अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़े अभियान में भारत से जुड़े कथित आपराधिक नेटवर्क पर अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाई शुरू की है। अमेरिकी न्याय विभाग ने “ऑपरेशन हार्ड बॉल” के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में फैले एक ऐसे नेटवर्क को निशाना बनाया है, जिस पर हत्या, जबरन वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी, अपहरण, अवैध हथियारों की आपूर्ति और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। इस कार्रवाई के दौरान कई देशों में एक साथ छापेमारी की गई, दर्जनों ठिकानों की तलाशी ली गई और बड़ी संख्या में आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान वर्षों तक चली जांच का नतीजा है और इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय अपराध सिंडिकेट की आर्थिक और आपराधिक गतिविधियों को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) के अनुसार, इस अभियान के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा तीन अलग-अलग संघीय अभियोगों में 37 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों के अलावा 10 आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ था और अलग-अलग क्षेत्रों में अपने सहयोगियों के माध्यम से संगठित अपराध को अंजाम देता था। डीओजे ने बताया कि जांच के दौरान कैलिफोर्निया, इंडियाना और जॉर्जिया सहित अमेरिका के कई राज्यों के अलावा कनाडा और स्पेन में भी 50 से अधिक तलाशी वारंट जारी किए गए।
इन छापों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज, संचार रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन सबूतों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। अमेरिकी जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कार्रवाई केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि उन संगठित अपराध समूहों के खिलाफ है, जो सीमाओं के पार अपराधों को अंजाम देने के लिए आधुनिक तकनीक, ऑनलाइन संचार और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के अपराध केवल किसी एक देश की समस्या नहीं रह गए हैं, बल्कि इनसे निपटने के लिए कई देशों के बीच समन्वित कार्रवाई जरूरी है।
लॉरेंस बिश्नोई समेत कई प्रमुख नाम अभियोग में शामिल
तीन संघीय अभियोगों में से एक विशेष रूप से जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा है। अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि बिश्नोई ने भारत की जेल में रहते हुए भी प्रतिबंधित मोबाइल फोन और इंटरनेट आधारित संचार माध्यमों का उपयोग करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय अपने कथित आपराधिक नेटवर्क का संचालन किया। अभियोग में दावा किया गया है कि गिरोह के सदस्य विभिन्न देशों में हत्या, राजनीतिक हत्याओं की साजिश, जबरन वसूली, अपहरण, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल रहे। जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह ने अलग-अलग देशों में अपने सहयोगियों के जरिए स्थानीय स्तर पर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया, जबकि कथित नेतृत्व विदेशों में मौजूद नेटवर्क के माध्यम से संपर्क बनाए रखता था। अभियोग के अनुसार, संचार के लिए इंटरनेट आधारित सुरक्षित प्लेटफॉर्म और प्रतिबंधित मोबाइल उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके।
अमेरिकी अभियोजकों ने इस मामले में गोल्डी बरार को उत्तरी अमेरिका में गिरोह की गतिविधियों का प्रमुख समन्वयक बताया है। वहीं, रोहित गोदारा पर यूरोप में नेटवर्क संचालित करने और वहां मौजूद सहयोगियों के जरिए गिरोह की गतिविधियों की निगरानी करने का आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों ने भारत के बाहर गिरोह के प्रभाव को बढ़ाने और विभिन्न देशों में आपराधिक गतिविधियों के संचालन में अहम भूमिका निभाई। अभियोग में यह भी कहा गया है कि गिरोह कथित तौर पर भारतीय मूल के लोगों और कारोबारी समुदाय को निशाना बनाकर डर और धमकी का माहौल तैयार करता था। जबरन वसूली के लिए हिंसा और धमकियों का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि सोशल मीडिया और ऑनलाइन पोस्ट के माध्यम से अपनी आपराधिक छवि को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर गिरोह का प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की जाती थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस रणनीति का उद्देश्य लोगों में भय पैदा करना और नए सहयोगियों को आकर्षित करना था। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है और भविष्य में भी ऐसे नेटवर्क के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
उनका कहना है कि संगठित अपराध से जुड़े मामलों में विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। आपको बता दें कि लॉरेंस बिश्नोई पंजाब का रहने वाला एक कुख्यात गैंगस्टर है, जिसके खिलाफ भारत में हत्या, रंगदारी, हथियारों की तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय से जेल में बंद है, लेकिन भारतीय जांच एजेंसियों का आरोप रहा है कि जेल में रहते हुए भी उसका गिरोह सक्रिय रहा और देश-विदेश में उसके सहयोगी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते रहे। हाल के वर्षों में उसका नाम कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों में सामने आया है और भारत की विभिन्न केंद्रीय व राज्य एजेंसियां उसके नेटवर्क की लगातार जांच कर रही हैं। अमेरिकी कार्रवाई के बाद अब यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

















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