हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट को लेकर भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है। बुधवार को शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी संपत्ति को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कोई नई संपत्ति नहीं खरीदी है और उनकी सभी चल-अचल संपत्तियों का विवरण पहले ही चुनावी शपथपत्र के माध्यम से सार्वजनिक किया जा चुका है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि एडीआर रिपोर्ट के आधार पर जिस तरह के दावे किए जा रहे हैं, वे वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि उनकी संपत्ति में बढ़ोतरी को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, उन्हें तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस भूमि का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है, वह उन्होंने कई वर्ष पहले खरीदी थी। समय के साथ उस जमीन के बाजार मूल्य में स्वाभाविक रूप से वृद्धि हुई है और उसी भूमि पर मकान बनने के कारण उसकी कीमत और बढ़ी है। ऐसे में संपत्ति के मूल्यांकन में वृद्धि को नई संपत्ति खरीदने के रूप में प्रस्तुत करना पूरी तरह भ्रामक है।
सुक्खू ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता उनकी प्राथमिकता रही है। वह पिछले लगभग चार दशकों से अपनी संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करते आ रहे हैं। राजनीति में आने के बाद से उन्होंने अपनी आय और संपत्ति से जुड़ी जानकारियां लगातार चुनावी हलफनामों में दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि उनकी संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और किसी भी व्यक्ति या संस्था को उसे देखने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए एडीआर रिपोर्ट का सहारा लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता को गुमराह करने के बजाय विपक्ष को तथ्यों के आधार पर राजनीति करनी चाहिए। यदि किसी को उनकी संपत्ति को लेकर किसी प्रकार का संदेह है तो वह जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या कोई अन्य सक्षम एजेंसी उनकी संपत्ति की जांच कर सकती है।
मेहनत और ईमानदारी से कमाई है संपत्ति : मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा ईमानदारी और पारदर्शिता को महत्व दिया है। उनकी संपत्ति मेहनत और वैध आय का परिणाम है। इसलिए उन्हें किसी भी जांच या पड़ताल का कोई डर नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए और उसके बाद ही सार्वजनिक बयान देने चाहिए। सुक्खू ने एडीआर की रिपोर्ट की विश्वसनीयता और सटीकता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार करते समय कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, रिपोर्ट में उनकी शैक्षणिक योग्यता तक का सही उल्लेख नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि वह स्नातकोत्तर (एमए) और विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री रखते हैं, लेकिन रिपोर्ट में इन योग्यताओं का समुचित उल्लेख नहीं किया गया। जबकि यह जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड और चुनावी दस्तावेजों में पहले से उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी रिपोर्ट में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बुनियादी जानकारी भी सही ढंग से शामिल नहीं की जाती, तो उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि किसी भी रिपोर्ट को जारी करने से पहले तथ्यों का गंभीरता से सत्यापन किया जाना चाहिए ताकि जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
गौरतलब है कि एडीआर की रिपोर्ट सामने आने के बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भाजपा जहां रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री से जवाब मांग रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित अभियान बता रही है। इस बीच मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ कर दिया है कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और यदि आवश्यकता पड़ी तो वह किसी भी स्तर की जांच का सामना करने को तैयार हैं। राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है, लेकिन मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वह अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का खुलकर जवाब देने के मूड में हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

















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