चीनी की कीमतों में तेजी के बीच बड़ा सवाल, त्योहारों तक कैसे पूरी होगी मांग? विदेश से आयात पर टिकी नजर

चीनी की मिठास इन दिनों आम लोगों की जेब पर भारी पड़ती नजर आ रही है। घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल देश में उपलब्ध स्टॉक और आने वाले महीनों में इसकी आपूर्ति को लेकर है। सितंबर के अंत तक मौजूदा चीनी सत्र समाप्त होने वाला है और इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के कारण चीनी की मांग में तेजी आने की संभावना है। ऐसे समय में घरेलू स्टॉक सीमित रहने का अनुमान चिंता बढ़ा रहा है। यही वजह है कि सरकार ने करीब एक दशक बाद चीनी के आयात का रास्ता खोला है। सरकार ने त्योहारों के दौरान घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। हालांकि, आयातित चीनी के भारत पहुंचने में लगने वाला समय बाजार के लिए चुनौती बना हुआ है। खासकर ब्राजील से आने वाली चीनी की खेप को भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने में ही करीब 40 से 45 दिन लग सकते हैं। इसके बाद बंदरगाहों से चीनी मिलों और बाजार तक इसे पहुंचाने में भी अतिरिक्त समय लगेगा।

ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या आयातित चीनी त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए समय पर भारतीय बाजार में उपलब्ध हो पाएगी। उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, इस समय उपलब्ध स्टॉक और आने वाले दिनों की मांग के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि 30 सितंबर को मौजूदा चीनी सत्र खत्म होने तक देश में करीब 30 से 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बच सकता है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि यह मात्रा सामान्य घरेलू मांग के मुकाबले कम मानी जा रही है। खासतौर पर तब, जब नए चीनी सत्र की शुरुआत के शुरुआती दो महीनों में खपत बढ़ने की संभावना है।

अक्टूबर और नवंबर का समय चीनी कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इन महीनों में देश में लगातार कई बड़े त्योहार आते हैं। नवरात्रि से शुरू होने वाला त्योहारों का सिलसिला दशहरा और दीपावली तक चलता है। इन अवसरों पर मिठाइयों, बेकरी उत्पादों, पेय पदार्थों और अन्य खाद्य वस्तुओं में चीनी की खपत बढ़ जाती है। मिठाई कारोबार से लेकर घरों में बनने वाले पारंपरिक पकवानों तक, चीनी की मांग में सामान्य दिनों की तुलना में तेजी देखी जाती है। यही कारण है कि उद्योग को आशंका है कि यदि सितंबर के अंत में स्टॉक अपेक्षा से कम रहा और अक्टूबर-नवंबर में मांग तेजी से बढ़ी, तो घरेलू बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ सकता है। सरकार की ओर से शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति इसी संभावित कमी को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के अनुसार, 1 अगस्त तक देश में करीब साढ़े तीन महीने की जरूरत के बराबर चीनी का स्टॉक उपलब्ध था। हालांकि, सितंबर और अक्टूबर में त्योहारों के कारण मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार ने 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है।

भारत को चीनी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए ब्राजील से आयात का सहारा लेना पड़ रहा 

भारत को चीनी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए ब्राजील से आयात का सहारा लेना पड़ रहा है। ब्राजील दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। वहां से भारतीय बंदरगाहों तक चीनी की खेप पहुंचने में सामान्य तौर पर 40 से 45 दिन लगते हैं। समुद्री परिवहन के बाद बंदरगाह पर उतराई, कस्टम और अन्य प्रक्रियाओं में समय लग सकता है। इसके बाद चीनी को संबंधित मिलों और प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाना भी जरूरी होगा। यानी आयात की अनुमति मिलने के बाद भी बाजार में तुरंत विदेशी चीनी उपलब्ध नहीं हो सकती। यही वजह है कि आने वाले कुछ सप्ताह घरेलू बाजार के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। यदि आयातित खेप समय पर पहुंचती है और उसे तेजी से बाजार में उतारा जाता है, तो त्योहारों के दौरान संभावित कमी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि 15 अक्टूबर से पहले घरेलू बाजार में आयातित चीनी की उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, वास्तविक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि आयात की गई चीनी की खेप कब रवाना होती है, किस बंदरगाह पर पहुंचती है और वहां से आगे इसकी आपूर्ति कितनी तेजी से होती है।

फिलहाल यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि भारत में आयात के जरिए कुल कितनी चीनी उपलब्ध होगी। सरकार ने 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात की अनुमति जरूर दी है, लेकिन बाजार में वास्तविक उपलब्धता आयात की गति और लॉजिस्टिक व्यवस्था पर निर्भर करेगी। चीनी की कीमतों में तेजी का असर सीधे तौर पर उपभोक्ताओं पर पड़ता है। घरों में इस्तेमाल होने वाली चीनी के अलावा मिठाई, बिस्कुट, पेय पदार्थ और कई अन्य खाद्य उत्पादों की लागत भी इससे प्रभावित होती है। इसलिए त्योहारों से पहले चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण है।

इस पूरे घटनाक्रम में सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे घरेलू चीनी उद्योग और किसानों के हितों का ध्यान रखना है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं के लिए चीनी की कीमतों और उपलब्धता को नियंत्रण में रखना भी जरूरी है। यदि घरेलू स्टॉक तेजी से घटता है और आयातित चीनी समय पर नहीं पहुंचती, तो त्योहारों के मौसम में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल उद्योग और सरकार दोनों की नजर सितंबर के अंत में बचने वाले स्टॉक, अक्टूबर-नवंबर की मांग और ब्राजील से आने वाली खेप की समयबद्ध उपलब्धता पर टिकी है। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि भारत में चीनी की संभावित कमी कितनी गंभीर होगी और शुल्क-मुक्त आयात बाजार को कितनी राहत दे पाएगा। त्योहारों के मौसम में मिठास बनाए रखने के लिए पर्याप्त आपूर्ति सबसे अहम कड़ी साबित होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *