पिछले दस दिनों में जब पेट्रोल और डीजल की कीमतें तीन बार बढ़ चुकी थीं, तब आम आदमी यही उम्मीद लगाए बैठा था कि शायद अब राहत मिलेगी। घर का बजट किसी तरह संभल जाएगा, रसोई से लेकर रोजमर्रा की यात्रा तक खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण रहेगा। लेकिन सोमवार, 25 मई की सुबह लोगों के लिए एक और बड़ा झटका लेकर आई। तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में तगड़ी बढ़ोतरी कर दी। इस नई वृद्धि ने साफ कर दिया है कि फिलहाल महंगाई से राहत मिलने वाली नहीं है। सोमवार को पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी बार हुआ है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। लगातार हो रही बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोगों, छोटे कारोबारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है।
लोग अब सिर्फ पेट्रोल पंप पर नहीं, बल्कि हर मोर्चे पर बढ़ते खर्च का दबाव महसूस कर रहे हैं। नई कीमतों के बाद दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। देश के कई बड़े शहरों में भी कीमतें 110 रुपये के पार बनी हुई हैं। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये, मुंबई में 111.21 रुपये, जयपुर में 113.4 रुपये और पटना में 113.5 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु, भूवनेश्वर, लखनऊ और नोएडा जैसे शहरों में भी तेल के दाम लगातार आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। शनिवार को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। उस दिन पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हुआ था। इसके साथ ही दिल्ली में सीएनजी की कीमतों में भी 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई थी। यानी राहत का कोई भी रास्ता फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है।
पेट्रोल-डीजल के साथ सीएनजी महंगी होने से टैक्सी, ऑटो और सार्वजनिक परिवहन का खर्च भी बढ़ने की आशंका है। ईंधन की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का संकट गहराता जा रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अब सीधे तेल बाजार को प्रभावित कर रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और वहां लगाए गए प्रतिबंधों ने दुनिया भर की तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है। होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइनों में गिना जाता है।
यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर असर पड़ने का मतलब है वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का उछलना। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले कई हफ्तों से भारत की तेल कंपनियां पुराने दामों पर पेट्रोल और डीजल बेच रही थीं, लेकिन अब बढ़ती लागत का असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगा है। सरकार और तेल कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती घाटे को नियंत्रित करने की थी। बताया जा रहा है कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां रोजाना 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का सामूहिक नुकसान झेल रही थीं।
बढ़ते तेल दामों से हर सेक्टर पर असर, महंगाई और बढ़ने की आशंका
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि आने वाले दिनों में महंगाई को और तेज कर सकती है। परिवहन महंगा होने का असर सीधे खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दूध, फल और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से बाजार में सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ जाता है, जिसका बोझ आखिरकार आम ग्राहकों को ही उठाना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जो रोजाना निजी वाहनों से लंबी दूरी तय करते हैं। नौकरीपेशा वर्ग के लिए हर महीने का पेट्रोल खर्च अब बजट बिगाड़ने लगा है। वहीं छोटे व्यापारियों और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। ट्रक और बस ऑपरेटरों ने भी संकेत दिए हैं कि यदि यही स्थिति बनी रही तो किराए बढ़ाए जा सकते हैं।
गांव और कस्बों में भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। खेती-किसानी से जुड़े कामों में डीजल की बड़ी भूमिका होती है। डीजल महंगा होने से सिंचाई, ट्रैक्टर और माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, जिसका असर कृषि उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में खाद्यान्न की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक तेल की कीमतों में स्थिरता की उम्मीद कम है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो कच्चा तेल और महंगा हो सकता है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ेगा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में थोड़ी सी हलचल भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती है।
हालांकि सरकार की ओर से फिलहाल टैक्स में राहत या कीमतों को नियंत्रित करने को लेकर कोई बड़ा संकेत नहीं मिला है। ऐसे में लोगों की चिंता और बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि अब सिर्फ गाड़ी चलाना ही नहीं, घर चलाना भी मुश्किल होता जा रहा है। बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी होगी या फिर सरकार कोई राहत देगी। लेकिन मौजूदा हालात देखकर इतना तय माना जा रहा है कि महंगाई का यह दबाव जल्द खत्म होने वाला नहीं है। आम आदमी की जेब पर ईंधन की यह आग लगातार भारी पड़ती जा रही है।

















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