नई दिल्ली में मंगलवार को किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच हुए समझौते से हिमाचल प्रदेश के लिए बिजली और आर्थिक लाभ का रास्ता खुल गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। करीब 17 साल से लंबित इस परियोजना को लेकर हुए समझौते में हिमाचल को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली देने और हर वर्ष लगभग 1200 करोड़ रुपये की आय का प्रावधान बताया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने समझौते को प्रदेश के लिए गर्व का दिन बताते हुए कहा कि सरकार ने हिमाचल के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रस्तावित बांध की ऊंचाई 232.6 मीटर होगी और इसके निर्माण पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने समझौते के बाद कहा कि हिमाचल प्रदेश के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने इस विषय पर अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि समझौते के माध्यम से प्रदेश की बहुमूल्य जल संपदा की रक्षा हुई है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में पूर्व भाजपा सरकार की व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले परियोजना में 90 फीसदी धनराशि देने की बात स्वीकार की गई थी। इसका आर्थिक बोझ हिमाचल के लोगों पर पड़ता।
अब नई व्यवस्था में केंद्र सरकार जल घटक की 90 फीसदी लागत वहन करेगी। इससे राज्य पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कम होगा। किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। यह नदी यमुना की सहायक नदी है। परियोजना का उद्देश्य जल भंडारण, बिजली उत्पादन और विभिन्न राज्यों की पानी की जरूरतों को पूरा करना है। इसके तहत 232.6 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाना है। परियोजना की कुल लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को लेकर जून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसमें छह राज्यों के बीच सहमति बनी थी। मंगलवार को नई दिल्ली में हुए समझौते के बाद इस सहमति को औपचारिक रूप दिया गया।
हिमाचल प्रदेश के लिए समझौते में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान पानी और बिजली की लागत से जुड़ा है। तय व्यवस्था के अनुसार हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान हिमाचल के हिस्से के बिजली घटक की लागत वहन करेंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार, बांध के निर्माण में हिमाचल के हिस्से के करीब 2000 करोड़ रुपये दिल्ली और राजस्थान देंगे, क्योंकि हिमाचल के हिस्से का पानी इन दोनों राज्यों को जाएगा। परियोजना की लागत को लेकर नई व्यवस्था के तहत जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार वहन करेगी। शेष 10 फीसदी राशि छह राज्यों के बीच साझा की जाएगी। इससे हिमाचल प्रदेश पर पहले की प्रस्तावित व्यवस्था की तुलना में आर्थिक बोझ कम होने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल के हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते में महत्वपूर्ण प्रावधान सुनिश्चित किए हैं। उनके अनुसार, पहले हिमाचल के हिस्से में 90 फीसदी धनराशि देने की बात थी, लेकिन अब केंद्र की ओर से अधिकांश लागत उठाई जाएगी।
किशाऊ परियोजना को लेकर करीब 17 वर्षों से प्रक्रिया चल रही है
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल को परियोजना से 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी। इसके अलावा प्रदेश को हर वर्ष लगभग 1200 करोड़ रुपये की आय होने का दावा किया गया है। उन्होंने इसे बिना किसी निवेश के मिलने वाला आर्थिक लाभ बताया। हालांकि, इस आय की गणना और भुगतान की विस्तृत व्यवस्था समझौते के तहत तय प्रावधानों के अनुसार होगी। परियोजना में हिमाचल के हिस्से के पानी का उपयोग दिल्ली और राजस्थान को किया जाना है। इसके बदले दोनों राज्यों की ओर से बिजली घटक की लागत वहन करने की व्यवस्था की गई है।किशाऊ परियोजना को लेकर करीब 17 वर्षों से प्रक्रिया चल रही है। विभिन्न कारणों से यह परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। राज्यों के बीच पानी के बंटवारे, बिजली उत्पादन और लागत वहन करने को लेकर सहमति बनना जरूरी था। जून में हुई बैठक के बाद इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। अब समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने से परियोजना के निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रियाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी लाभ मिलने की संभावना है। बांध के निर्माण से जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी और बिजली उत्पादन किया जा सकेगा। विभिन्न राज्यों को पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था के साथ परियोजना का उद्देश्य क्षेत्रीय जल संसाधनों का उपयोग करना है। हिमाचल के लिए मुफ्त बिजली और वार्षिक आय का प्रावधान समझौते का प्रमुख हिस्सा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जल संपदा का उपयोग प्रदेश के हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने बातचीत के दौरान राज्य के हितों को प्रमुखता से रखा और इसी के परिणामस्वरूप समझौते में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, परियोजना से मिलने वाली मुफ्त बिजली और वार्षिक आय हिमाचल के लिए आर्थिक लाभ का आधार बनेगी। नई व्यवस्था में केंद्र सरकार की ओर से जल घटक की 90 फीसदी लागत वहन किए जाने से परियोजना के वित्तीय ढांचे में बदलाव आया है। शेष 10 फीसदी राशि छह राज्यों के बीच साझा होगी। वहीं, हिमाचल के हिस्से के करीब 2000 करोड़ रुपये का खर्च दिल्ली और राजस्थान द्वारा वहन किए जाने की बात कही गई है। इस व्यवस्था का आधार यह है कि हिमाचल के हिस्से का पानी इन दोनों राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।
किशाऊ बांध परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाना प्रस्तावित है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को पूरा करने के लिए अब समझौते के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परियोजना के निर्माण से जुड़े विभिन्न तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं पर संबंधित राज्यों और केंद्र सरकार के स्तर पर काम होगा। मंगलवार को नई दिल्ली में हुए समझौते के बाद छह राज्यों के बीच वर्षों से लंबित बातचीत का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इसे प्रदेश के हितों की रक्षा से जुड़ी उपलब्धि बताया है। मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार, समझौते से हिमाचल को मुफ्त बिजली, वार्षिक आय और लागत वहन की नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा। अब परियोजना के निर्माण और आगे की स्वीकृतियों से जुड़ी प्रक्रियाओं पर नजर रहेगी।


















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