हिमाचल प्रदेश में सरकारी बस सेवा संचालित करने वाले हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने अपने ड्राइवरों और कंडक्टरों के लिए ड्रेस कोड को लेकर नई सख्ती शुरू कर दी है। निगम प्रबंधन की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि ड्यूटी के दौरान चालक और परिचालक गले या सिर में परना, गमछा या किसी भी तरह का रंग-बिरंगा कपड़ा नहीं बांधेंगे। इस फैसले के बाद परिवहन निगम के कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है। निगम के विभिन्न डिपो में क्षेत्रीय प्रबंधकों (आरएम) की ओर से इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिए गए हैं। साथ ही अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं कि चालक और परिचालक निर्धारित वर्दी में ही ड्यूटी करें और नियमों का पूरी तरह पालन हो।
हिमाचल पथ परिवहन निगम प्रबंधन का कहना है कि निगम की एक निर्धारित वर्दी है और उसी के अनुरूप कर्मचारियों को ड्यूटी करनी चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक वर्दी के साथ अलग-अलग रंगों के गमछे, परने या कपड़े बांधने से कर्मचारियों की पेशेवर छवि प्रभावित होती है और यात्रियों के बीच निगम की एकरूपता भी कमजोर पड़ती है। निगम ने अपने आदेशों में यह भी स्पष्ट किया है कि ड्रेस कोड का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसके बाद कई डिपुओं में कर्मचारियों के बीच इस आदेश को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से कई चालक और परिचालक ड्यूटी के दौरान सिर या गले में कपड़ा बांधकर बस संचालन कर रहे थे। निगम प्रबंधन ने इसे नियमों के विपरीत मानते हुए अब इस पर रोक लगाने का फैसला लिया है। दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले को कर्मचारियों की जरूरतों से दूर और व्यवहारिक परिस्थितियों की अनदेखी करने वाला कदम बताया है। हिमाचल पथ परिवहन मजदूर संघ ने आदेशों का विरोध करते हुए कहा है कि निगम प्रबंधन कर्मचारियों की मूल समस्याओं को हल करने के बजाय नए-नए प्रतिबंध लागू करने में लगा हुआ है। मजदूर संघ के महासचिव हरीश पराशर ने कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम के चालक और परिचालक केवल हिमाचल तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली जैसे मैदानी इलाकों तक लंबी दूरी की सेवाएं देनी पड़ती हैं। गर्मियों में इन क्षेत्रों का तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
ऐसे में कर्मचारी पसीना पोंछने और तेज गर्मी से राहत पाने के लिए गले में कपड़ा रखते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार लगातार घंटों तक बस चलाने के कारण चालक धूप और गर्म हवाओं से परेशान हो जाते हैं। ऐसे समय में गमछा या हल्का कपड़ा उनके लिए सहूलियत का काम करता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रबंधन को कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों को समझते हुए फैसले लेने चाहिए। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि निगम में कर्मचारियों की कमी, लंबी ड्यूटी, बसों की तकनीकी समस्याएं और अन्य सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन उन पर ध्यान देने के बजाय ड्रेस कोड जैसे मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि कोई चालक या परिचालक निर्धारित वर्दी में रहते हुए गर्मी से बचाव के लिए साधारण कपड़ा इस्तेमाल करता है तो उसे अनुशासनहीनता नहीं माना जाना चाहिए।
हिमाचल पथ परिवहन निगम कर्मचारी संगठनों ने फैसले को बताया अव्यावहारिक
हिमाचल पथ परिवहन निगम कर्मचारियों के बीच अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या निगम आने वाले समय में ड्रेस कोड को लेकर और ज्यादा सख्ती करेगा। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में सबसे अधिक जरूरी यात्रियों की सुरक्षा और समय पर सेवा है, जबकि ड्रेस को लेकर सख्ती कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित कर सकती है। वहीं निगम प्रबंधन का पक्ष है कि सरकारी परिवहन सेवा में एक समान वर्दी और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। अधिकारियों का मानना है कि जब कर्मचारी तय ड्रेस कोड में रहते हैं तो इससे यात्रियों के बीच निगम की पहचान मजबूत होती है और व्यवस्था अधिक पेशेवर नजर आती है।
कुछ डिपो में अधिकारियों ने कर्मचारियों को मौखिक रूप से भी समझाइश दी है कि वे ड्यूटी के दौरान किसी प्रकार का अतिरिक्त कपड़ा न पहनें। हालांकि कई कर्मचारियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भीषण गर्मी में यह आदेश व्यावहारिक नहीं है। मजदूर संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि निगम प्रबंधन ने आदेश वापस नहीं लिया तो इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाया जा सकता है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखे बिना केवल अनुशासन के नाम पर आदेश लागू करना उचित नहीं होगा।
इधर यात्रियों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग निगम के फैसले को सही बताते हुए कहते हैं कि सरकारी कर्मचारियों को निर्धारित वर्दी में ही रहना चाहिए, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि गर्मी और लंबी ड्यूटी को देखते हुए कर्मचारियों को थोड़ी राहत मिलनी चाहिए। फिलहाल निगम प्रबंधन अपने आदेशों को लागू करने की तैयारी में है, जबकि कर्मचारी संगठन विरोध के मूड में दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि निगम अपने फैसले पर कायम रहता है या कर्मचारियों की मांगों को देखते हुए इसमें कोई बदलाव किया जाता है।

















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