ITR भरने से पहले जरूर देखें Form 26AS और AIS, छोटी गलती भी बन सकती है नोटिस की वजह

इनकम टैैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आते ही टैक्सपेयर्स के लिए सबसे जरूरी दस्तावेजों में Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) शामिल हो जाते हैं। नौकरीपेशा कर्मचारियों से लेकर कारोबारियों, फ्रीलांसर्स और निवेशकों तक, हर टैक्सपेयर के लिए ये दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसकी वजह यह है कि इन दोनों रिकॉर्ड्स में टैक्स और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी लगभग हर जरूरी जानकारी दर्ज होती है। नए Income Tax Act 2025 के लागू होने के बाद Form 26AS की जगह अब Form 168 ने ले ली है, लेकिन आम लोगों के बीच आज भी इसे Form 26AS और AIS के नाम से ही जाना जा रहा है। आयकर विभाग की ओर से जारी ये दस्तावेज टैक्सपेयर्स को यह समझने में मदद करते हैं कि उनके नाम पर कितना टैक्स काटा गया, कितना सरकार के खाते में जमा हुआ और कौन-कौन से बड़े वित्तीय लेनदेन विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद हैं। 

Form 26AS को टैक्स का डिजिटल पासबुक भी कहा जाता है। यह दस्तावेज PAN नंबर के आधार पर तैयार किया जाता है और इसमें टीडीएस (TDS), टीसीएस (TCS), एडवांस टैक्स, सेल्फ असेसमेंट टैक्स और आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए रिफंड की पूरी जानकारी दर्ज रहती है। इसके अलावा इसमें प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री पर काटे गए टैक्स और बड़े लेनदेन का रिकॉर्ड भी शामिल होता है। दूसरी तरफ AIS यानी Annual Information Statement को आयकर विभाग की ज्यादा एडवांस और पारदर्शी व्यवस्था माना जाता है। AIS केवल टैक्स कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बैंक खातों में जमा रकम, एफडी पर मिलने वाला ब्याज, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश, क्रेडिट कार्ड खर्च, विदेश में भेजी गई रकम और दूसरी वित्तीय गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड दिखाई देता है। यह जानकारी बैंक, कंपनियों, म्यूचुअल फंड हाउस और दूसरी वित्तीय संस्थाओं द्वारा आयकर विभाग को भेजी जाती है।

ITR भरने से पहले Form 26AS और AIS की जांच करना बेहद जरूरी है। 

अगर टैक्सपेयर द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो विभाग की तरफ से नोटिस भेजा जा सकता है। इसके अलावा टैक्स रिफंड में भी देरी हो सकती है। कई बार कंपनियां या बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों का टीडीएस काट लेते हैं, लेकिन समय पर सरकार के खाते में जमा नहीं करते। ऐसी स्थिति में Form 26AS देखकर आसानी से पता लगाया जा सकता है कि टैक्स वास्तव में जमा हुआ है या नहीं। आज के समय में आयकर विभाग बड़े वित्तीय लेनदेन पर लगातार नजर रख रहा है। बैंक में बड़ी नकद जमा राशि, प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री, शेयर बाजार निवेश, महंगे क्रेडिट कार्ड भुगतान और विदेश में भेजा गया पैसा AIS में रिकॉर्ड होता है। इसलिए टैक्स विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी एंट्री को हल्के में नहीं लेना चाहिए, चाहे वह टैक्स फ्री लेनदेन ही क्यों न हो।

ऐसे डाउनलोड करें Form 26AS और AIS, ITR फाइल करने से पहले जरूर करें मिलान

Form 26AS और AIS को आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल या TRACES वेबसाइट के जरिए आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले टैक्सपेयर को आयकर विभाग की वेबसाइट पर अपने PAN और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करना होता है। इसके बाद ‘e-File’ सेक्शन में जाकर ‘Income Tax Returns’ विकल्प चुनना होता है। यहां ‘View Form 26AS’ पर क्लिक करने के बाद सिस्टम TRACES पोर्टल पर भेज देता है, जहां संबंधित असेसमेंट ईयर चुनकर फॉर्म को HTML या PDF फॉर्मेट में देखा और डाउनलोड किया जा सकता है। कई बैंक अपने ग्राहकों को नेट बैंकिंग के जरिए भी Form 26AS और AIS देखने की सुविधा देते हैं। इसके लिए जरूरी है कि PAN बैंक खाते से लिंक हो। 

ग्राहक नेट बैंकिंग में लॉगिन करके टैक्स सर्विस सेक्शन में जाकर सीधे अपना टैक्स स्टेटमेंट देख सकते हैं। आमतौर पर जब कोई कंपनी, बैंक या नियोक्ता टीडीएस रिटर्न दाखिल करता है, तो कुछ दिनों बाद उसकी जानकारी Form 26AS और AIS में दिखाई देने लगती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टैक्सपेयर्स जल्दबाजी में ITR दाखिल न करें और पहले यह सुनिश्चित कर लें कि सभी टीडीएस एंट्री सही तरीके से अपडेट हो चुकी हैं। 

ITR भरने से पहले वेतन आय, बैंक ब्याज, टीडीएस, पूंजीगत लाभ, म्यूचुअल फंड लेनदेन, रिफंड और बड़े ट्रांजैक्शन की जानकारी का मिलान जरूर करना चाहिए। अगर किसी एंट्री में गलती नजर आए तो आयकर पोर्टल पर ऑनलाइन फीडबैक देकर उसे सुधारा जा सकता है। सही जानकारी के साथ ITR दाखिल करने से नोटिस, जांच और रिफंड में देरी जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है।

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