देश की राजनीति में गुरुवार शाम बड़ा घटनाक्रम होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 4 बजे नई दिल्ली स्थित ‘सेवा तीर्थ’ में मंत्रिपरिषद की अहम बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक को मोदी सरकार की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें केंद्र सरकार के सभी बड़े चेहरे मौजूद रहेंगे। कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री इस बैठक में शामिल होंगे। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल, मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा और आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। करीब एक साल बाद हो रही मंत्रिपरिषद की यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है, जब देश और दुनिया दोनों स्तर पर कई बड़े मुद्दे सामने हैं।
एक तरफ पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है तो दूसरी ओर नीट परीक्षा पेपर लीक मामला लगातार सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक केवल औपचारिक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे सरकार की दिशा और भविष्य की रणनीति तय करने वाली बैठक के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान सभी मंत्रालयों के कामकाज की गहन समीक्षा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि हर मंत्रालय का रिपोर्ट कार्ड देखा जाएगा और यह आकलन किया जाएगा कि किस मंत्री ने अपने विभाग में कितना काम किया और सरकार की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में कितनी सफलता मिली।
बैठक में विभिन्न मंत्रालयों की उपलब्धियों, लंबित परियोजनाओं और आने वाले समय की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि जून के दूसरे सप्ताह में मोदी सरकार बड़ा विस्तार या फेरबदल कर सकती है। कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले चेहरों को नई और बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
वहीं कुछ नए चेहरों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की चर्चा तेज है। यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से इसलिए भी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर पार्टी के भीतर नई ऊर्जा देखने को मिली है। इसके अलावा पुडुचेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के दोबारा गठन ने भी भाजपा नेतृत्व का आत्मविश्वास बढ़ाया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी आने वाले राज्यों के चुनावों और 2029 की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दे सकते हैं।
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस बैठक को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी मंत्रियों को कामकाज को लेकर कड़ा संदेश दे सकते हैं। पिछले कुछ समय में सरकार की कार्यशैली, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसंपर्क को लेकर भी लगातार समीक्षा की बात सामने आती रही है। ऐसे में यह बैठक मोदी सरकार के लिए एक अहम मध्यावधि समीक्षा के रूप में देखी जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद सरकार और संगठन दोनों स्तर पर कई बड़े राजनीतिक संकेत देखने को मिल सकते हैं।
40 अरब डॉलर के निवेश के साथ विदेश दौरा खत्म कर दिल्ली लौटे प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच दिवसीय विदेश यात्रा पूरी कर दिल्ली लौट आए हैं। इस दौरे को भारत की आर्थिक और कूटनीतिक मजबूती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यात्रा के दौरान भारत को करीब 40 अरब डॉलर के नए निवेश प्रस्ताव और प्रतिबद्धताएं मिली हैं। अर्धचालक निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित हाइड्रोजन, आधारभूत ढांचा, परिवहन व्यवस्था और तकनीक जैसे भविष्य के क्षेत्रों में दुनिया की बड़ी कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा के दौरान 50 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इन कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर के बीच बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इन बैठकों में भारत में नए निवेश, उत्पादन विस्तार, तकनीकी सहयोग और विनिर्माण केंद्र विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में संयुक्त अरब अमीरात द्वारा भारत में 5 अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणा शामिल रही। इसके अलावा कई वैश्विक कंपनियों ने भारत में अपने मौजूदा कारोबार को बढ़ाने और नई परियोजनाओं में निवेश करने का भरोसा दिया। बताया जा रहा है कि जिन कंपनियों से चर्चा हुई, उनका भारत में पहले से लगभग 180 अरब डॉलर का निवेश है और अब वे भारत को भविष्य के बड़े उत्पादन और व्यापारिक केंद्र के रूप में देख रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में संयुक्त अरब अमीरात, Netherlands, Sweden, Norway और Italy शामिल रहे। नीदरलैंड के साथ व्यापार, रक्षा, अर्धचालक निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित हाइड्रोजन को लेकर रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप जारी किया गया।
वहीं स्वीडन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति बनी। नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी ने तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहां ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और नई तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इटली के साथ भी संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक ले जाने पर सहमति बनी। यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों और सहयोग संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। यह यात्रा दुनिया के सामने भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, तेजी से बढ़ते बाजार और निवेश के अनुकूल नीतियों का बड़ा संदेश देने में सफल रही है। विदेशी कंपनियां अब भारत को केवल बड़ा उपभोक्ता बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी केंद्र के रूप में भी देख रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत को दुनिया के सबसे भरोसेमंद निवेश स्थलों में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

















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