उत्तराखंड के पीपलकोटी टनल हादसा : 7 श्रमिकों की मौत, 3 अब भी फंसे, 15 घंटे से जारी रेस्क्यू, खुद सुरंग में पहुंचे सीएम धामी

उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में निर्माणाधीन टनल में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। गुरुवार शाम करीब सात बजे मायापुर क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में अचानक पानी का रिसाव और भू-स्खलन होने से वहां काम कर रहे कई श्रमिक अंदर फंस गए। हादसे के बाद से ही राहत एवं बचाव एजेंसियां युद्धस्तर पर अभियान चला रही हैं। अब तक सात श्रमिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि तीन लोग अभी भी सुरंग के भीतर फंसे हुए हैं। बचाव दल ने 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। जानकारी के अनुसार, हादसे के समय टनल के भीतर कुल 22 लोग काम कर रहे थे। अचानक पानी और भारी मात्रा में मलबा सुरंग में घुस आने से श्रमिकों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। देखते ही देखते सुरंग के कई हिस्सों में पानी और मलबा भर गया, जिससे अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना की टीमें मौके पर पहुंच गईं और रातभर राहत एवं बचाव कार्य जारी रखा गया।

शुक्रवार सुबह तक चले अभियान में कई श्रमिकों को बाहर निकाला गया, लेकिन सात लोगों को बचाया नहीं जा सका। वहीं तीन श्रमिकों के अभी भी सुरंग के भीतर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल लगातार मलबा हटाने और सुरंग के भीतर सुरक्षित रास्ता बनाने में जुटा हुआ है, ताकि फंसे हुए लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके। हादसे में घायल हुए लोगों में से 13 का इलाज गोपेश्वर जिला अस्पताल में चल रहा है। इनमें कुछ की हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बेहतर उपचार के लिए श्रीनगर के उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया है। चिकित्सकों की टीम घायलों की लगातार निगरानी कर रही है।

टनल के भीतर जमा पानी और मलबे के कारण राहत कार्यों में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बचाव दल को कई बार रुक-रुककर अभियान चलाना पड़ रहा है, ताकि किसी और दुर्घटना की आशंका न बने। अधिकारियों का कहना है कि सुरंग के भीतर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं पीपलकोटी पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने सुरंग के अंदर जाकर बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में जुटी टीमों से बातचीत कर अभियान की प्रगति की जानकारी भी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता सुरंग में फंसे प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना है। उन्होंने बताया कि हादसे के समय कुल 22 लोगों के काम करने की सूचना थी, जिनमें से 19 लोगों तक रेस्क्यू टीमें पहुंच चुकी हैं। कुछ लोगों की मौत हुई है और कई घायलों का इलाज चल रहा है, जबकि तीन लोगों के अब भी अंदर फंसे होने की सूचना है। उन्होंने कहा कि सरकार हर स्तर पर स्थिति की निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

युद्धस्तर पर चल रहा बचाव अभियान, सेना समेत कई एजेंसियां मौके पर तैनात

टनल हादसे के बाद पूरे क्षेत्र को राहत एवं बचाव अभियान का केंद्र बना दिया गया है। जिलाधिकारी गौरव कुमार स्वयं अभियान की निगरानी कर रहे हैं। मौके पर 22 पुलिसकर्मी, एनडीआरएफ के 27 जवान, एसडीआरएफ के 42 सदस्य, डीआरएफ के चार कर्मी और फायर सर्विस के नौ जवान तैनात हैं। इसके अलावा सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें गौचर और जोशीमठ से भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी हैं।

बचाव एजेंसियां आधुनिक उपकरणों की मदद से सुरंग के भीतर रास्ता बनाने और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लोगों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता। केंद्र सरकार की ओर से भी राज्य सरकार को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने बाद में गोपेश्वर जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात करने और उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने का कार्यक्रम भी तय किया है। पूरे प्रदेश की निगाहें अब रेस्क्यू अभियान पर टिकी हुई हैं और हर कोई सुरंग में फंसे शेष श्रमिकों के सकुशल बाहर आने की प्रार्थना कर रहा है।

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