वॉशिंगटन में बुधवार को अमेरिका-चीन संबंधों के लिए बेहद अहम घटनाक्रम देखने को मिला। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 साल बाद राजकीय यात्रा पर अमेरिका पहुंचे। उनकी यह यात्रा 23 से 25 सितंबर तक तीन दिन की है। वॉशिंगटन पहुंचने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोटोकॉल से हटकर जॉइंट बेस एंड्रयूज पर खुद शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का एयरपोर्ट पर इस तरह व्यक्तिगत रूप से स्वागत करना दुर्लभ माना जाता है। शी जिनपिंग के स्वागत के लिए औपचारिक सैन्य समारोह आयोजित किया गया और दोनों देशों के संबंधों में इस यात्रा के महत्व को देखते हुए अमेरिका ने स्वागत कार्यक्रम को खास रूप दिया। शी जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन के अलावा चीन के वरिष्ठ अधिकारी भी अमेरिका पहुंचे हैं। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दुर्लभ खनिजों और ताइवान समेत कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से शुल्क और व्यापार को लेकर तनाव रहा है, हालांकि हाल के महीनों में दोनों पक्षों ने टकराव को सीमित करने और बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश की है।
शी के अमेरिका पहुंचने से पहले ही अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच बातचीत हुई। इसी बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार युद्धविराम को दो महीने आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। यह युद्धविराम पहले 10 नवंबर को समाप्त होना था, लेकिन अब इसे जनवरी 2027 तक बढ़ाने की घोषणा अमेरिकी पक्ष की ओर से की गई है। इसका मकसद दोनों देशों को व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देना है। शी जिनपिंग की तीन दिवसीय यात्रा में गुरुवार यानी 24 सितंबर सबसे महत्वपूर्ण दिन है। व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच औपचारिक मुलाकात और द्विपक्षीय वार्ता होनी है। इससे पहले ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप शी जिनपिंग और पेंग लियुआन के सम्मान में औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित करेंगे। अमेरिकी सेना की ओर से विशेष सैन्य प्रस्तुतियां भी होंगी। व्हाइट हाउस के कार्यक्रम के अनुसार समारोह के दौरान बी-2 स्पिरिट बमवर्षक और चार एफ-22 रैप्टर विमानों का फ्लाईपास्ट भी प्रस्तावित है।
इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत होगी। वार्ता में सबसे अहम मुद्दा व्यापार रहने की संभावना है। दोनों पक्ष मौजूदा शुल्क व्यवस्था, व्यापार संतुलन, अमेरिकी कृषि उत्पादों की चीन को बिक्री और चीनी सामान पर अमेरिकी शुल्क जैसे विषयों पर चर्चा कर सकते हैं। इससे पहले दोनों देशों ने गैर-संवेदनशील वस्तुओं के व्यापार को सुगम बनाने के लिए अमेरिका-चीन व्यापार बोर्ड को सक्रिय करने की दिशा में सहमति बनाई है। निवेश से जुड़ा एक अलग तंत्र भी पहले प्रस्तावित किया गया था।
एआई भी बैठक का बड़ा मुद्दा होगा। अमेरिका और चीन दोनों एआई के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दौड़ में हैं। दोनों पक्ष एआई से जुड़े सुरक्षा जोखिमों, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर बातचीत करना चाहते हैं। हाल की बातचीत में एआई से संबंधित एक संवाद तंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एआई घटनाक्रमों पर सूचना साझा करने की व्यवस्था बनाने की दिशा में भी सहमति बनी है। हालांकि, एआई तकनीक, उन्नत चिप और निर्यात नियंत्रण जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी बने हुए हैं।
ट्रंप और जिनपिंग के बीच ताइवान, दुर्लभ खनिज, ईरान और व्यापार समझौते पर हो सकती है बात
वार्ता में दुर्लभ खनिज और रेयर अर्थ भी महत्वपूर्ण विषय होंगे। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, रक्षा उपकरण और एआई से जुड़ी तकनीक के लिए इन खनिजों की अहम भूमिका है और चीन वैश्विक रेयर अर्थ प्रसंस्करण में बड़ी भूमिका रखता है। अमेरिका चाहता है कि इन महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति बाधित न हो, जबकि चीन अपने निर्यात नियंत्रण को लेकर अमेरिकी दबाव का सामना कर रहा है। इसी वजह से यह मुद्दा दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों से जुड़ गया है। ताइवान भी बातचीत का संवेदनशील विषय रहेगा। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान के साथ अपने संबंधों और सुरक्षा सहयोग को बनाए रखता है। दोनों देशों के बीच ताइवान को लेकर मतभेद लंबे समय से हैं। इसके अलावा ईरान में चल रहे संघर्ष, मध्य-पूर्व की स्थिति और चीन-अमेरिका के व्यापक वैश्विक संबंधों पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत होने की संभावना है। यूक्रेन और सैन्य संबंधों जैसे मुद्दे भी चर्चा के दायरे में आ सकते हैं।
यात्रा के दौरान गुरुवार शाम व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग और पेंग लियुआन के सम्मान में राजकीय रात्रिभोज आयोजित किया जाएगा। इसमें अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रमुख कारोबारी और तकनीकी क्षेत्र के लोगों के शामिल होने की योजना है। एप्पल के टिम कुक, एनवीडिया के जेनसन हुआंग, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य बड़ी तकनीकी कंपनियों से जुड़े प्रमुख लोगों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि वार्ता का आर्थिक और तकनीकी पक्ष कितना महत्वपूर्ण है।
शुक्रवार 25 सितंबर को यात्रा के अंतिम दिन ट्रंप और मेलानिया ट्रंप शी जिनपिंग और पेंग लियुआन के साथ व्हाइट हाउस में चाय पर मुलाकात करेंगे। इसके बाद दोनों दंपती वॉशिंगटन स्थित नेशनल आर्काइव्स जाएंगे, जहां अमेरिका-चीन संबंधों के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज दिखाए जाएंगे। इसके बाद शी जिनपिंग की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा समाप्त होगी और वे अमेरिका से रवाना होंगे।
जहां तक संभावित समझौतों का सवाल है, सबसे स्पष्ट प्रगति व्यापार युद्धविराम को जनवरी 2027 तक बढ़ाने और व्यापार संवाद को आगे बढ़ाने के रूप में सामने आई है। इसके अलावा रेयर अर्थ आपूर्ति, कृषि उत्पादों, एआई संवाद और निवेश संबंधी तंत्र पर आगे की सहमति बनने की संभावना है। हालांकि, इन सभी मुद्दों पर अंतिम समझौता अभी घोषित नहीं हुआ है। इसलिए 24 सितंबर की ट्रंप-शी बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान और आधिकारिक घोषणाएं सबसे महत्वपूर्ण होंगी।
यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि शी जिनपिंग की अमेरिका में पिछली राजकीय यात्रा 2015 में हुई थी। 11 साल बाद वॉशिंगटन पहुंचे चीनी राष्ट्रपति और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की यह बैठक दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और सहयोग के अगले चरण की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों का जोर तत्काल टकराव को रोकने, व्यापार संबंधों को स्थिर रखने और एआई, दुर्लभ खनिज तथा वैश्विक सुरक्षा जैसे कठिन मुद्दों पर बातचीत का रास्ता खुला रखने पर दिखाई दे रहा है।


















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