ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर तेहरान पूरी तरह तैयार है। 3 से 6 जुलाई के बीच आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक राजकीय समारोह में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधिमंडल, धार्मिक नेता और राजनीतिक हस्तियां शामिल होंगी। ईरान सरकार का दावा है कि अंतिम यात्रा में 1.5 से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो यह ईरान के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में दर्ज होगा।
भारत से भी इस समारोह में कई प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को ईरान सरकार ने भारत की विशेष अतिथि के रूप में आधिकारिक निमंत्रण भेजा है। इसके अलावा विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा, बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और जैन संत आचार्य लोकेश मुनि भी समारोह में भाग लेने के लिए आमंत्रित किए गए हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को निमंत्रण भेजकर ईरान ने इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।महबूबा मुफ्ती ने निमंत्रण मिलने पर इसे अपने जीवन का एक विशेष अवसर बताया। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। जिंदगी में एक बार मिलने वाला ऐसा अवसर है। मैं खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि देने तेहरान जाऊंगी।” उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने दशकों तक ईरान की राजनीति और विदेश नीति को दिशा दी।
तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसी विशाल परिसर में देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों, धार्मिक नेताओं और लाखों नागरिकों की मौजूदगी में खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि दी जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। राजधानी के प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, जबकि विभिन्न सरकारी एजेंसियां कार्यक्रम के सुचारु संचालन में जुटी हुई हैं। अंतिम संस्कार से पहले खामेनेई के परिवार के पांच सदस्यों के ताबूत भी एक साथ रखे गए हैं। इनमें स्वयं अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी बेटी, बहू, पोते और दामाद के ताबूत शामिल हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इन सभी का अंतिम संस्कार राजकीय कार्यक्रम के तहत किया जाएगा।
यह दृश्य भावनात्मक होने के साथ-साथ पूरे देश के लिए शोक का प्रतीक माना जा रहा है। ईरान में अंतिम संस्कार की रस्में कई दिनों तक चलेंगी। इस दौरान देशभर में शोक सभाएं, विशेष प्रार्थनाएं और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने परिवहन, सुरक्षा और आवास की विशेष व्यवस्था की है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने देशवासियों से बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विदाई समारोह नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और देश की सामूहिक भावना का प्रतीक होगा। गालिबाफ ने कहा कि लोगों की मौजूदगी इस्लामिक ईरान के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया को यह संदेश मिलना चाहिए कि ईरानी जनता अपने नेताओं के प्रति सम्मान और एकजुटता बनाए रखती है। ईरान सरकार का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी दुनिया के सामने देश की सामाजिक और राजनीतिक एकजुटता का प्रदर्शन करेगी। इसी वजह से कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व दिया जा रहा है।
अयातुल्ला अली खामेनेई कौन थे? जानिए उनका राजनीतिक और धार्मिक सफर
अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई ईरान की राजनीति और धार्मिक व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने कई दशकों तक देश के सर्वोच्च नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली और ईरान की आंतरिक राजनीति, विदेश नीति तथा रक्षा रणनीति को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। उनके नेतृत्व में ईरान ने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मजबूत भूमिका स्थापित करने का प्रयास किया और कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में सक्रिय भागीदारी निभाई। खामेनेई को ईरान की इस्लामिक व्यवस्था का प्रमुख वैचारिक चेहरा माना जाता था। उन्होंने देश की धार्मिक संस्थाओं और संवैधानिक ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में परमाणु कार्यक्रम, पश्चिमी देशों के साथ संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और मध्य पूर्व की राजनीति जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे।उनके समर्थकों के अनुसार, उन्होंने कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भी ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
वहीं, आलोचक उनकी कई नीतियों को लेकर असहमति जताते रहे। इसके बावजूद यह निर्विवाद है कि ईरान के समकालीन इतिहास में उनका प्रभाव बेहद व्यापक रहा। उनकी अंतिम यात्रा को लेकर पूरे ईरान में शोक का माहौल है। राजधानी तेहरान से लेकर अन्य प्रमुख शहरों तक सरकारी इमारतों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं। बड़ी संख्या में लोग खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए तेहरान पहुंच रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस राजकीय अंतिम संस्कार पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि ईरान इस समारोह को केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक महत्व के आयोजन के रूप में देख रहा है।
भारत सहित कई देशों के नेताओं की भागीदारी दोनों देशों के कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में तेहरान पूरी तरह इस ऐतिहासिक राजकीय कार्यक्रम का केंद्र बना रहेगा। करोड़ों लोगों की संभावित मौजूदगी, कड़े सुरक्षा इंतजाम और दुनिया भर से पहुंच रहे प्रतिनिधिमंडलों के बीच अयातुल्ला अली खामेनेई को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।

















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