मध्य पूर्व एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहां युद्ध और शांति के बीच की दूरी बेहद कम बची है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ समुद्री मार्गों पर युद्ध जैसे हालात हैं, दूसरी तरफ बंद कमरों में शांति समझौते की कोशिशें जारी हैं। यही वजह है कि वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और सुरक्षा एजेंसियों की नजरें इस समय खाड़ी क्षेत्र पर टिकी हुई हैं। हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जिस तरह सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं, उसने यह साफ कर दिया है कि संघर्षविराम केवल कागजों तक सीमित रह गया है। दोनों देशों की ओर से लगातार आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं। अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों और ईरान की जवाबी चेतावनियों ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है।
इसके बावजूद कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह ईरान के साथ नई शांति योजना पर आगे बढ़ना चाहता है। वॉशिंगटन को उम्मीद है कि तेहरान जल्द ही उसकी नई पहल पर प्रतिक्रिया देगा। माना जा रहा है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है तो खाड़ी क्षेत्र में कई महीनों से बना सैन्य तनाव कम हो सकता है। यह केवल दो देशों का विवाद नहीं रह गया है। इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ रहा है। दुनिया का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल पर निर्भर है। ऐसे में यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इटली की राजधानी रोम में कहा कि अमेरिका को ईरान की ओर से जल्द जवाब मिलने की उम्मीद है।
उनके मुताबिक अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान बातचीत की दिशा में आगे बढ़ता है या फिर सैन्य तनाव और गहराता है। उधर रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कतर के प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात कर संभावित समझौते पर चर्चा की है। माना जा रहा है कि कतर इस पूरे विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि संघर्षविराम अभी भी प्रभावी है, हालांकि हाल के घटनाक्रम इसके उलट संकेत दे रहे हैं। ट्रंप के अनुसार अमेरिका पहले युद्ध की स्थिति को औपचारिक रूप से समाप्त करना चाहता है, ताकि उसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर बातचीत हो सके।
होर्मुज में बढ़ा सैन्य तनाव, तेल बाजार और पर्यावरण संकट की आशंका गहराई
खाड़ी क्षेत्र में सबसे अधिक तनाव होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास देखने को मिल रहा है। ईरानी समाचार एजेंसी ने दावा किया कि सिरिक क्षेत्र के पास जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। आरोप है कि अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया गया, जिसमें चालक दल के कई सदस्य घायल हुए और कुछ लोग लापता बताए जा रहे हैं।इसके जवाब में अमेरिका ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे उसके तीन युद्धपोतों पर हमला किया गया था। अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, जबकि ईरानी पक्ष को भारी क्षति हुई है। ईरान ने इन आरोपों को अलग तरीके से पेश किया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका लगातार संघर्षविराम का उल्लंघन कर रहा है और जब भी बातचीत की संभावना बनती है, तब सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अप्रैल में घोषित संघर्षविराम काफी हद तक कायम था, लेकिन हाल की अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों ने स्थिति को बिगाड़ दिया।ईरानी सैन्य कमान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी बलों ने एक तेल टैंकर और अन्य जहाजों को निशाना बनाया। इसके साथ ही क़ेश्म द्वीप और आसपास के नागरिक क्षेत्रों में हवाई हमले किए गए। जवाब में ईरानी सेना ने अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया है। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंका को फिर तेज कर दिया है।तनाव केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं रहा। अब पर्यावरण संकट की चिंता भी सामने आने लगी है। ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खरग द्वीप के पास समुद्र में बड़े पैमाने पर तेल रिसाव की आशंका जताई गई है।
हाल में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में समुद्र की सतह पर फैला विशाल धूसर और सफेद धब्बा दिखाई दिया है, जिसे संभावित तेल रिसाव माना जा रहा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के उपग्रहों से मिली तस्वीरों के अनुसार यह फैलाव खरग द्वीप के पश्चिमी हिस्से में दिखाई दिया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह लगभग 45 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैल सकता है। यदि इसकी आधिकारिक पुष्टि होती है तो यह हाल के महीनों का सबसे बड़ा समुद्री तेल रिसाव साबित हो सकता है।विश्लेषकों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष अब केवल सैन्य शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। दुनिया फिलहाल इस इंतजार में है कि अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज तक पहुंचते हैं या फिर खाड़ी क्षेत्र एक और बड़े संघर्ष की आग में धकेल दिया जाएगा।

















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