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बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण ने छोड़ी भाजपा, कांग्रेस में वापसी की चर्चा से उत्तराखंड की सियासत गरम

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की राजनीति में एक और बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके भाजपा छोड़ने की खबर सामने आने के बाद चकराता से लेकर देहरादून तक राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। रामशरण नौटियाल वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चकराता सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, जहां उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह से हुआ था। रामशरण नौटियाल के इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। उनका कांग्रेस से पुराना राजनीतिक संबंध रहा है और भाजपा में आने से पहले वह कांग्रेस में सक्रिय रहे थे। इसी वजह से उनके दोबारा कांग्रेस का रुख करने की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक रामशरण नौटियाल ने कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक चर्चा और संभावित अगले कदम के तौर पर ही देखा जा रहा है।

रामशरण नौटियाल ने अपने इस्तीफे को लेकर मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया है। इस्तीफे की वजह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पहले भाजपा अध्यक्ष उनके इस्तीफे की वजह बताएं, उसके बाद वह इस बारे में बात करेंगे। इससे साफ है कि उन्होंने फिलहाल अपने फैसले की विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की है। इधर, भाजपा की ओर से उनके इस्तीफे को लेकर शुरुआत में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इस्तीफे की जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई थी। अलग-अलग रिपोर्टों में इसके बाद रामशरण नौटियाल की ओर से इस्तीफे की पुष्टि किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में भाजपा संगठन और रामशरण नौटियाल के बयानों के बीच घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चा बनी हुई है।

रामशरण नौटियाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इस पूरे घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाती है। वह लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। कांग्रेस संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ वह उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2014 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। इसके बाद वह भाजपा में सक्रिय रहे और क्षेत्र की राजनीति में अपनी भूमिका बनाए रखी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें चकराता विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था। 

इस चुनाव में उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह से हुआ। चुनाव परिणाम में प्रीतम सिंह को 36,853 वोट मिले, जबकि रामशरण नौटियाल को 27,417 मत प्राप्त हुए। इस तरह रामशरण नौटियाल दूसरे स्थान पर रहे। चुनाव के दौरान उनके बेटे और गायक जुबिन नौटियाल भी पिता के समर्थन में चकराता पहुंचे थे।

रामशरण नौटियाल की क्षेत्रीय राजनीति में सक्रियता काफी पुरानी है। वह जिला पंचायत अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं और जौनसार-बावर क्षेत्र की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे में भाजपा से उनके अलग होने की खबर को केवल पार्टी बदलने के घटनाक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि चकराता और आसपास के क्षेत्र की राजनीति से जोड़कर भी चर्चा की जा रही है।

कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज, अगली राजनीतिक चाल पर नजर

रामशरण नौटियाल के भाजपा छोड़ने के बाद कांग्रेस में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं सबसे ज्यादा हैं। इसकी बड़ी वजह उनका कांग्रेस से पुराना जुड़ाव है। हालांकि, अभी कांग्रेस की ओर से भी उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किए जाने की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अंतिम तस्वीर स्पष्ट नहीं है। कुछ रिपोर्टों में यह भी चर्चा है कि यदि रामशरण नौटियाल कांग्रेस में लौटते हैं तो आगामी विधानसभा चुनाव में विकासनगर या सहसपुर विधानसभा सीट से उनकी संभावित दावेदारी को लेकर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इन दोनों सीटों से चुनाव लड़ने को लेकर भी अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लिहाजा इसे फिलहाल राजनीतिक अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए। रामशरण नौटियाल की भाजपा से नाराजगी को लेकर भी पिछले कुछ वर्षों में चर्चाएं होती रही हैं। 

वर्ष 2023 में उन्होंने अपनी ही पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने चकराता और कालसी क्षेत्र में भ्रष्टाचार तथा लकड़ी तस्करी जैसे मुद्दे उठाए थे। इसके बाद से उनके और क्षेत्र के कुछ भाजपा नेताओं के बीच मतभेद की चर्चा बनी रही। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनका भाजपा से अलग होना उत्तराखंड की राजनीति में नया घटनाक्रम है। खासकर चकराता और जौनसार-बावर क्षेत्र में उनके पुराने राजनीतिक संबंधों और सक्रियता को देखते हुए उनके अगले फैसले पर राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं की नजर बनी हुई है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि अभी रामशरण नौटियाल ने कांग्रेस में जाने की घोषणा नहीं की है। 

इसलिए उनके इस्तीफे को फिलहाल भाजपा से अलग होने के फैसले के रूप में देखा जाना चाहिए, जबकि कांग्रेस में वापसी और संभावित चुनावी भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं की पुष्टि उनके अगले आधिकारिक बयान या पार्टी में शामिल होने के बाद ही होगी। आने वाले दिनों में उनका राजनीतिक रुख स्पष्ट होने के साथ उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में इस घटनाक्रम की तस्वीर भी साफ हो सकती है। 

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