भगवान शिव को समर्पित सावन माह के पहले सोमवार पर देशभर के प्रमुख शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही मंदिरों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं। शिवभक्तों ने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। काशी विश्वनाथ, बाबा बैद्यनाथ धाम, महाकालेश्वर, केदारनाथ, ओंकारेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, सोमनाथ, भीमाशंकर, नागेश्वर, रामेश्वरम, मल्लिकार्जुन और घृष्णेश्वर सहित देश के अनेक प्रसिद्ध शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ जुटी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने और श्रद्धा-भाव से शिवपूजन करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के दुख और संकट दूर होते हैं। इस वर्ष सावन के पहले सोमवार पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन की पूजा और अधिक फलदायी मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सुबह मंगला आरती के साथ ही श्रद्धालुओं का प्रवेश शुरू हो गया। मंदिर परिसर को फूलों और आकर्षक सजावट से भव्य रूप दिया गया था। हजारों श्रद्धालु गंगा जल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचे। मंदिर के कपाट खुलने के बाद भक्तों ने सबसे पहले मंगला आरती में भाग लिया और फिर दर्शन-पूजन किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों और मंदिर प्रबंधन ने कांवड़ियों तथा भक्तों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। पूरे मंदिर परिसर में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस पवित्र धाम में लाखों श्रद्धालु जलार्पण के लिए पहुंचे। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करने वाले कांवड़ियों की लंबी कतारें मंदिर परिसर तक दिखाई दीं। श्रद्धालु कई किलोमीटर पैदल चलकर बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित कर रहे हैं। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। बिहार के बांका जिले में स्थित बाबा ज्येष्ठ गौरनाथ महादेव मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।
मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालु रात दो बजे से ही कतार में लग गए थे। स्थानीय प्रशासन के अनुसार दिनभर में लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। सावन के इस विशेष अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचे। मौसम की चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं दिखाई दिया। मंदिर परिसर में सुबह से ही दर्शन और पूजा का क्रम जारी रहा।
महाकाल की सवारी, कांवड़ यात्रा और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष नजर
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी सावन सोमवार का विशेष उत्साह देखने को मिला। भस्म आरती से दिन की शुरुआत हुई और हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। सावन मास में निकलने वाली बाबा महाकाल की पारंपरिक सवारी को लेकर भी भक्तों में विशेष उत्साह है। इस बार सवारी नए निर्धारित मार्ग से निकाली जा रही है। शाम चार बजे से शुरू होने वाली सवारी के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। मार्ग पर सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विशेष प्रबंध किए गए हैं। देश के अन्य प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। गुजरात के सोमनाथ और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर और घृष्णेश्वर, आंध्र प्रदेश के मल्लिकार्जुन, तमिलनाडु के रामेश्वरम तथा मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में हजारों भक्तों ने जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिरों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।
इस बीच कांवड़ यात्रा को देखते हुए कई राज्यों में विशेष व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में कांवड़ियों की बढ़ती संख्या और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 3 अगस्त से 10 अगस्त तक सभी स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही में सुविधा होगी और यातायात दबाव कम रहेगा। कांवड़ मार्गों पर सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती भी की गई है।
सावन सोमवार के अवसर पर देशभर में धार्मिक उत्साह अपने चरम पर दिखाई दिया। मंदिरों में घंटों और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना में लीन नजर आए। अनेक स्थानों पर भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक, भंडारे और धार्मिक आयोजनों का भी आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन के सोमवार को सच्ची श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का मार्ग प्रशस्त करती है। यही कारण है कि हर वर्ष सावन के प्रत्येक सोमवार को देश के प्रमुख शिवालयों में आस्था का ऐसा विराट स्वरूप देखने को मिलता है।
















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