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शिमला की ट्रैफिक समस्या का समाधान फिर अटका, रोपवे परियोजना पर सुखविंदर सरकार ने लगाई रोक

शिमला में बढ़ती यातायात समस्या से राहत दिलाने और शहर में आवागमन को आसान बनाने के लिए प्रस्तावित रोपवे परियोजना को फिलहाल बड़ा झटका लगा है। हिमाचल प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर आगे की प्रक्रिया रोकने का फैसला किया है। सरकार ने रोपवे परियोजना के लिए जारी वित्तीय बोली को भी रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद फिलहाल शिमला में प्रस्तावित रोपवे के निर्माण की दिशा में आगे कोई कदम नहीं बढ़ाया जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल अपने नए हलफनामे में स्थिति स्पष्ट की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए रोपवे परियोजना के प्रस्ताव पर फिलहाल आगे बढ़ना संभव नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के लिए जारी वित्तीय बोली को रद्द कर दिया गया है।

शिमला जैसे पहाड़ी और सीमित सड़क क्षेत्र वाले शहर में यातायात की समस्या लंबे समय से बड़ी चुनौती बनी हुई है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव भी बढ़ता रहा है। ऐसे में सरकार की ओर से रोपवे को सार्वजनिक परिवहन के एक वैकल्पिक साधन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसका उद्देश्य सड़क पर वाहनों का दबाव कम करने के साथ-साथ शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवागमन को सुगम बनाना था। प्रस्तावित शिमला रोपवे परियोजना का विस्तार करीब 13.79 किलोमीटर का था। योजना के तहत तीन अलग-अलग रोपवे लाइनें विकसित की जानी थीं। इन तीनों लाइनों के माध्यम से शहर के विभिन्न हिस्सों को आपस में जोड़ने की योजना थी। परियोजना में यात्रियों के चढ़ने और उतरने के लिए कुल 13 बोर्डिंग और डी-बोर्डिंग स्टेशन प्रस्तावित किए गए थे। इसके अलावा रोपवे की संचालन व्यवस्था के लिए एक टर्निंग स्टेशन भी बनाया जाना था।

परियोजना को केवल परिवहन सुविधा के तौर पर नहीं देखा जा रहा था, बल्कि शिमला में यातायात प्रबंधन की व्यापक योजना का हिस्सा माना गया था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण शहर में नई सड़कें बनाना आसान नहीं है। ऐसे में रोपवे के माध्यम से कम जमीन में बड़ी संख्या में यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की संभावना देखी गई थी। परियोजना के पूरा होने पर शिमला में सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने की उम्मीद थी।

हालांकि, अब प्रदेश की वित्तीय स्थिति परियोजना के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में रोपवे परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। इसी वजह से वित्तीय बोली को भी रद्द कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि परियोजना के लिए शुरू की गई मौजूदा वित्तीय प्रक्रिया फिलहाल समाप्त हो गई है और निकट भविष्य में इसके निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होगी।

बाहरी वित्तीय सहायता से परियोजना तैयार करने की थी योजना

शिमला रोपवे परियोजना को लेकर सरकार पहले बाहरी वित्तीय सहायता के विकल्प पर भी विचार कर रही थी। परियोजना के लिए धन की व्यवस्था को लेकर मामला परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों के स्तर तक भेजा गया था। सरकार की कोशिश थी कि बाहरी वित्तीय सहायता के माध्यम से इतनी बड़ी परियोजना के लिए आवश्यक धन जुटाया जा सके, ताकि राज्य के खजाने पर तत्काल बड़ा वित्तीय बोझ न पड़े। प्रस्तावित परियोजना में तीन रोपवे लाइनों और 13 स्टेशनों के साथ एक टर्निंग स्टेशन का निर्माण किया जाना था। इसकी कुल लंबाई 13.79 किलोमीटर रखी गई थी। परियोजना की व्यापकता को देखते हुए इसके निर्माण और संचालन के लिए बड़ी राशि की आवश्यकता थी। ऐसे में सरकार ने वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को महत्वपूर्ण माना।

अब सरकार के नए हलफनामे के बाद परियोजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो गई है। आर्थिक परिस्थितियों के कारण फिलहाल इसे आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है और वित्तीय बोली भी रद्द कर दी गई है। हाईकोर्ट में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के बाद यह साफ हो गया है कि शिमला की यातायात समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित रोपवे परियोजना पर अभी विराम लगा हुआ है।

शिमला में यातायात का दबाव कम करने के लिए रोपवे को एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में देखा गया था। शहर की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़क विस्तार की अपनी सीमाएं हैं। पर्यटन सीजन के दौरान वाहनों की संख्या बढ़ने से कई प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में रोपवे परियोजना से जुड़े प्रस्ताव को शहर की परिवहन व्यवस्था में बदलाव की दिशा में एक अहम पहल माना गया था। फिलहाल सरकार के सामने आर्थिक संसाधनों का प्रबंधन प्राथमिक चुनौती है। 

ऐसे में रोपवे जैसी बड़ी परियोजना पर खर्च करने के बजाय सरकार ने इसे आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। वित्तीय बोली रद्द होने के बाद परियोजना को नए सिरे से शुरू करने की स्थिति भविष्य में प्रदेश की आर्थिक स्थिति और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करेगी। इस पूरे मामले में हाईकोर्ट में दाखिल सरकार के हलफनामे से यह भी स्पष्ट हुआ है कि फिलहाल परियोजना को लेकर कोई नई वित्तीय प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है। यानी शिमला के लोगों और पर्यटकों को यातायात से राहत देने के लिए प्रस्तावित 13.79 किलोमीटर लंबे रोपवे के लिए अभी इंतजार करना होगा। आने वाले समय में प्रदेश की वित्तीय स्थिति में सुधार होने पर सरकार इस परियोजना को किस रूप में आगे बढ़ाती है, यह बाद में तय होगा।

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