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मोबाइल फोन अब सिर्फ संचार का साधन नहीं, सुशासन और सरकारी सेवाओं की पहुंच का बना सबसे बड़ा माध्यम

एक दशक पहले तक मोबाइल फोन को मुख्य रूप से बातचीत और संदेश भेजने का साधन माना जाता था, लेकिन डिजिटल क्रांति ने इसकी भूमिका पूरी तरह बदल दी है। आज मोबाइल फोन सिर्फ लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने वाला उपकरण नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल भुगतान और सरकारी सेवाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण का उद्घाटन करते हुए कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में भारत ने मोबाइल और इंटरनेट को आम नागरिक के सशक्तीकरण का माध्यम बनाया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के केंद्र में मोबाइल फोन को रखकर देश ने डिजिटल दूरी कम करने और तकनीक को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय भारत के सामने डिजिटल डिवाइड बड़ी चुनौती थी। आधुनिक तकनीक और इंटरनेट की सुविधाएं समाज के एक सीमित वर्ग तक ही पहुंच पा रही थीं। सरकार ने डिजिटल इंडिया अभियान के जरिए इस तस्वीर को बदलने का प्रयास किया। मोबाइल फोन और इंटरनेट को डिजिटल पहुंच का आधार बनाकर सेवाओं को सीधे नागरिकों तक पहुंचाया गया। इसका असर शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, बैंकिंग, भुगतान और सरकारी योजनाओं तक दिखाई दे रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि मोबाइल फोन अब केवल बातचीत या चैट का माध्यम नहीं रह गया है। इसने लोगों की आवाजाही कम की है, सरकारी कार्यालयों में लगने वाली कतारों और इंतजार को घटाया है तथा कई सेवाओं की लागत भी कम की है। आज सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल फोन के जरिए उपलब्ध हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों के बैंक खातों में पहुंच रहा है, जिससे व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके जरिए करीब 50 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए हैं। उनके अनुसार, इस व्यवस्था से करीब 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था में इतनी बड़ी राशि के रिसाव की आशंका बनी रहती थी, लेकिन डिजिटल व्यवस्था ने सरकारी सहायता को सही लाभार्थी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारत की डिजिटल यात्रा में दूरसंचार ढांचे के विस्तार को भी प्रधानमंत्री ने बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि देश में अब 5जी नेटवर्क को समर्थन देने वाले 55 लाख से अधिक बेस स्टेशन मौजूद हैं। मोबाइल इंटरनेट की गति वर्ष 2022 की तुलना में करीब 10 गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि इंडिया मोबाइल कांग्रेस ने भारत की 5जी यात्रा को करीब से देखा है। वर्ष 2022 में इसी मंच से 5जी की शुरुआत हुई थी और इसके बाद देश का ध्यान तेजी से इसके विस्तार और आम उपभोक्ताओं तक पहुंच बढ़ाने पर रहा।

दूरदराज के इलाकों तक टेलीकॉम ढांचे के विस्तार का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीते वर्षों में गांवों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर काम हुआ है। नए टावर लगाए गए, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार हुआ और डेटा की कीमतों में कमी आई। इसका सीधा फायदा उन परिवारों और बच्चों को मिला है, जो पहले गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन सेवाओं से दूर थे।

डिजिटल पहुंच से नई अर्थव्यवस्था तक भारत की छलांग

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी का असर केवल सरकारी सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शिक्षा और युवाओं के लिए भी नए अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने दीक्षा मंच का उदाहरण देते हुए कहा कि इस पर करीब 500 करोड़ सीखने के सत्र और 600 करोड़ सीखने के मिनट दर्ज किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य इस मंच के माध्यम से 25 करोड़ छात्रों को जोड़ना है। इससे पता चलता है कि मोबाइल और इंटरनेट किस तरह शिक्षा को स्कूल और कक्षा की सीमाओं से बाहर लेकर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गेमिंग क्षेत्र में हो रहे बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में 50 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में गेमिंग से जुड़े हैं। खास बात यह है कि इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। युवा अब सिर्फ मोबाइल पर गेम खेलने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ई-स्पोर्ट्स में हिस्सा ले रहे हैं, गेमिंग सामग्री तैयार कर रहे हैं और इससे जुड़े नए कारोबार भी खड़े कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि इस बदलाव ने मोबाइल फोन की भूमिका को भी बदल दिया है। यह अब केवल गेम खेलने का उपकरण नहीं, बल्कि गेमिंग कंसोल और रचनात्मक काम का मंच बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में उपभोक्ता से रचनाकार बनने की यात्रा तय की है। अब जरूरत इस बात की है कि देश केवल तकनीक का इस्तेमाल करने वाला बाजार न बने, बल्कि तकनीक, उत्पाद, डिजाइन और बौद्धिक संपदा का निर्माण करने वाला प्रमुख केंद्र बने। इस अवसर पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत का ब्रॉडबैंड उपभोक्ता आधार पिछले एक दशक में करीब 6 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि देश 6जी के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की डिजिटल यात्रा अब उस मुकाम पर पहुंच रही है, जहां तकनीक केवल सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक बदलाव का आधार बन रही है। मोबाइल कनेक्टिविटी, तेज इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं ने आम नागरिक को सरकारी व्यवस्था के करीब लाने के साथ-साथ युवाओं के लिए नए अवसर भी खोले हैं। आने वाले समय में 6जी और नई तकनीकों के विस्तार के साथ भारत का लक्ष्य केवल दुनिया की तकनीक का उपभोक्ता बनना नहीं, बल्कि तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में नेतृत्व करने वाला देश बनना है।

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