कॉमनवेल्थ खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। शनिवार को भारत ने मुक्केबाजी और एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन करते हुए अपने पदकों की संख्या में और इजाफा किया। महिला मुक्केबाज जैस्मिन लांबोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकाएला वॉल्स को हराकर भारत को सातवां स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने कनाडा की सवाना डोलमागो को मात देकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इन दोनों उपलब्धियों के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 27 पहुंच गई है, जिसमें सात स्वर्ण पदक शामिल हैं। शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत पदक तालिका में छठे स्थान पर पहुंच गया है। भारतीय दल के लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि मुक्केबाजी में देश का दबदबा लगातार बना हुआ है। जैस्मिन लांबोरिया ने पूरे मुकाबले के दौरान आक्रामक खेल दिखाया और अपने अनुभव का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए निर्णायक बढ़त हासिल की। उनकी जीत ने भारतीय खेमे में उत्साह का संचार कर दिया। दूसरी ओर, प्रीति पवार ने भी फाइनल में शानदार तकनीक और संयम का प्रदर्शन करते हुए कनाडाई प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ दिया।
हरियाणा की रहने वाली प्रीति पवार भारतीय महिला मुक्केबाजी का उभरता हुआ नाम हैं। उन्होंने इससे पहले 2022 एशियाई चैंपियनशिप और 2023 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था। वर्ष 2024 के पेरिस ओलिंपिक में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद उनके प्रदर्शन में लगातार निखार देखने को मिला। 2026 एशियाई चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया था, जबकि 2025 विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल में भी वह स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी हैं। वर्तमान में उनकी ट्रेनिंग पटियाला स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनएस-एनआईएस) में होती है।
भारत के लिए शनिवार का दिन और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आठ भारतीय मुक्केबाज अपने-अपने वर्गों के फाइनल मुकाबलों में स्वर्ण पदक के लिए चुनौती पेश करने वाले हैं।
पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग में जदुमणि सिंह, महिला 51 किलोग्राम वर्ग में साक्षी चौधरी, महिला 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घंघास, महिला 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी, महिला 75 किलोग्राम वर्ग में लवलीना बोरगोहेन, पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच, पुरुष 80 किलोग्राम वर्ग में अंकुश पंघाल और पुरुष 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग में नरेंद्र बरवाल स्वर्ण पदक के लिए रिंग में उतरेंगे। भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए देश को कई और स्वर्ण पदकों की उम्मीद है। खासकर विश्व चैंपियन रह चुकी लवलीना बोरगोहेन पर सभी की नजरें टिकी हैं। उनके अनुभव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हासिल उपलब्धियों को देखते हुए उनसे स्वर्ण पदक की बड़ी उम्मीद की जा रही है।
ट्रिपल जंप में भी चमका भारत, एथलेटिक्स में बढ़ी पदकों की चमक
मुक्केबाजी के अलावा एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुष ट्रिपल जंप स्पर्धा में भारत ने एक साथ दो पदक जीतकर अपनी ताकत का परिचय दिया। प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। वहीं, भारत के ही सेल्वा प्रभु ने 16.52 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक हासिल किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जाम्बिया के जॉर्डन स्कॉट ने जीता। उन्होंने 16.72 मीटर की छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया। हालांकि भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे मुकाबले में कड़ा संघर्ष किया और देश के लिए दो महत्वपूर्ण पदक सुनिश्चित किए। ट्रिपल जंप में यह सफलता भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
कॉमनवेल्थ खेलों में शनिवार का दिन भारत के लिए बेहद व्यस्त रहने वाला है। मुक्केबाजी और एथलेटिक्स के अलावा भारतीय खिलाड़ी पैरा एथलेटिक्स, जूडो, ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बॉल्स में भी पदक की चुनौती पेश करेंगे। दिनभर में कुल 44 स्वर्ण पदक स्पर्धाओं के फाइनल आयोजित होने हैं। इनमें एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स के 19 फाइनल, मुक्केबाजी के 14 फाइनल, ट्रैक और पैरा ट्रैक साइक्लिंग के छह फाइनल तथा जूडो के पांच फाइनल शामिल हैं।
भारतीय दल की नजर अब पदक तालिका में और ऊपर पहुंचने पर है। जिस तरह मुक्केबाजों ने अब तक प्रदर्शन किया है और एथलेटिक्स में भी पदक मिलने शुरू हुए हैं, उससे उम्मीद की जा रही है कि भारत आने वाले घंटों में कई और पदक अपने खाते में जोड़ सकता है। यदि फाइनल में पहुंचे भारतीय मुक्केबाज स्वर्ण जीतने में सफल रहते हैं तो भारत की पदक स्थिति और मजबूत होगी। फिलहाल सात स्वर्ण सहित 27 पदकों के साथ भारतीय दल शानदार लय में नजर आ रहा है और खेल प्रेमियों की उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

















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