देश में जन्म प्रमाण पत्र बनेगा सबसे अहम दस्तावेज, संसद से पारित हुआ “जन्म-मृत्यु” पंजीकरण संशोधन विधेयक 

संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित करा लिया। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पेश किया, जिसके बाद विपक्षी सदस्यों के विरोध और शोर-शराबे के बीच इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई। विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी, क्योंकि सदन में लगातार हंगामे की स्थिति बनी रही। मोदी सरकार का कहना है कि यह संशोधन देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नए कानून के लागू होने के बाद जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से संचालित होंगे और देशभर के पंजीकरण तंत्र को एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाएगा।

इस विधेयक का सबसे बड़ा उद्देश्य जन्म और मृत्यु से संबंधित आंकड़ों को अधिक सटीक, सुरक्षित और सुलभ बनाना है। वर्तमान में विभिन्न राज्यों और स्थानीय निकायों के स्तर पर रिकॉर्ड अलग-अलग स्वरूप में उपलब्ध हैं, जिसके कारण कई बार जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई आती है। नई व्यवस्था के तहत देश के किसी भी हिस्से में दर्ज जन्म या मृत्यु की जानकारी एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे नागरिकों को दस्तावेज प्राप्त करने में आसानी होगी और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान भी तेज होगा। साथ ही रिकॉर्ड में त्रुटियों और दोहराव की संभावना कम होगी। डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद पंजीकरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनने की उम्मीद है।

नए प्रावधानों के तहत जन्म प्रमाण पत्र का महत्व भी काफी बढ़ जाएगा। सरकार की योजना है कि जन्म प्रमाण पत्र को नागरिकों की पहचान और आयु से संबंधित प्रमुख दस्तावेज के रूप में अधिक व्यापक उपयोग में लाया जाए। भविष्य में विभिन्न सरकारी सेवाओं, योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में जन्म प्रमाण पत्र की भूमिका और मजबूत हो सकती है। देश में फर्जी पहचान पत्र, गलत आयु प्रमाण और दस्तावेजों में हेरफेर जैसी समस्याओं को रोकने में यह व्यवस्था मददगार साबित हो सकती है। यदि जन्म का रिकॉर्ड प्रारंभ से ही डिजिटल और सत्यापित रूप में उपलब्ध रहेगा तो बाद में किसी भी प्रकार की दस्तावेजी गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी।

सरकार का यह भी कहना है कि एकीकृत डिजिटल डेटाबेस बनने से जनसंख्या संबंधी आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी। इससे नीति निर्माण, स्वास्थ्य योजनाओं, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए अधिक विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। जन्म और मृत्यु से संबंधित जानकारी का रियल टाइम रिकॉर्ड तैयार होने से प्रशासनिक निर्णय लेने में भी सुविधा मिलेगी। नए कानून के तहत डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग विभिन्न सरकारी संस्थाओं द्वारा आवश्यकतानुसार किया जा सकेगा। इससे नागरिकों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों में दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम हो सकती है। कई सेवाओं में डेटा का सत्यापन सीधे डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से किया जा सकेगा, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।

केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जुड़ेगा पूरा देश, फर्जी दस्तावेजों पर लगेगी लगाम

केंद्र सरकार का दावा है कि संशोधित कानून के लागू होने के बाद जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। देशभर के राज्यों, नगर निकायों, पंचायतों और अन्य पंजीकरण इकाइयों को एक साझा डिजिटल मंच से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इससे रिकॉर्ड का रखरखाव अधिक व्यवस्थित होगा और नागरिकों को कहीं से भी जानकारी प्राप्त करने की सुविधा मिल सकेगी। विशेष रूप से जन्म प्रमाण पत्र को लेकर सरकार की सोच यह है कि यह दस्तावेज नागरिक जीवन की शुरुआत से ही एक विश्वसनीय पहचान का आधार बने। एक प्रमाणित और डिजिटल रूप से सत्यापित जन्म रिकॉर्ड भविष्य में विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं के लिए आधारभूत दस्तावेज के रूप में उपयोगी साबित हो सकता है। डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली का एक बड़ा लाभ यह भी होगा कि दस्तावेजों के खो जाने या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में नागरिकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहने से प्रमाण पत्रों की प्रतियां आसानी से प्राप्त की जा सकेंगी। साथ ही फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की संभावना भी कम होगी।

हालांकि विपक्ष ने विधेयक को बिना पर्याप्त चर्चा के पारित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक बहस होनी चाहिए थी ताकि इसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जा सके। लेकिन सदन में लगातार जारी हंगामे के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। उधर संसद के मानसून सत्र का दसवां दिन भी विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में कई मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। लगातार व्यवधान के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अब 3 अगस्त को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में सुधार के लिए यह कानून एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले समय में इसके माध्यम से देश में नागरिक रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जा सकेगा, जबकि फर्जी दस्तावेजों और पहचान संबंधी अनियमितताओं पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

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