मेघालय की राजनीति में बुधवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के आठ मौजूदा विधायक औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की मौजूदगी में सभी आठ विधायकों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस घटनाक्रम के साथ ही 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में भाजपा के विधायकों की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है। आठ विधायकों के एक साथ पार्टी बदलने से मेघालय के विधानसभा समीकरण में बड़ा बदलाव आया है। भाजपा अब सदन में सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। इससे पहले भाजपा के पास विधानसभा में केवल दो विधायक थे। वहीं UDP के पास कुल 12 विधायक थे, जिनमें से आठ के भाजपा में जाने के बाद क्षेत्रीय दल की विधानसभा में ताकत काफी कम हो गई है।
भाजपा में शामिल होने वाले आठ विधायकों में लखमेन रिम्बुई, पियूस मारवेइन, किर्मेन श्यल्ला, मायरालबोर्न सिएम, मैथ्यू कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीद कुपर सिनरेम और सिनशर लिंगदोह थबाह शामिल हैं। इन सभी ने पिछले कुछ दिनों से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ बातचीत की थी। विधायकों की ओर से मेघालय से जुड़े कई मुद्दों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रखी गई थीं। इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि करीब दो सप्ताह पहले तैयार हुई थी। सितंबर की शुरुआत में UDP के पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता डॉ. जेमिनो मावथोह ने पार्टी छोड़कर अपने समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। मावथोह मई में UDP से इस्तीफा दे चुके थे। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें वर्ष 2021 से भाजपा की ओर से पार्टी में आने के संकेत मिल रहे थे और समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह फैसला लिया।
मावथोह के भाजपा में शामिल होने के बाद ही UDP के आठ विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने की चर्चा तेज हो गई थी। बाद में UDP विधायक किर्मेन श्यल्ला ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि आठ विधायक भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया था कि विधायकों ने केंद्रीय नेतृत्व के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की है। उस समय यह भी कहा गया था कि यदि बातचीत के बाद सहमति बनती है तो विधायकों के भाजपा में शामिल होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
कोयला खनन से लेकर खासी भाषा तक, इन मुद्दों पर हुई थी बातचीत
भाजपा में शामिल होने से पहले आठों विधायकों के समूह ने मेघालय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखे थे। इनमें कोयला खनन से जुड़े प्रतिबंधों में बदलाव, खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट को लागू करने जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा शिलॉन्ग की थेम इव मावलॉन्ग स्थित हरिजन कॉलोनी के पुनर्वास का मुद्दा भी बातचीत में उठाया गया था। आठ विधायकों की भाजपा में औपचारिक एंट्री से पहले इन मुद्दों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी बातचीत हुई थी। UDP विधायक किर्मेन श्यल्ला ने दावा किया था कि उन्हें इन मांगों को लेकर आश्वासन मिला है। भाजपा नेता अलेक्जेंडर लालू हेक ने भी कहा था कि आठ विधायकों के पार्टी में आने की प्रक्रिया केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद तय हुई है।
अब बुधवार को आठों विधायकों के भाजपा में शामिल होने के साथ इस राजनीतिक घटनाक्रम पर औपचारिक मुहर लग गई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने नए सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों और केंद्र सरकार के प्रयासों से प्रभावित होकर इन विधायकों ने भाजपा में आने का फैसला किया है। भाजपा की ओर से इस घटनाक्रम को पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। मेघालय विधानसभा के मौजूदा गणित में नेशनल पीपुल्स पार्टी के पास 33 विधायक हैं। इसके बाद अब भाजपा के 10 विधायक हो गए हैं। UDP के आठ विधायकों के भाजपा में जाने से सदन में क्षेत्रीय दल की स्थिति भी बदल गई है। इससे पहले UDP के 12 विधायक थे और वह सत्तारूढ़ गठबंधन में एक महत्वपूर्ण घटक था। भाजपा भी सरकार का हिस्सा रही है और उसके पास पहले दो विधायक थे।
इस घटनाक्रम का असर केवल विधानसभा की संख्या तक सीमित नहीं है। आठ विधायकों के एक साथ भाजपा में जाने से UDP के संगठन और विधानसभा में उसकी भूमिका को लेकर भी नई स्थिति बनी है। वहीं भाजपा की संख्या में पांच गुना वृद्धि हुई है। आने वाले समय में इन विधायकों की ओर से उठाए गए स्थानीय मुद्दों और केंद्रीय नेतृत्व के साथ हुई बातचीत के आधार पर राज्य की राजनीति में आगे की दिशा तय होने की संभावना है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब मेघालय में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2028 में होना है। ऐसे में आठ मौजूदा विधायकों का भाजपा में शामिल होना राज्य की चुनावी राजनीति से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में सामने आया है।
हालांकि इस बदलाव के बाद सरकार की स्थिरता पर तत्काल कोई असर पड़ता है या नहीं, यह विधानसभा के भीतर दलों के बीच आगे बनने वाले समीकरणों पर निर्भर करेगा। अभी भाजपा के 10 विधायक होने के साथ उसका विधानसभा में संख्याबल स्पष्ट रूप से बढ़ गया है। कुल मिलाकर, UDP के आठ विधायकों का भाजपा में जाना मेघालय की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों का औपचारिक परिणाम है। पहले जेमिनो मावथोह के भाजपा में शामिल होने, फिर आठ विधायकों की केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत और अब नई दिल्ली में उनके भाजपा की सदस्यता लेने तक घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा। इस बदलाव ने 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा की स्थिति को बदल दिया है और राज्य की राजनीति में एक नया समीकरण सामने आया है।


















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