर आने वाले समय में खाद्यान्न और सब्जियों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। ग्रामीण इलाकों में भी लोग इस बढ़ोतरी से परेशान हैं क्योंकि वहां निजी वाहन और सार्वजनिक परिवहन दोनों पर डीजल की निर्भरता ज्यादा है। 

वहीं शहरों में कामकाजी लोगों के लिए रोजाना का सफर और महंगा हो सकता है। टैक्सी, ऑटो और कैब सेवाओं के किराए में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। कई राज्यों में बस ऑपरेटर भी किराया बढ़ाने की मांग उठा सकते हैं। इसका असर सीधे आम आदमी के मासिक बजट पर पड़ेगा। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति का असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है। इसके अलावा रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में बढ़ोतरी भी एक कारण बताई जा रही है। हालांकि विपक्षी दल लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं और टैक्स में राहत देने की मांग कर रहे हैं। 

देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय वैट और माल ढुलाई शुल्क के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग हैं। कुछ राज्यों में पहले से ही पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार चल रहा है, जबकि कई शहरों में डीजल भी तेजी से उस आंकड़े की ओर बढ़ रहा है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में लोगों को राहत मिलेगी या फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहेगा। मौजूदा हालात और अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेत यही बता रहे हैं कि अभी राहत की उम्मीद कम नजर आ रही है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आती, तो पेट्रोल और डीजल के दाम धीरे-धीरे और बढ़ सकते हैं। आम जनता अब यही कह रही है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल आंकड़े नहीं रह गई हैं, बल्कि यह सीधे लोगों की जिंदगी और रसोई के बजट को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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