उत्तराखंड में मतदाता सूची को निष्पक्ष, सटीक और त्रुटिरहित बनाने की मुहिम तेज

उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बीच मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने की कवायद तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन विभाग लगातार मतदाता सूची में दर्ज विसंगतियों, दोहरे नाम, स्थान परिवर्तन और अन्य त्रुटियों को दूर करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। इसी क्रम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने गुरुवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में प्रेस वार्ता कर अभियान की प्रगति और अब तक की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी। राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्माया हुआ है। कांग्रेस जहां कुछ मामलों में मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए यह अभियान आवश्यक है। दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी भी देखने को मिल रही है। हालांकि निर्वाचन विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप और निष्पक्ष तरीके से संचालित की जा रही है। 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत राज्यभर में चिन्हित मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का सत्यापन करना तथा आवश्यक होने पर संशोधन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि राज्य में कुल 24 लाख 30 हजार से अधिक मतदाताओं के संबंध में नोटिस जारी किए जाने थे, जिनमें से अब तक 20 लाख 27 हजार से अधिक नोटिस संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं। शेष नोटिस भी तेजी से वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन विभाग का लक्ष्य केवल नोटिस जारी करना नहीं, बल्कि प्रत्येक मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से गलत तरीके से न हटे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न रह जाए। 

इसके लिए जिला और विधानसभा स्तर पर अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार 14 जुलाई से 5 अगस्त तक दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। इस अवधि में फार्म-6 के तहत नए मतदाता पंजीकरण अथवा नाम जोड़ने के लिए 57 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। वहीं फार्म-7 के माध्यम से नाम हटाने अथवा आपत्ति दर्ज कराने के 22 हजार 668 आवेदन मिले हैं। इसके अलावा फार्म-8 के तहत मतदाता विवरण में संशोधन के लिए 26 हजार 145 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मात्र बीस दिनों के भीतर प्राप्त इन आवेदनों को देखते हुए स्पष्ट है कि मतदाता सूची को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है और बड़ी संख्या में नागरिक अपनी जानकारी को अद्यतन कराने में रुचि दिखा रहे हैं। निर्वाचन विभाग का कहना है कि सभी प्राप्त आवेदनों की नियमानुसार जांच की जा रही है और किसी भी आवेदन पर निर्णय लेने से पहले संबंधित दस्तावेजों तथा तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा।

बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं को मिलेगी विशेष सुविधा

प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन विभाग का सबसे बड़ा उद्देश्य मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के मामलों में अधिकारियों की टीम सीधे उनके घर पहुंचकर नोटिसों की सुनवाई करेगी। उन्होंने कहा कि कई बार बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाताओं को सुनवाई के लिए बूथ या कार्यालय तक पहुंचने में कठिनाई होती है। ऐसे में यदि किसी मतदाता को विसंगति संबंधी नोटिस जारी किया गया है तो अधिकारियों को उनके घर जाकर आवश्यक जानकारी प्राप्त करने और दस्तावेजों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। 

इससे वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को राहत मिलेगी तथा उनकी मतदान संबंधी पात्रता पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि सभी जिलों में निर्वाचन अधिकारियों द्वारा लगातार फील्ड विजिट की जा रही हैं। नोटिसों की सुनवाई के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मतदाताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो और उन्हें पूरी प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी दी जाए। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी मामले में जल्दबाजी में निर्णय न लिया जाए और प्रत्येक प्रकरण का तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निस्तारण किया जाए। उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों से भी लगातार संवाद बनाए रखा गया है। विधानसभा स्तर पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, जिला स्तर पर जिला निर्वाचन अधिकारियों तथा राज्य स्तर पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से सुझाव और फीडबैक प्राप्त किए जा रहे हैं ताकि प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बन सके। 

निर्वाचन विभाग का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना बेहद आवश्यक है। यही कारण है कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को राज्यभर में प्राथमिकता के साथ चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य किसी भी मतदाता को परेशान करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को वास्तविक और सटीक बनाना है ताकि भविष्य में होने वाले चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से संपन्न कराए जा सकें। प्रेस वार्ता में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे तथा सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अभियान के दौरान प्राप्त सभी दावों, आपत्तियों और नोटिसों का नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा तथा किसी भी पात्र मतदाता के अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

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