मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव, अमेरिका का होर्मुज हमलों के जवाब में ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर बड़ा हमला 

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर कथित ईरानी हमलों के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के 80 से अधिक रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सुरक्षा बलों की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब क्षेत्र पहले से ही अस्थिर स्थिति से गुजर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहा है। अमेरिका का कहना है कि यह अभियान अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से चलाया गया। दूसरी ओर, तेहरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी जारी की है। इस घटनाक्रम ने न केवल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात को लेकर आशंकाएं भी बढ़ा दी हैं। यदि दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। 

ऐसे समय में जब क्षेत्र में शांति बनाए रखने के प्रयास जारी थे, यह सैन्य कार्रवाई नई चुनौतियां खड़ी करती दिखाई दे रही है। अमेरिकी मध्य कमान (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी आधिकारिक जानकारी में बताया कि 7 जुलाई को ईरान के खिलाफ नए चरण के आक्रामक सैन्य अभियान को पूरा किया गया। सेंटकॉम के अनुसार, इस अभियान के दौरान सटीक निर्देशित हथियारों का इस्तेमाल करते हुए 80 से अधिक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि कार्रवाई पूरी तरह योजनाबद्ध थी और इसमें केवल उन ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया, जिनका संबंध ईरान की सैन्य गतिविधियों और समुद्री हमलों से था। 

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार स्टेशन, जहाज-रोधी मिसाइल प्रणाली तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की 60 से अधिक छोटी नौकाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका का आरोप है कि इन नौकाओं और सैन्य ठिकानों का उपयोग होर्मुज जलडमरूमध्य में गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ हमलों और समुद्री गतिविधियों को बाधित करने के लिए किया जा रहा था। सेंटकॉम ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अमेरिकी सेना ने चेतावनी दी कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को खतरा पहुंचाया गया तो भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।

हमलों के बाद प्रतिबंध और अंतिम संस्कार के बीच बढ़ा तनाव

सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा दिया है। वॉशिंगटन ने तेहरान के खिलाफ नए प्रतिबंध लागू करते हुए 17 जून को हुए अंतरिम शांति समझौते के तहत ईरानी तेल बिक्री को मिली छूट तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जहाजों पर हुए हमलों का हवाला देते हुए ईरानी तेल निर्यात पर दोबारा कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। अमेरिका का कहना है कि जब तक ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करता और हमलों जैसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाता, तब तक उस पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव जारी रहेगा। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी कदमों की तीखी आलोचना करते हुए इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन बताया है। तेहरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने तेल बिक्री संबंधी लाइसेंस रद्द कर समझौता ज्ञापन (एमओयू) की शर्तों का उल्लंघन किया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा तथा अमेरिकी कार्रवाई का उचित समय पर जवाब दिया जाएगा। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ईरान अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा हुआ है। शोक अवधि के दौरान पहले ही संभावित हमलों को लेकर चेतावनी जारी की गई थी। 

खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक के पवित्र शहर नजफ ले जाया गया था, जहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी नजफ में मौजूद थे, लेकिन अमेरिकी हमलों की सूचना मिलते ही उन्होंने अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर तत्काल तेहरान लौटने का फैसला किया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों के अनुसार, राष्ट्रपति बुधवार तड़के नजफ से रवाना होकर स्वदेश पहुंचे, ताकि सुरक्षा और आपात स्थिति की समीक्षा की जा सके। खामेनेई का अंतिम संस्कार गुरुवार को मशहद में प्रस्तावित है। रवाना होने से पहले राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने इराकी सरकार और वहां की जनता का श्रद्धांजलि समारोह की मेजबानी के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ईरान और इराक के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध बेहद गहरे हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग भविष्य में भी जारी रहेगा। 

 ताजा सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में चल रहे शांति प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी ईरान के सिरिक, केशम और बंदर अब्बास क्षेत्रों में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, हालांकि नुकसान का आधिकारिक विवरण अभी सामने नहीं आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो नेताओं के साथ अंकारा में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। बैठक में समुद्री व्यापार की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। फिलहाल पूरे पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और ईरान आने वाले दिनों में अपने अगले कदम क्या उठाते हैं और क्या बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की कोई नई संभावना निकलती है।

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