देश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और यातायात नियमों की अनदेखी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ऐसे नए प्रावधानों पर काम कर रहा है, जिनका उद्देश्य केवल लाइसेंस जारी करना या उसका नवीनीकरण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सड़क पर वाहन चलाने वाला व्यक्ति जिम्मेदार और सुरक्षित चालक हो। अब तक ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया माना जाता था, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद यह चालक के पूरे ट्रैफिक रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई चालक बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, ओवरस्पीडिंग करता है, रेड लाइट जंप करता है, खतरनाक तरीके से वाहन चलाता है या अन्य गंभीर यातायात अपराधों में बार-बार पकड़ा जाता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण सीधे नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ सकता है।
सरकार का मानना है कि केवल जुर्माना बढ़ाने से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती, बल्कि वाहन चालकों के व्यवहार में सुधार लाना भी उतना ही जरूरी है। भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश हादसों की वजह तेज रफ्तार, लापरवाही, गलत दिशा में वाहन चलाना, मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी है। ऐसे में सरकार अब दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ जवाबदेही तय करने वाली व्यवस्था विकसित करना चाहती है, ताकि लगातार नियम तोड़ने वाले चालकों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
प्रस्तावित बदलावों के अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस को डिजिटल ट्रैफिक वायलेशन डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। इससे देशभर में किसी भी चालक द्वारा किए गए ट्रैफिक उल्लंघनों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। यानी यदि कोई व्यक्ति अलग-अलग राज्यों या शहरों में भी नियम तोड़ता है, तो उसका पूरा इतिहास एकीकृत डिजिटल प्रणाली में दर्ज होगा। इससे लाइसेंस नवीनीकरण के समय अधिकारियों को चालक के व्यवहार का सही आकलन करने में आसानी होगी।
नई व्यवस्था में ट्रैफिक उल्लंघनों के आधार पर चालक के रिकॉर्ड में नेगेटिव पॉइंट्स दर्ज किए जाने की भी योजना है। हर गंभीर नियम उल्लंघन पर निर्धारित संख्या में अंक जुड़ेंगे। यदि किसी चालक के खाते में तय सीमा से अधिक नेगेटिव पॉइंट्स हो जाते हैं, तो उसका लाइसेंस रिन्यू करने से पहले उसे दोबारा ड्राइविंग टेस्ट पास करना अनिवार्य किया जा सकता है। इस टेस्ट के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित व्यक्ति सुरक्षित तरीके से वाहन चलाने के योग्य है या नहीं। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से लोगों में ट्रैफिक नियमों का पालन करने की मानसिकता विकसित होगी। अभी तक कई वाहन चालक चालान भरने के बाद दोबारा उसी तरह की लापरवाही करते रहते हैं, क्योंकि उन्हें यह महसूस नहीं होता कि इसका उनके ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कोई असर पड़ेगा। लेकिन यदि नियमों के उल्लंघन का सीधा प्रभाव लाइसेंस के नवीनीकरण पर पड़ेगा, तो लोग अधिक सतर्क होकर वाहन चलाने के लिए प्रेरित होंगे।
डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही, सड़क सुरक्षा को मिलेगा नया आधार
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत प्रस्तावित इन बदलावों का सबसे बड़ा उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है। सरकार का फोकस अब केवल लाइसेंस जारी करने या नवीनीकरण की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि चालक ने लाइसेंस मिलने के बाद सड़क पर कितना जिम्मेदार व्यवहार किया है। यानी ड्राइविंग लाइसेंस अब केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि चालक की सड़क पर जिम्मेदारी का रिकॉर्ड भी माना जाएगा। डिजिटल ट्रैफिक वायलेशन सिस्टम लागू होने के बाद ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे नियम तोड़ने वाले चालकों की जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी और बार-बार उल्लंघन करने वालों की पहचान आसान हो जाएगी। साथ ही, अलग-अलग राज्यों के रिकॉर्ड भी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने से कोई भी चालक केवल स्थान बदलकर कार्रवाई से बच नहीं सकेगा।
दुनिया के कई देशों में पॉइंट-आधारित ड्राइविंग सिस्टम पहले से प्रभावी है। वहां लगातार नियम तोड़ने वाले चालकों के लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए जाते हैं या उन्हें दोबारा ड्राइविंग परीक्षा देनी पड़ती है। भारत में भी यदि ऐसी व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी रिकॉर्डिंग सिस्टम और निष्पक्ष मूल्यांकन प्रक्रिया भी जरूरी होगी। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि गलत चालान या तकनीकी त्रुटियों के कारण किसी चालक को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए अपील और रिकॉर्ड सुधारने की स्पष्ट व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
सरकार की योजना के अनुसार यह पूरा सिस्टम चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट और संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद राज्यों के परिवहन विभागों को भी नई व्यवस्था के अनुरूप अपनी प्रक्रियाओं में बदलाव करना होगा। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ा संदेश यही होगा कि केवल लाइसेंस बनवा लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे समय जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाना भी उतना ही आवश्यक होगा। भविष्य में ट्रैफिक नियमों का पालन केवल चालान से बचने का माध्यम नहीं रहेगा, बल्कि ड्राइविंग लाइसेंस को सुरक्षित बनाए रखने की अनिवार्य शर्त भी बन जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, यातायात अनुशासन मजबूत होगा और देश में सुरक्षित ड्राइविंग की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

















Leave a Reply