हिमाचल प्रदेश की राजनीति में जुलाई का तीसरा सप्ताह अहम साबित हो सकता है। राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार संगठन और सत्ता के बीच बेहतर तालमेल बनाने के साथ-साथ लंबे समय से लंबित कैबिनेट विस्तार और मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर निर्णायक कदम उठाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में 16 या 17 जुलाई को धर्मशाला में कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और पार्टी हाईकमान के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में सरकार और संगठन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर मंथन होगा। बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कई महीनों से सुक्खू मंत्रिमंडल के विस्तार और कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव की चर्चाएं लगातार राजनीतिक गलियारों में चल रही हैं।
कांग्रेस नेतृत्व अब संगठन को अधिक सक्रिय बनाने, सरकार की कार्यशैली को और प्रभावी करने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर नई रणनीति तैयार करने के मूड में दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में कैबिनेट विस्तार, विभागों के पुनर्वितरण, संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय तथा क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा होगी। शनिवार को शिमला पहुंचीं प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने भी धर्मशाला में प्रस्तावित पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि फिलहाल शिमला में आयोजित दो दिवसीय संगठनात्मक बैठक में पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने, फ्रंटल संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि धर्मशाला में होने वाली बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल भी शामिल होंगे, जिससे बैठक का महत्व और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी स्वीकार किया है कि मंत्रिमंडल का विस्तार होना बाकी है। उन्होंने कहा कि इसका अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान ही करेगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो 16-17 जुलाई को धर्मशाला में प्रस्तावित बैठक तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगी और उसी दौरान कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों पर चर्चा संभव है।
कैबिनेट विस्तार के साथ कई नए चेहरों को मिल सकती है जिम्मेदारी
राज्य मंत्रिमंडल में इस समय मंत्री का एक पद खाली है। इसके अलावा पिछले काफी समय से एक या दो मौजूदा मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। यदि ऐसा होता है तो उनके स्थान पर नए विधायकों को मंत्री बनने का अवसर मिल सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व इस बार क्षेत्रीय, सामाजिक और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका देने की रणनीति पर काम कर रहा है। सबसे मजबूत दावेदारों में कुल्लू सदर से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। मंत्रिमंडल में खाली पड़े एक पद पर उनकी ताजपोशी लगभग तय मानी जा रही है। लंबे समय से संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय रहने के कारण उन्हें कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना सबसे अधिक बताई जा रही है।
यदि मंत्रिमंडल से एक या दो मौजूदा मंत्रियों की विदाई होती है तो नए चेहरों के लिए अवसर और बढ़ जाएंगे। संभावित दावेदारों में ज्वालाजी से विधायक संजय रत्न, पालमपुर से विधायक आशीष बुटेल और अर्की से विधायक संजय अवस्थी के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान और मुख्यमंत्री की सहमति से ही होगा। उम्मीदवारों के चयन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, राजनीतिक संतुलन और संगठन में योगदान जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। केवल नए मंत्रियों की नियुक्ति ही नहीं बल्कि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल किया जा सकता है। सरकार कुछ विभागों की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने के लिए जिम्मेदारियों का नया बंटवारा करने पर भी विचार कर रही है। इधर, विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद भी लंबे समय से खाली है।
माना जा रहा है कि आगामी मानसून सत्र से पहले इस पद पर भी नियुक्ति की जा सकती है। ऐसे में संभावना है कि मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों के फेरबदल और डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति जैसे फैसले एक साथ किए जाएं, ताकि सरकार नए राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन के साथ आगे बढ़ सके। धर्मशाला में होने वाली पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर रहेगा। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि संगठन की अपेक्षाओं और सरकार की कार्यप्रणाली के बीच बेहतर तालमेल बने, जिससे आगामी चुनावों और राजनीतिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। कुल मिलाकर, 16-17 जुलाई को प्रस्तावित यह बैठक हिमाचल कांग्रेस के लिए केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार और पार्टी की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है। कैबिनेट विस्तार से लेकर विभागों के फेरबदल और संगठनात्मक मजबूती तक, कई बड़े फैसलों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

















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