40 साल के सैन्य अनुभव वाले लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के अगले सेना प्रमुख, उपेंद्र द्विवेदी का लेंगे स्थान

भारतीय सेना के नेतृत्व में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने वर्तमान उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला सेना प्रमुख नियुक्त करने का फैसला किया है। वह वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे और 30 जून को पदभार ग्रहण करेंगे। लगभग चार दशक के शानदार सैन्य अनुभव, रणनीतिक नेतृत्व और विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में सफल कमान संभालने के कारण धीरज सेठ को भारतीय सेना के सबसे अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं और सेना आधुनिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना नई रणनीतिक क्षमताओं और तकनीकी सुधारों के साथ और अधिक मजबूत होगी।

सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ 30 जून को सेना प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे। उन्हें जनरल के स्थायी रैंक के साथ यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक रहेगा। 

इस तरह उन्हें सेना के नेतृत्व में अपनी रणनीतिक सोच और अनुभव को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर करीब 40 वर्षों तक फैला हुआ है। इस दौरान उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण सैन्य क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। रेगिस्तानी इलाकों से लेकर जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील क्षेत्रों तथा पश्चिमी सीमा तक उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। कठिन परिस्थितियों में नेतृत्व क्षमता और ऑपरेशनल दक्षता के कारण उन्होंने सेना के भीतर एक मजबूत पहचान बनाई है। अपने लंबे सैन्य जीवन में धीरज सेठ ने विभिन्न स्तरों पर कमान संभाली है। उन्हें रणनीतिक योजना, सीमा सुरक्षा, सैन्य संचालन और क्षमता विकास जैसे क्षेत्रों में व्यापक अनुभव प्राप्त है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों को समझने और उनका प्रभावी समाधान तैयार करने की उनकी क्षमता उन्हें एक सफल सेना प्रमुख बना सकती है।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इन दोनों कमानों का नेतृत्व करना किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। विशेष रूप से पश्चिमी मोर्चे पर दो महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमानों की जिम्मेदारी संभालने वाले वह चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं। 

यह अनुभव उन्हें सीमावर्ती चुनौतियों, सामरिक तैयारियों और बड़े सैन्य अभियानों की गहरी समझ प्रदान करता है। उनका अनुभव केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के तहत अंगोला में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के दौरान उन्हें बहुराष्ट्रीय सैन्य समन्वय, शांति स्थापना अभियानों और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य की समझ विकसित करने का अवसर मिला। इस अनुभव को भारतीय सेना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आज सुरक्षा चुनौतियां केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रह गई हैं। सेना मुख्यालय में भी उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। क्षमता विकास, सैन्य आधुनिकीकरण और भविष्य की युद्ध तैयारियों से जुड़े विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में योगदान दिया। सेना के भीतर तकनीकी उन्नयन, नई सैन्य क्षमताओं के विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर उनकी सोच को काफी सकारात्मक माना जाता है।

नेतृत्व, सम्मान और भविष्य की चुनौतियां

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और सैन्य योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) प्रदान किए गए हैं। ये सम्मान भारतीय सशस्त्र बलों में उत्कृष्ट नेतृत्व, साहस, रणनीतिक दक्षता और विशिष्ट सेवाओं के लिए दिए जाते हैं। इन सम्मानों से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपने पूरे करियर में उच्च स्तर की पेशेवर प्रतिबद्धता और नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय सेना कई महत्वपूर्ण बदलावों के दौर से गुजर रही है। 

सेना में तकनीकी आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य प्रणालियों का उपयोग, साइबर सुरक्षा और सीमा प्रबंधन जैसे मुद्दे प्राथमिकता में हैं। इसके अलावा उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां भी लगातार बनी हुई हैं। ऐसे में धीरज सेठ का व्यापक अनुभव सेना को इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में मददगार साबित हो सकता है। आने वाले वर्षों में भारतीय सेना को पारंपरिक सैन्य ताकत के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी अधिक सक्षम बनाने की आवश्यकता होगी। इस दिशा में धीरज सेठ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। उन्होंने अपने पिछले कार्यकालों में सैन्य क्षमता निर्माण और आधुनिक युद्ध रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया है, जिसके कारण उनसे बड़ी अपेक्षाएं की जा रही हैं। 

भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सक्षम सेनाओं में से एक है। ऐसे में सेना प्रमुख का पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व होता है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के अनुभव, नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक समझ को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। अब पूरे देश की नजर उनके नेतृत्व पर होगी कि वह भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप किस तरह नई दिशा और मजबूती प्रदान करते हैं।

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