हिमाचल प्रदेश में मानसून अब लगातार विकराल रूप दिखाने लगा है। गुरुवार देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने राज्य के कई इलाकों में तबाही मचा दी। सबसे अधिक असर किन्नौर जिले में देखने को मिला, जहां चोलिंग क्षेत्र में भारी बारिश के बाद अचानक पहाड़ी से मलबा और चट्टानें राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर आ गिरीं। देखते ही देखते सड़क पर चल रही दो गाड़ियां मलबे की चपेट में आ गईं और पूरी तरह दब गईं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लेना शुरू किया। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार राहत कार्य में लगातार बाधाएं आ रही हैं, क्योंकि बारिश का सिलसिला रुक-रुक कर जारी है और पहाड़ियों से लगातार पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है।
लगातार हो रही बारिश ने केवल किन्नौर ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई जिलों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सड़क संपर्क बाधित हो गया है। प्रदेशभर में 49 सड़कें बंद होने से हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है और लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी दिक्कतें आने लगी हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में मशीनें भेजकर मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों की गति धीमी कर रही है। किन्नौर का चोलिंग क्षेत्र पहले भी भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता रहा है।
यहां मानसून के दौरान अक्सर पहाड़ दरकने और मलबा आने की घटनाएं सामने आती हैं। गुरुवार रात हुई तेज बारिश के बाद पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक खिसक गया, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग मलबे से भर गया। इस दौरान वहां मौजूद दो वाहन मलबे के नीचे दब गए। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से हाईवे पर आवाजाही रोक दी है और लोगों से अनावश्यक यात्रा नहीं करने की अपील की है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार मौसम की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।
सड़कों के बंद होने से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और आवश्यक सेवाओं पर पड़ा असर
बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेशभर में 49 सड़कें बंद हो चुकी हैं। इनमें राष्ट्रीय राजमार्गों के अलावा कई प्रमुख जिला और ग्रामीण सड़कें भी शामिल हैं। सड़कों के बंद होने से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ा है। कई स्थानों पर बिजली और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। लोक निर्माण विभाग की टीमें जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण कार्य में बार-बार रुकावट आ रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी प्रदेश के ऊंचाई वाले और पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।
इसके चलते भूस्खलन, अचानक बाढ़ और चट्टानें गिरने जैसी घटनाओं का खतरा बना रहेगा। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से नदी-नालों तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।किन्नौर, शिमला, मंडी, कुल्लू, चंबा और सिरमौर सहित कई जिलों में प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और बिना जरूरी कारण यात्रा से बचने की सलाह दी है। मानसून के इस दौर ने एक बार फिर हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को उजागर कर दिया है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे सड़क नेटवर्क और सामान्य जनजीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है।
प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होने के बाद सभी बंद सड़कों को जल्द खोलने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन फिलहाल लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं। जहां कहीं भी सड़कें बंद हुई हैं, वहां मशीनें लगाकर मलबा हटाने का काम जारी है। साथ ही संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत प्रशासन को देने के निर्देश दिए गए हैं। यदि बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों दोनों के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव मानी जा रही है।

















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