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60 दिन बाद जहाजों के लिए खुला होर्मुज मार्ग, ईरान ने शुल्क मुक्त आवागमन का किया ऐलान, भारत समेत कई देशों के लिए राहत

ईरान ने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को अगले 60 दिनों तक शुल्क मुक्त आवागमन की अनुमति देने की घोषणा की है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा जारी इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। लंबे समय से भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण प्रभावित रहे इस समुद्री मार्ग पर अब गतिविधियां सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अगले दो महीनों तक किसी भी व्यावसायिक, मालवाहक या ऊर्जा परिवहन से जुड़े जहाज से मार्ग उपयोग शुल्क नहीं लिया जाएगा। 

इस अवधि में होने वाले प्रशासनिक और परिचालन संबंधी खर्चों का वहन ईरान सरकार स्वयं करेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों का विश्वास बढ़ेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस व्यापार की धुरी माना जाता है। दुनिया के कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी मार्ग से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर ऊर्जा कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि शुल्क मुक्त आवागमन की सुविधा का लाभ लेने के लिए सभी जहाजों को पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी के पास अपना आवेदन भेजना होगा। अथॉरिटी जहाजों के अनुरोधों का त्वरित निपटारा करेगी ताकि समुद्री यातायात सुचारू बना रहे। साथ ही जहाजों को निर्धारित सुरक्षित समुद्री मार्गों और समय-सारणी का पालन करना अनिवार्य होगा। सुरक्षा कारणों से किसी भी जहाज को निर्धारित दिशा-निर्देशों से हटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

ईरान ने यह भी कहा है कि समुद्री यातायात को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। शुरुआत में सीमित संख्या में जहाजों को अनुमति दी जाएगी और बाद में स्थिति सामान्य होने पर यातायात को पूर्ण क्षमता तक पहुंचाया जाएगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव कम रहेगा और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सकेगा। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हुए इस समझौते को दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। वर्षों से चले आ रहे तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और राजनीतिक टकराव के बीच यह समझौता कूटनीतिक स्तर पर बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को शुल्क मुक्त बनाने का निर्णय केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखता है। इसके जरिए ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देना चाहता है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक भूमिका निभाने को तैयार है। इससे विदेशी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संस्थाओं के बीच भी सकारात्मक संकेत जाएगा।

स्थायी शांति समझौते की दिशा में अहम कदम

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगले 60 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि ईरान को मिलने वाले आर्थिक लाभ केवल वादों पर आधारित नहीं होंगे, बल्कि उसके द्वारा उठाए गए वास्तविक और सत्यापित कदमों के आधार पर तय किए जाएंगे। वेंस ने इस अवधि को स्थायी शांति समझौते की दिशा में पहला चरण बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होगी। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और पश्चिम एशिया में स्थिरता जैसे विषय शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों में और सुधार देखने को मिल सकता है। 

वैश्विक ऊर्जा बाजार भी इस घोषणा पर करीबी नजर बनाए हुए है। होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। ऐसे में इस मार्ग पर सामान्य गतिविधियों की बहाली से तेल की कीमतों में स्थिरता आने और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कम होने की उम्मीद है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे वैश्विक व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। हालांकि यह केवल घोषणा से स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं होगी। इसके लिए ईरान और अमेरिका दोनों को समझौते के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन करना होगा। साथ ही क्षेत्रीय देशों का सहयोग भी आवश्यक रहेगा। 

आने वाले 60 दिन इस बात को तय करेंगे कि यह पहल अस्थायी राहत साबित होती है या फिर पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और आर्थिक सहयोग का आधार बनती है। फिलहाल दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान-अमेरिका के बीच शुरू हुई नई कूटनीतिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है। यदि यह प्रयास सफल होता है तो इसका लाभ केवल दोनों देशों को ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी मिलेगा। इससे लंबे समय से चले आ रहे तनाव में कमी आने के साथ-साथ समुद्री व्यापार के लिए अधिक सुरक्षित और स्थिर वातावरण तैयार हो सकेगा।

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