उत्तराखंड में ग्रामीण विकास को नई गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के गांवों में सड़क, सिंचाई, कृषि, बागवानी, पशुपालन, कोल्ड चेन और अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लक्ष्य तय किया गया है। इस दिशा में मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सोमवार को सचिवालय में आयोजित नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक में सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआईडीएफ) के अंतर्गत अधिक से अधिक गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करें और उन्हें तय समय सीमा के भीतर पोर्टल पर अपलोड करें। उन्होंने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना भी उतना ही जरूरी है। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास, विभागों के बीच बेहतर समन्वय, लंबित परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि यदि सभी विभाग एकीकृत दृष्टिकोण अपनाकर योजनाएं तैयार करेंगे तो गांवों में विकास का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचेगा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने विभागों को निर्देश दिए कि अगले तीन दिनों के भीतर सभी नई परियोजनाओं के प्रस्ताव पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन परियोजनाओं का कार्य जारी है और जिनकी प्रतिपूर्ति होनी है, उनके प्रस्ताव भी बिना देरी के अपलोड किए जाएं ताकि समय पर धनराशि जारी की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जो परियोजनाएं धीमी गति से चल रही हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और संबंधित विभागों के सचिव स्वयं उनकी साप्ताहिक समीक्षा करें। मुख्य सचिव ने कहा कि विकास कार्यों की गति तभी तेज होगी जब प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी के साथ-साथ दूसरे विभागों के साथ भी समन्वय बनाकर काम करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग-अलग योजनाओं के बजाय समेकित परियोजनाओं पर जोर दिया जाए, जिससे किसी भी क्षेत्र का संतुलित और व्यापक विकास सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि विभागों को केवल अपने हिस्से के कार्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे मॉडल तैयार करने चाहिए जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आय और बुनियादी सुविधाओं का एक साथ विस्तार हो। उन्होंने विशेष रूप से कृषि और बागवानी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य की परियोजनाएं क्लस्टर आधारित हों। एक ही क्षेत्र के आसपास स्थित कई गांवों और उत्पादन केंद्रों को जोड़ते हुए ऐसी योजनाएं बनाई जाएं, जिनमें किसानों को उत्पादन से लेकर भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंचने की पूरी व्यवस्था एक ही परियोजना के अंतर्गत मिल सके। उन्होंने कहा कि कोल्ड चेन, वेयरहाउस, परिवहन व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं को एकीकृत कर तैयार किए जाने वाले प्रोजेक्ट किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। लगातार बढ़ती जलवायु चुनौतियों और बाजार की बदलती जरूरतों को देखते हुए मुख्य सचिव ने नाबार्ड से तकनीकी और विशेषज्ञ सहयोग भी मांगा। उन्होंने कहा कि कई बार विभागों के पास संसाधन तो होते हैं, लेकिन परियोजनाओं की वैज्ञानिक योजना तैयार करने के लिए विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। ऐसे में नाबार्ड की विशेषज्ञ टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर बेहतर और दीर्घकालिक परियोजनाएं तैयार कर सकती है।
एकीकृत विकास मॉडल पर रहेगा जोर, लंबित परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने बैठक में सुझाव दिया कि नाबार्ड को राज्य के गतिशक्ति पोर्टल का एक्सेस उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह राज्य में प्रस्तावित और संचालित विभिन्न परियोजनाओं का अध्ययन कर सके। उन्होंने कहा कि नाबार्ड चार से पांच ऐसे क्षेत्रों की पहचान करे, जहां पायलट परियोजना के रूप में समग्र विकास मॉडल तैयार किया जा सके। इन क्षेत्रों के लिए कृषि, बागवानी, सड़क, सिंचाई, भंडारण, परिवहन और विपणन जैसी सभी सुविधाओं को एकीकृत करते हुए विकास योजना बनाई जाए। इससे भविष्य में पूरे राज्य के लिए एक प्रभावी मॉडल विकसित किया जा सकेगा। मुख्य सचिव के इस प्रस्ताव पर नाबार्ड ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए शीघ्र विशेषज्ञ टीम गठित करने का आश्वासन दिया। यह टीम चिन्हित क्षेत्रों का अध्ययन कर वहां की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजना तैयार करेगी और विभागों को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराएगी। बैठक में उद्यान विभाग की पॉलीहाउस परियोजना की समीक्षा भी की गई। मुख्य सचिव ने इस परियोजना की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिए कि इसकी सचिव स्तर पर प्रत्येक सप्ताह समीक्षा की जाए और निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा कराया जाए।
उन्होंने कहा कि पॉलीहाउस परियोजनाएं किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए इनमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।पशुपालन विभाग को भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के सभी जनपदों में बड़े पशु चिकित्सालय विकसित किए जाएं ताकि दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और इसकी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होंगी।उन्होंने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है, उनका पूर्णता प्रमाण-पत्र और विस्तृत रिपोर्ट बिना देरी के नाबार्ड को भेजी जाए। इससे परियोजनाओं का समय पर मूल्यांकन होगा और भविष्य की योजनाओं के लिए धनराशि उपलब्ध कराने में आसानी होगी। बैठक के दौरान अधिकारियों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रगति की जानकारी भी प्रस्तुत की। बताया गया कि इस वर्ष नाबार्ड के माध्यम से कुल एक हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव राज्य सरकार को प्राप्त हो चुके हैं।
इनमें से 271 करोड़ रुपये की परियोजनाएं नाबार्ड के पास भेजी जा चुकी हैं, जबकि इन परियोजनाओं में 210 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी नाबार्ड को उपलब्ध करा दी गई है। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि शेष प्रस्ताव भी शीघ्र तैयार कर निर्धारित समय सीमा के भीतर भेज दिए जाएंगे। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भविष्य की परियोजनाओं का चयन केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि उनका सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों, बागवानों, पशुपालकों और स्थानीय युवाओं को मिले। बेहतर सड़कें, सिंचाई सुविधाएं, कृषि अवसंरचना, आधुनिक भंडारण, कोल्ड चेन और परिवहन नेटवर्क विकसित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, कृषि उत्पादों की बर्बादी कम होगी और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेंगे। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में योजनाओं की सफलता केवल बजट पर निर्भर नहीं करती, बल्कि समयबद्ध क्रियान्वयन, विभागों के बीच समन्वय और मजबूत निगरानी व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है।
उन्होंने सभी अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करें और उनके क्रियान्वयन में किसी प्रकार की ढिलाई न बरतें। उनका कहना था कि यदि नाबार्ड और राज्य सरकार मिलकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का व्यापक विस्तार होगा, किसानों की आय बढ़ेगी और उत्तराखंड के गांव विकास की नई तस्वीर प्रस्तुत करेंगे। बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, सी. रविशंकर, धीराज सिंह गर्ब्याल, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए निर्णयों को ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनसे आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होने के साथ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

















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