दुनिया इस वक्त युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और टेक्नोलॉजी व व्यापार को लेकर महाशक्तियों की खींचतान के बीच गुरुवार को बीजिंग से ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अमेरिका और चीन जैसे दो प्रतिद्वंद्वी देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर न सिर्फ साथ दिखाई दिए, बल्कि दोनों ने खुलकर एक-दूसरे का सम्मान और स्वागत भी किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल पहुंचे, जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद आगे बढ़कर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और कैमरों के सामने मुस्कुराते हुए बातचीत की।
ट्रंप को चीन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसे कूटनीतिक तौर पर बेहद अहम संकेत माना जा रहा है। यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब पूरी दुनिया अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित रही है। बीते कुछ वर्षों में व्यापार युद्ध, टैरिफ, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तल्खी देखी गई थी। लेकिन इस बार बीजिंग में दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और बातचीत का अंदाज कुछ अलग नजर आया। ट्रंप ने बैठक की शुरुआत में कहा कि अमेरिका और चीन के रिश्ते अब पहले से बेहतर होने जा रहे हैं। उन्होंने शी जिनपिंग को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि उनके साथ होना सम्मान की बात है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका में हर कोई इस शिखर बैठक की चर्चा कर रहा है और दुनिया की नजर इस मुलाकात पर टिकी हुई है।
ट्रंप ने कहा कि वह दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी नेताओं को साथ लेकर चीन आए हैं। उन्होंने कहा कि आज यहां सिर्फ टॉप लोग मौजूद हैं, जो चीन और उसके नेतृत्व का सम्मान करने आए हैं। ट्रंप के इस बयान को दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस यात्रा की सबसे बड़ी चर्चा संभावित बोइंग विमान डील को लेकर हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी Boeing से करीब 9 लाख करोड़ रुपए के विमानों की खरीद का बड़ा समझौता कर सकता है। अगर यह डील अंतिम रूप लेती है तो यह दुनिया की सबसे बड़ी एविएशन डील्स में शामिल हो सकती है।
इस डील से न सिर्फ अमेरिकी एविएशन सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि यह संकेत भी जाएगा कि दोनों देश आर्थिक सहयोग के नए रास्ते तलाशना चाहते हैं। ट्रंप के साथ कई बड़े अमेरिकी कारोबारी भी चीन पहुंचे हैं। इनमें एलन मस्क, टिम कुक और कई बड़ी अमेरिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। टेक, फाइनेंस और एविएशन सेक्टर के इन उद्योगपतियों की मौजूदगी ने इस यात्रा को सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। बताया जा रहा है कि शी जिनपिंग इन अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ अलग से बैठक करेंगे। इसमें निवेश, बाजार पहुंच, सप्लाई चेन, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे समय से टेक्नोलॉजी वर्चस्व को लेकर मुकाबला चल रहा है, ऐसे में यह बैठक वैश्विक उद्योग जगत के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है।
अमेरिका-चीन रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत, दुनिया की नजर बीजिंग शिखर वार्ता पर
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी ट्रंप का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए साफ संकेत दिए कि बीजिंग अब टकराव से ज्यादा सहयोग की भाषा बोलना चाहता है। ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में शुरुआती संबोधन के दौरान जिनपिंग ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और वैश्विक स्थिति अस्थिर बनी हुई है। ऐसे समय में अमेरिका और चीन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। जिनपिंग ने कहा कि दुनिया अब एक नए मोड़ पर खड़ी है और यह सवाल बेहद अहम है कि क्या अमेरिका और चीन टकराव से बचकर रिश्तों का नया मॉडल तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार बनना चाहिए। चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और चीन के रिश्ते सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता और भविष्य इससे जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करना चाहिए और दुनिया को ज्यादा स्थिरता देनी चाहिए।
जिनपिंग ने कहा, “क्या हम दुनिया, अपने लोगों और मानवता के भविष्य के लिए अपने द्विपक्षीय रिश्तों का बेहतर भविष्य बना सकते हैं?” उनका यह बयान सीधे तौर पर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन अब अमेरिका के साथ रिश्तों में स्थिरता चाहता है। बीजिंग में ट्रंप को मिला भव्य स्वागत एक बड़ा संदेश है। चीन किसी विदेशी नेता को जितना बड़ा औपचारिक सम्मान देता है, उसे रिश्तों की अहमियत का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि ट्रंप के सम्मान में आयोजित स्टेट डिनर को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। व्हाइट हाउस के अनुसार चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ट्रंप के सम्मान में विशेष स्टेट डिनर आयोजित करेंगे। आमतौर पर इस तरह के कार्यक्रम ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित किए जाते हैं, जहां चीन का शीर्ष नेतृत्व विदेशी मेहमानों का स्वागत करता है।
इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और विशेष अतिथि शामिल होते हैं। यह दौरा सिर्फ औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं है। वैश्विक संकट, आर्थिक दबाव और बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच अमेरिका और चीन दोनों यह समझ चुके हैं कि लगातार टकराव दुनिया की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी वर्ष 2017 के चीन दौरे के दौरान शी जिनपिंग ने उनका विशेष स्वागत किया था, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। दुनिया इस समय कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है और ऐसे में बीजिंग में दोनों नेताओं की यह मुलाकात भविष्य की वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि यह गर्मजोशी सिर्फ तस्वीरों तक सीमित रहती है या फिर अमेरिका और चीन के रिश्तों में वास्तव में एक नए अध्याय की शुरुआत होती है।

















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